HomeLatest Newsअंकिता भंडारी हत्याकांड: उत्तराखंड बंद का दिखा मिला-जुला असर

अंकिता भंडारी हत्याकांड: उत्तराखंड बंद का दिखा मिला-जुला असर

ANKITA BHANDARI CASE: रविवार को विभिन्न संगठनों, कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से बुलाए गए ‘उत्तराखंड बंद’ का पूरे प्रदेश में मिला-जुला असर देखने को मिला है। प्रदेश सरकार द्वारा अंकिता भंडारी प्रकरण में सीबीआई जांच की सिफारिश किए जाने के बावजूद पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत यह बंद आयोजित किया गया था। इस दौरान जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार पूरी तरह बंद नजर आए, वहीं शहरी क्षेत्रों में बंद का खास प्रभाव नहीं देखा गया। राज्य के सिर्फ दो जिलों में बंद का व्यापक समर्थन मिला, तीन जिलों में स्थिति मिली-जुली रही, जबकि छह जिलों में यह बंद पूरी तरह बेअसर साबित हुआ।

ANKITA BHANDARI CASE
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ANKITA BHANDARI CASE: देहरादून में जबरन दुकानें बंद कराने पर तनाव

राजधानी देहरादून में बंद का असर आंशिक और तनावपूर्ण रहा। शहर में विभिन्न संगठनों और उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। देहरादून के पलटन बाजार में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने दोपहर के वक्त जबरन दुकानों को बंद कराने का प्रयास किया। इस कार्रवाई से व्यापारी भड़क गए और उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जबरदस्ती परेशान किया जा रहा है। कुछ देर के लिए व्यापारियों ने दुकानें बंद भी रखीं, लेकिन संगठनों के वहां से हटते ही दुकानें दोबारा खोल दी गईं।

ANKITA BHANDARI CASE
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सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए घंटाघर, आईएसबीटी और पलटन बाजार के आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा। देहरादून के व्यापार मंडल ने इस बंद का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक और व्यापारी विरोधी कदम करार दिया था। दूसरी ओर, ऋषिकेश में बंद का असर मिला-जुला रहा। यहां का मुख्य बाजार करीब 80 से 90 प्रतिशत तक बंद रहा, लेकिन तिलक रोड, हीरालाल मार्ग, पुरानी चुंगी और लाजपत मार्ग पर दुकानें खुली रहीं। बस स्टैंड क्षेत्र का बाजार भी बाद में सामान्य रूप से खुल गया था। बताया गया कि सीबीआई जांच की मंजूरी मिलने के बाद व्यापार मंडल और परिवहन व्यवसायियों ने खुद को बंद से अलग कर लिया था।

पहाड़ पर कैसा रहा बंद का प्रभाव?

पर्वतीय जिलों की बात करें तो चमोली और उत्तरकाशी में बंद का व्यापक असर देखने को मिला। चमोली के गोपेश्वर में व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखीं और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया। जिले के नंदानगर, कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली, देवाल, गैरसैंण और गौचर में बाजार बंद रहे। सिमली, आदिबदरी और मेहलचौंरी में भी दुकानें नहीं खुलीं। गोपेश्वर और ज्योतिर्मठ में साप्ताहिक बंदी के चलते भी दुकानें बंद रहीं। वहीं, उत्तरकाशी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर बाजार बंद कराकर मार्च निकाला। (ANKITA BHANDARI CASE)

ANKITA BHANDARI CASE
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पौड़ी जिले में बंद का असर बंटा हुआ नजर आया। यहां श्रीनगर, कीर्तिनगर, श्रीकोट, दुगड्डा, सतपुली, बीरोंखाल, एकेश्वर, पोखड़ा, देवप्रयाग, हिंडोलाखाल और जामणीखाल में अधिकतर बाजार बंद रहे। वहीं, कोटद्वार और लैंसडौन में दुकानें खुली रहीं और जनजीवन सामान्य रहा। रुद्रप्रयाग जिले में भी बाजार बंद रहे। टिहरी और उत्तरकाशी जिले के कुछ हिस्सों में बाजार खुले तो कहीं बंद रहे। साप्ताहिक अवकाश होने के कारण घनसाली, लंबगांव और नरेंद्रनगर की अधिकांश दुकानें पूरी तरह बंद रहीं।

ANKITA BHANDARI CASE: कुमाऊं मंडल में बेअसर रहा बंद

नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ में जनजीवन सामान्य रहा। नैनीताल में सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद बंद का आह्वान वापस ले लिया गया था, जिसके चलते बाजार सामान्य दिनों की तरह खुले रहे। हल्द्वानी में भी बाजार खुले रहे। बागेश्वर में साप्ताहिक बंदी होने के बावजूद उत्तरायणी मेले के चलते मुख्य बाजार खुला रहा और कपकोट व गरुड़ क्षेत्र में भी बंद का असर नहीं दिखा। पिथौरागढ़ और चंपावत में दुकानें खुली रहीं और लोग खरीदारी करते नजर आए। अल्मोड़ा में यूकेडी ने चौघानपाटा में प्रदर्शन जरूर किया, लेकिन रविवार होने के कारण बाजार पहले से ही बंद थे।

कांग्रेस ने सीबीआई जांच की सिफारिश को बताया नाकाफी

ANKITA BHANDARI CASE के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही। हरिद्वार और रुड़की में कांग्रेस ने ‘न्याय यात्रा’ निकाली, हालांकि वहां भी बाजार खुले रहे। हरिद्वार के लालढांग में आयोजित अंकिता भंडारी न्याय यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत शामिल हुए। उन्होंने पैदल यात्रा के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की सिफारिश तो कर दी है, लेकिन कांग्रेस को सरकार का यह कदम नाकाफी लग रहा है। हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि बेटी को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस लगातार संघर्ष कर रही है और यह आंदोलन श्रेय लेने के लिए नहीं है।

ANKITA BHANDARI CASE
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हरीश रावत का कहना था कि कांग्रेस शुरू से ही सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग कर रही है। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जज की देखरेख के बिना सरकार द्वारा कराई जाने वाली सीबीआई जांच अधूरी रहेगी और अंकिता को न्याय नहीं मिल पाएगा। वहीं, हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत ने भी जज की निगरानी के बिना सीबीआई जांच को निरर्थक बताया। उन्होंने कहा कि पूरा देश अंकिता को न्याय दिलाने के लिए एकजुट रहा, जिसके दबाव में सरकार को झुकना पड़ा और सीबीआई जांच की संस्तुति करनी पड़ी।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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