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बिजनौर में आतंकी रिश्तों का खुलासा: दो और संदेहास्पद अभियुक्त धरे गए, जांच में तेजी

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में सामने आए आतंकी रिश्ते मामले में पुलिस ने बड़ी कार्यवाही करते हुए अन्य दो संदेहास्पद अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी पहले से जारी जांच का भाग है, जिसमें अब तक कुल छः अभियुक्तों को पकड़ा जा चुका है। पुलिस के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त था और लंबे समय से सक्रिय था।

गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में जीजा-साले का रिश्ता बताया जा रहा है, जिससे इस नेटवर्क के पारिवारिक और संगठित होने की आशंका भी मजबूत हुई है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए गहराई से जांच कर रही हैं।

कैसे जुड़ा आतंकी नेटवर्क से मामला

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को जोड़ रहा था। मुख्य आतंकी द्वारा एक ग्रुप बनाया गया था, जिसमें कट्टरपंथी विचारधारा और उत्तेजक सामग्री साझा की जाती थी। यह सामग्री विशेष रूप से समाज में तनाव पैदा करने और लोगों को भड़काने के इरादे से डाली जाती थी।

सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार अभियुक्तों में से एक पिछले दो सालों से दूसरे राज्य में काम कर रहा था और वहीं से नेटवर्क को संचालित करने में मदद कर रहा था। इस दौरान वह लगातार मुख्य आतंकी के संपर्क में था।

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां

इस मामले में पहले भी चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से एक अभियुक्त विदेश से लौटते ही हवाई अड्डे पर पकड़ा गया था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस ने बताया कि पहले पकड़े गए अभियुक्तों में से कुछ का संबंध पहले से संदेहास्पद गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों से था। यही कारण है कि जांच को अब और व्यापक किया जा रहा है।

सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर फैलाया जा रहा था जहर

आतंकी
आतंकी कनेक्शन

जांच में यह भी सामने आया है कि आतंकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर उत्तेजक वीडियो और पोस्ट साझा करते थे। इन पोस्ट्स का मकसद खास समुदायों को निशाना बनाना और हिंसा के लिए उकसाना था।
पुलिस के अनुसार, मुख्य आतंकी ने अपने साथियों को WhatsApp के जरिए हिदायत दिए थे कि किसी भी कार्यवाही के बाद तुरंत सबूत मिटा दिए जाएं। यही कारण है कि कई डिजिटल साक्ष्य को रिकवर करने में तकनीकी टीम को काफी मेहनत करनी पड़ रही है।

फर्जी कागजात बनाकर छिपा रहा था आतंकी पहचान

इस पूरे मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, जिसमें एक अभियुक्त ने फर्जी आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट बनवा रखे थे। इन कागजातों के जरिए वह अपनी पहचान छिपाकर भारत में रह रहा था।
पुलिस ने बताया कि आतंकी खुद को भारतीय नागरिक बताकर लंबे समय से रह रहा था, जबकि असल में वह विदेशी नागरिक निकला। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कागजात सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करने की बात कही है।

पुलिस और एजेंसियों की जांच तेज आतंकियों को लेकर

एसएसपी ने बताया कि एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्यवाही की और संदेहास्पद व्यक्ति को पकड़कर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे हुए, जिसके बाद अन्य आतंकी तक पहुंच बनाई गई।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का असली मकसद क्या था और यह किन-किन लोगों से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क को कहीं से फंडिंग मिल रही थी।

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सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ी सतर्कता

इस मामले के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है और साइबर सेल भी लगातार ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं, इसलिए समय रहते इनका खुलासा होना बेहद जरूरी है।

निष्कर्ष

बिजनौर का यह आतंकी कनेक्शन मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि किस तरह संगठित गिरोह सोशल मीडिया और फर्जी कागजातों का इस्तेमाल कर राष्ट्र की सुरक्षा को चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता से इस नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है, जिससे इस नेटवर्क के असली चेहरे और मकसद सामने आ सकते हैं।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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