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हरिद्वार में बाघों के शिकार से हड़कंप, वन मंत्री ने घटनास्थल का किया निरीक्षण, दिये एक्शन के निर्देश

HARIDWAR TIGER HUNTING: हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज में दो बाघों के शिकार का बेहद सनसनीखेज और दर्दनाक मामला सामने आने के बाद पूरे उत्तराखंड में हड़कंप मच गया है।

इस घटना ने न केवल वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण को लेकर भी बड़ी चिंता पैदा कर दी है। मृत पाए गए दोनों बाघ करीब दो वर्ष के बताए जा रहे हैं, जिनमें एक नर और एक मादा शामिल हैं। वन अधिकारियों के अनुसार दोनों आपस में भाई-बहन थे।

वन मंत्री ने घटनास्थल का किया निरीक्षण

HARIDWAR TIGER HUNTING की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों को पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए।

वन मंत्री ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी अधिकारी या वनकर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ सीधे निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के साथ इस तरह की क्रूरता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी।

वन विभाग ने HARIDWAR TIGER HUNTING मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए वन्यजीव शिकार और तस्करी के आरोप में एक वन गुज्जर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि उसके तीन अन्य साथी अभी फरार बताए जा रहे हैं।

HARIDWAR TIGER HUNTING
HARIDWAR TIGER HUNTING

क्या है HARIDWAR TIGER HUNTING का मामला ?

वन विभाग के अनुसार HARIDWAR TIGER HUNTING मामला श्यामपुर रेंज की सजनपुर बीट स्थित श्यामपुर कम्पार्टमेंट संख्या 9 का है। सोमवार, 18 मई 2026 की शाम नियमित गश्त के दौरान वनकर्मियों को एक दो वर्षीय नर बाघ का क्षत-विक्षत शव मिला।

अगले दिन मंगलवार को उसी क्षेत्र में गहन तलाशी अभियान चलाया गया, जिसके दौरान एक गदेरे के भीतर झाड़ियों और पत्तों से छिपाकर रखा गया दो वर्षीय मादा बाघ का शव भी बरामद हुआ।

दोनों बाघों के चारों पैर काटे

जांच के दौरान सामने आया कि दोनों बाघों के चारों पैर धारदार हथियार से काट दिए गए थे। हालांकि उनकी खाल और दांत सुरक्षित पाए गए। घटनास्थल से कुल्हाड़ी जैसे हथियारों के निशान भी मिले हैं।

अधिकारियों का मानना है कि आरोपी पेशेवर शिकारी नहीं थे, बल्कि वे पंजों और नाखूनों को अलग कर अवैध बाजार में बेचने की मंशा से यह क्रूरता कर रहे थे।

भैंस को मारने के बाद बाघ को मारा 

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ दिन पहले जंगल में वन गुज्जरों की एक भैंस को बाघिन ने मार दिया था। आशंका है कि इसी घटना से नाराज होकर आरोपियों ने मृत भैंस के शव पर जहरीला पदार्थ छिड़क दिया।

जब दोनों युवा बाघ दोबारा उसी शव को खाने पहुंचे, तो जहरीला मांस खाने से उनकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने रात के अंधेरे में उनके पैर काट दिए और अन्य अंगों को ठिकाने लगाने की कोशिश की।

लगातार सर्च ऑपरेशन जारी

वन विभाग को मुखबिर तंत्र से मिली सूचना के आधार पर चलाए गए सर्च ऑपरेशन में HARIDWAR TIGER HUNTING का पूरा मामला उजागर हुआ। अधिकारियों का कहना है कि दोनों बाघों की मां के साथ भी किसी अनहोनी की आशंका बनी हुई है, क्योंकि आमतौर पर इस उम्र तक बाघ के बच्चे अपनी मां के साथ ही रहते हैं।

इस संभावना को देखते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग की संयुक्त टीमें जंगल में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

आरोपियों की पहचान 

इस मामले में गिरफ्तार आरोपी की पहचान आलम उर्फ फम्मी पुत्र शमशेर, निवासी गुज्जर डेरा, श्यामपुर कम्पार्टमेंट संख्या 9 के रूप में हुई है। उसे अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।

वहीं उसके तीन साथी आमिर हमजा उर्फ मियां, आशिक और जुप्पी फिलहाल फरार हैं। डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर उत्तराखंड और पड़ोसी राज्यों में दबिश दी जा रही है।

HARIDWAR TIGER HUNTING
HARIDWAR TIGER HUNTING

अवैध वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े तार

जांच एजेंसियों को यह भी संदेह है कि HARIDWAR TIGER HUNTING घटना के तार दिल्ली के अवैध वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। शुरुआती पूछताछ में संकेत मिले हैं कि आरोपी बाघों के पंजे, नाखून और अन्य अंग दिल्ली के अवैध बाजार में बेचने की तैयारी में थे।

वन्यजीव अपराध विशेषज्ञों के अनुसार बाघ के नाखूनों, दांतों और हड्डियों की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में भारी मांग रहती है, जहां इन्हें ताबीज, लॉकेट, शक्ति और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

HARIDWAR TIGER HUNTING घटना के बाद राजाजी टाइगर रिजर्व के बफर जोन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिस इलाके में यह घटना हुई, वह बाघों और हाथियों की नियमित आवाजाही वाला संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।

12 वर्षों में अब तक 132 बाघों की मौत दर्ज

श्यामपुर रेंज और राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्रों में पहले भी वन्यजीव शिकार के मामले सामने आते रहे हैं। मई 2024 में भी यहां बाघ के शिकार की घटना हुई थी, जबकि जुलाई 2022 में एसटीएफ ने बाघ की खाल के साथ चार अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया था।

पिछले 12 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक 132 बाघों की मौत दर्ज की जा चुकी है, जिसके चलते उत्तराखंड देश में बाघों की मौत के मामलों में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।

वर्ष 2022 की राष्ट्रीय बाघ गणना के मुताबिक राज्य में कुल 560 बाघ मौजूद हैं, जिनमें से लगभग 9 प्रतिशत बाघ हरिद्वार वन क्षेत्र और राजाजी टाइगर रिजर्व के इस संवेदनशील इलाके में निवास करते हैं।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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