DEHRADUN NURSING PROTEST: उत्तराखंड की राजधानी DEHRADUN में वर्षवार भर्ती की मांग को लेकर चल रहा नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन अब उग्र होता दिख रहा है। शहर के परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी पर चार अभ्यर्थी और उत्तराखंड महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला पिछले 57 घंटे से अधिक समय से डटे हुए हैं।
टंकी पर मौजूद आंदोलनकारियों में विनोद, धर्मेंद्र, कविता, आनंद और ज्योति रौतेला शामिल हैं। प्रशासन और सरकार के साथ कई दौर की बातचीत विफल होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना रुख और सख्त कर लिया है। नीचे धरनास्थल पर भी बड़ी संख्या में नर्सिंग अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
लंबे समय तक भोजन-पानी से दूरी और अत्यधिक तनाव के कारण आंदोलनकारियों की तबीयत तेजी से बिगड़ रही है। आंदोलनकारियों ने फोन पर बताया कि उन्होंने खाना-पानी लगभग छोड़ दिया है और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियां महसूस हो रही हैं।
DEHRADUN NURSING PROTEST: खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास
DEHRADUN NURSING PROTEST के दौरान मंगलवार देर शाम स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब ज्योति रौतेला ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। हालांकि साथ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों ने उन्हें रोक लिया।
बाद में जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन केवल दबाव बनने के बाद हरकत में आया। उन्होंने बताया कि पेट्रोल शरीर पर पड़ने से उन्हें रैशेज और जलन की समस्या हो रही है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

इस घटना की जानकारी फैलते ही नीचे मौजूद नर्सिंग अभ्यर्थियों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने परेड ग्राउंड के बाहर सड़क पर बैठकर चक्का जाम कर दिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। देर रात स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा भी मौके पर पहुंचीं और आंदोलन समाप्त करने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी केवल लिखित शासनादेश मिलने पर ही आंदोलन समाप्त करने की बात पर अड़े रहे।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का DEHRADUN NURSING PROTEST को समर्थन
DEHRADUN NURSING PROTEST को अब कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिलने लगा है। UTTARAKHAND KRANTI DAL के नेताओं, बेरोजगार संगठनों और कांग्रेस नेताओं ने सरकार से तुरंत समाधान निकालने की मांग की है। कई सामाजिक कार्यकर्ता भी धरनास्थल पर पहुंचकर अभ्यर्थियों के समर्थन में बैठे हैं।
स्वास्थ्य विभाग में इस समय चार हजार से ज्यादा पद खाली
DEHRADUN NURSING PROTEST कर रहे अभ्यर्थियों और उनके समर्थकों ने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। ज्योति रौतेला का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में इस समय चार हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार युवाओं की मांगों को नजरअंदाज कर रही है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने साल 2015-16 में नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की थी और अब इतने वर्षों बाद वे दोबारा प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा देने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए उन्हें वर्षवार भर्ती के जरिए रोजगार का अवसर दिया जाना चाहिए।
नवल किशोर पुंडीर ने भी कहा कि राज्य में करीब तीन हजार से अधिक नर्सिंग पद खाली पड़े हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि सरकार के मंत्री मौखिक समर्थन तो दे रहे हैं, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
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आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की चार प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने अपनी चार प्रमुख मांगें रखी हैं।
- पहली मांग यह है कि भर्ती नियमावली को स्थायी रूप से वर्षवार लागू किया जाए ताकि भविष्य में भी भर्ती प्रक्रिया नियमित बनी रहे।
- दूसरी मांग के तहत अभ्यर्थी चाहते हैं कि आईपीएचएस मानकों के अनुसार पहले की तरह लगभग 2000 पदों पर वर्षवार भर्ती प्रक्रिया फिर से शुरू की जाए।
- तीसरी मांग में उन्होंने पिछली भर्तियों में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने और प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय देने की बात कही है।
- वहीं चौथी मांग के तहत अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि अब वे किसी भी मौखिक आश्वासन पर आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। उनका कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप में कोई ठोस निर्णय नहीं देती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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