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उत्तराखंड में जनगणना को लेकर निदेशालय एक्शन मोड में, बाधा डालने वालों पर सेंसस एक्ट में होगी FIR

UTTARAKHAND CENSUS: उत्तराखंड में जनगणना के तहत चल रहा मकान सूचीकरण और भवन गणना (HLO) अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। राज्य के अलग-अलग जनपदों में अब तक करीब 80 प्रतिशत ब्लॉकों और लगभग 80 प्रतिशत आबादी की गणना पूरी की जा चुकी है।

फील्ड में तैनात कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार, लोगों का असहयोग और पालतू कुत्तों के हमलों की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जनगणना कार्य निदेशालय उत्तराखंड ने अब सख्त रुख अपना लिया है।

विभाग ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय महत्व के इस अभियान में बाधा डालने, कर्मचारियों के काम में हस्तक्षेप करने या मकानों पर लिखे गए जनगणना नंबरों को मिटाने वाले लोगों के खिलाफ सीधे ‘जनगणना अधिनियम 1948’ (सेंसस एक्ट) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी और कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

UTTARAKHAND CENSUS में भवन गणना का काम लगभग पूरा 

राज्य के विभिन्न नगर निगमों और जिलों से सामने आए आंकड़े बताते हैं कि कुछ क्षेत्रों में काम लगभग पूरा होने की स्थिति में है, जबकि हल्द्वानी, ऋषिकेश और देहरादून जैसे बड़े शहरी इलाके अभी लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं।

  • आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक श्रीनगर में 46 हजार निर्धारित मकानों में से 44,325 की गणना पूरी हो चुकी है, जो लगभग 96.3 प्रतिशत है।
  • रुद्रपुर में 4 लाख लक्ष्य के मुकाबले 3,48,887 मकानों की गणना के साथ 87.2 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है।
  • हरिद्वार में 3,15,000 में से 2,50,249 मकानों का सर्वे कर 79.4 प्रतिशत काम पूरा किया गया है।
  • पिथौरागढ़ में 96 हजार लक्ष्य के मुकाबले 73,035 गणनाएं पूरी हुई हैं, जो 76 प्रतिशत है।
  • कोटद्वार में 2,30,000 में से 1,55,057 मकानों का सर्वे हुआ है।
  • देहरादून शहरी क्षेत्र में 14.50 लाख लक्ष्य के मुकाबले 9,47,955 मकानों की गणना पूरी हुई है, जो करीब 65 प्रतिशत है।
  • ऋषिकेश में 1,46,000 के लक्ष्य में से 94,092 और
  • हल्द्वानी में 5,50,000 के मुकाबले 3,49,990 मकानों की गणना पूरी की जा चुकी है।
UTTARAKHAND CENSUS
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ग्रामीण क्षेत्रों में काम की रफ्तार शहरी इलाकों की तुलना में बेहतर

प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में UTTARAKHAND CENSUS में भवन गणना की रफ्तार शहरी इलाकों की तुलना में बेहतर रही है। देहरादून के ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 68.5 प्रतिशत और नैनीताल के ग्रामीण इलाकों में 86.4 प्रतिशत मकान सूचीकरण पूरा किया जा चुका है।

दूसरी ओर हल्द्वानी और ऋषिकेश जैसे व्यापारिक शहरों में दिन के समय अधिकांश लोग घरों से बाहर रहते हैं और कई मकानों में ताले लगे मिलते हैं, जिससे काम की गति प्रभावित हो रही है। अधिकारी मौके पर जाकर सत्यापन के बाद ही आंकड़ों को अंतिम रूप दे रहे हैं।

प्रगणकों की स्थिति भी बेहद चुनौतीपूर्ण

UTTARAKHAND CENSUS में भवन गणना का फील्ड में काम कर रहे प्रगणकों की स्थिति भी बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कर्मचारियों को प्रतिदिन लगभग 12 घंटे तक काम करना पड़ रहा है और उन्हें करीब 200 घरों का लक्ष्य दिया गया है।

एक ओर विभागीय मोबाइल ऐप में तकनीकी दिक्कतें और दूरस्थ इलाकों में नेटवर्क की समस्या सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर कई स्थानों पर लोगों का व्यवहार भी कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि UTTARAKHAND CENSUS में भवन गणना के दौरान कई लोग दरवाजा तक नहीं खोलते, उन्हें बैठने या पानी तक के लिए नहीं पूछते और समय को लेकर अनावश्यक विवाद करते हैं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कई प्रगणक कुत्तों के हमलों का शिकार हो गए।

13 मई को देहरादून के नंदा की चौकी क्षेत्र में ड्यूटी कर रहे एक एन्यूमरेटर को पालतू कुत्ते ने काट लिया। सरकारी अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध न होने के कारण कर्मचारी को निजी अस्पताल से 450 रुपये प्रति डोज की दर से चार इंजेक्शन लगवाने पड़े।

इसी तरह खेराखेत क्षेत्र में एक आवारा हिंसक कुत्ते ने गणना कर्मचारी को दौड़ा लिया, जिससे बचने के दौरान वह नदी किनारे पत्थरों पर गिरकर घायल हो गया। इससे पहले 10 मई को पंडितवाड़ी क्षेत्र में भी एक महिला शिक्षिका, जो जनगणना कार्य में लगी थीं, कुत्ते के हमले का शिकार हो चुकी हैं।

UTTARAKHAND CENSUS
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निदेशालय एक्शन मोड में

UTTARAKHAND CENSUS में भवन गणना में इन समस्याओं को देखते हुए उत्तराखंड जनगणना कार्यालय की निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि 24 मई तक हर हाल में शत-प्रतिशत काम पूरा किया जाएगा।

कर्मचारियों के साथ अभद्रता करने, उन्हें घरों में प्रवेश न देने या मकानों पर लिखे गए आधिकारिक जनगणना नंबरों को जानबूझकर मिटाने वालों के खिलाफ अब सीधे कानूनी कार्रवाई होगी।

नई एसओपी के तहत अब प्रगणकों को खुद पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। संबंधित कर्मचारी केवल अपने ‘चार्ज अधिकारी’ को लिखित शिकायत देंगे। इसके बाद चार्ज अधिकारी स्वयं थाने में जाकर नामजद या अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे।

पुलिस प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि UTTARAKHAND CENSUS में भवन गणना के दौरान ऐसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत कठोर कानूनी कदम उठाए जाएं।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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