RISHIKESH 4 LANE BYPASS: उत्तराखंड के ऋषिकेश में यातायात व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ऋषिकेश बाईपास के 4-लेन निर्माण कार्य के लिए 1105.79 करोड़ रुपये की तकनीकी, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है। इस परियोजना के लिए व्यय वित्त वर्ष 2025-26 में भारत सरकार के बजट प्रावधान के अंतर्गत किया जाएगा।
कहां से कहां तक बनेगा RISHIKESH 4 LANE BYPASS?
RISHIKESH 4 LANE BYPASS परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-7 पर तीनपानी फ्लाईओवर यानी किमी 529.750 से लेकर खरासोटे पुल यानी किमी 542.420 तक विकसित की जाएगी। लगभग 12.670 किलोमीटर लंबा यह बाईपास भट्टोवाला और ढालवाला गांवों से होकर गुजरेगा। इस परियोजना को EPC यानी इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन मोड पर क्रियान्वित किया जाएगा। निविदाएं ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से आमंत्रित की जाएंगी।
लागत में हुई कटौती, तीन साल में होगा काम पूरा
मंत्रालय के अनुसार RISHIKESH 4 LANE BYPASS परियोजना की प्रारंभिक अनुमानित लागत 1151.18 करोड़ रुपये थी जिसे संशोधित कर 1139.40 करोड़ रुपये किया गया और अंततः 1105.79 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना को तीन वर्षों की समयावधि में पूरा किया जाएगा और कार्य में किसी प्रकार की लागत या समय वृद्धि स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी कार्य निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप किए जाएंगे। देहरादून स्थित क्षेत्रीय अधिकारी को इस कार्य के लिए ड्रॉइंग एवं डिस्बर्सिंग ऑफिसर नामित किया गया है।

RISHIKESH 4 LANE BYPASS से मिलेगी जाम से राहत
RISHIKESH 4 LANE BYPASS के बनने से ऋषिकेश क्षेत्र में यातायात का दबाव कम होगा और जाम की समस्या से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है। चारधाम यात्रा के दौरान ऋषिकेश में भारी वाहनों और तीर्थयात्रियों की वजह से अक्सर भारी जाम की स्थिति बनती है। यह बाईपास स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ चारधाम यात्रा और पर्यटन गतिविधियों के लिए भी बड़ी सुविधा प्रदान करेगा।
सीएम धामी ने जताया RISHIKESH 4 LANE BYPASS का आभार
सीएम धामी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में केंद्र का आभार जताते हुए लिखा- “केंद्र सरकार द्वारा ऋषिकेश बाईपास 4 लेन हेतु ₹1105.79 करोड़ की तकनीकी, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने पर आदरणीय प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री का सहृदय आभार। यह परियोजना न केवल ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाएगी, बल्कि चारधाम यात्रा के सुचारू एवं सुरक्षित संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे स्थानीय जनता को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी और पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी।”
ऋषिकेश में गंभीर जाम की समस्या
ऋषिकेश में जाम की समस्या पिछले कुछ वर्षों में काफी गंभीर हो गई है, खासकर पर्यटन सीजन और वीकेंड्स पर। यहाँ जाम लगने के मुख्य कारण और प्रभावित इलाके कुछ इस प्रकार हैं:
जाम के मुख्य केंद्र
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लक्ष्मण झूला और तपोवन: यह क्षेत्र पर्यटकों का मुख्य गढ़ है। यहाँ की सड़कें संकरी हैं और कैफे व होटलों की अधिकता के कारण वाहनों का दबाव बहुत ज्यादा रहता है।
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मुनि की रेती और ढालवाला: ऋषिकेश में प्रवेश करने और बद्रीनाथ-केदारनाथ मार्ग पर जाने वाले वाहनों के कारण यहाँ अक्सर लंबी कतारें लगती हैं।

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ऋषिकेश बैराज रोड: नीलकंठ महादेव मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और वीआईपी मूवमेंट के कारण इस मार्ग पर भी भारी जाम देखने को मिलता है।
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चंद्रभागा पुल: यह शहर के पुराने हिस्से और नए ऋषिकेश को जोड़ने वाला मुख्य बिंदु है, जहाँ स्थानीय और बाहरी ट्रैफिक के मिलन से सुबह और शाम को जाम की स्थिति बनी रहती है।
जाम लगने के प्रमुख कारण
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पर्यटन और तीर्थयात्रा: मई-जून (चारधाम यात्रा का समय) और वीकेंड्स (शनिवार-रविवार) पर दिल्ली, हरियाणा और पंजाब से आने वाली गाड़ियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है।
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पार्किंग की कमी: तपोवन और लक्ष्मण झूला जैसे इलाकों में पर्याप्त पार्किंग न होने के कारण लोग सड़कों के किनारे गाड़ियाँ खड़ी कर देते हैं, जिससे सड़क और संकरी हो जाती है।
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राफ्टिंग सीजन: राफ्टिंग के शौकीनों को ले जाने वाले कमर्शियल वाहनों की आवाजाही भी मुख्य मार्गों पर दबाव बढ़ाती है।
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संकरी सड़कें: ऋषिकेश का भौगोलिक ढांचा ऐसा है कि पुरानी सड़कों का चौड़ीकरण करना काफी चुनौतीपूर्ण है।
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