/ Mar 17, 2026

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CHARDHAM YATRA 2026 के दौरान बद्री-केदार में अब रील्स नहीं बनेंगी! मोबाइल फोन और वीडियोग्राफी बैन

CHARDHAM YATRA 2026: देवभूमि उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध और पवित्र चारधाम यात्रा 2026 की तिथियों की आधिकारिक घोषणा हो गई है। इस वर्ष यात्रा का शुभारंभ 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर होगा। श्रद्धालु लंबे समय से कपाट खुलने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन इस बार की यात्रा पिछले वर्षों की तुलना में काफी अलग होने वाली है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने धामों की मर्यादा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोबाइल फोन और वीडियोग्राफी को लेकर अब तक का सबसे सख्त फैसला लिया है।

19 अप्रैल से शुरू होगी CHARDHAM YATRA 2026

उत्तराखंड पर्यटन विभाग और मंदिर समिति के अनुसार, 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट विधि-विधान के साथ खोल दिए जाएंगे। इसके पश्चात, 22 अप्रैल को भगवान केदारनाथ के कपाट खुलेंगे और 23 अप्रैल को भगवान बद्रीविशाल के दर्शनों के लिए मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। यह यात्रा नवंबर माह तक चलेगी, हालांकि कपाट बंद होने की अंतिम तिथियां मौसम और पंचांग के अनुसार बाद में तय की जाएंगी। CHARDHAM YATRA 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है और पहले सप्ताह में ही पंजीकरण का आंकड़ा 5 लाख को पार कर गया है।

CHARDHAM YATRA 2026
CHARDHAM YATRA 2026

मंदिर परिसर में मोबाइल और रील्स पर बैन

CHARDHAM YATRA 2026 के लिए बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। मंदिर परिसर में अब मोबाइल फोन ले जाने, वीडियो रिकॉर्डिंग करने, रील्स बनाने और फोटोग्राफी करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। BKTC की बजट बैठक में लिए गए इस फैसले का मुख्य उद्देश्य धाम की आध्यात्मिक गरिमा और पवित्रता को बनाए रखना है।

समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में देखा गया कि यूट्यूबर्स, ब्लॉगर्स और इन्फ्लुएंसर्स द्वारा मंदिर के भीतर वीडियो बनाने और रील्स शूट करने से दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती थी। इससे न केवल अनावश्यक भीड़ जमा होती थी, बल्कि सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी खड़ी हो रही थीं। अब श्रद्धालुओं को अपने फोन और कैमरे मंदिर के बाहर निर्धारित लॉकर या क्लॉक रूम में जमा करने होंगे। हेमंत द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि धाम तीर्थाटन के लिए हैं, पर्यटन स्थल के रूप में केवल फोटो खिंचवाने के लिए नहीं।

ई-पास और पंजीकरण की अनिवार्य व्यवस्था

भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ऑनलाइन पंजीकरण को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। 6 मार्च 2026 से शुरू हुई पंजीकरण प्रक्रिया के तहत अब तक लाखों लोग आवेदन कर चुके हैं। बिना कन्फर्मेशन स्लिप या ई-पास के किसी भी श्रद्धालु को धामों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून जैसे मुख्य प्रवेश द्वारों पर ऑफलाइन काउंटर भी खोले हैं, लेकिन यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे असुविधा से बचने के लिए पोर्टल पर पहले ही अपना पंजीकरण करा लें।

CHARDHAM YATRA 2026
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गैर-सनातनी प्रवेश और अन्य कड़े नियम

मंदिर समिति ने केवल मोबाइल पर ही नहीं, बल्कि प्रवेश नियमों पर भी कड़ाई की है। बजट बैठक में पारित प्रस्ताव के अनुसार, बद्रीनाथ और केदारनाथ सहित समिति के अंतर्गत आने वाले 47 मंदिरों में गैर-सनातनी (गैर-हिंदू) लोगों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके अलावा, यात्रियों के लिए स्वास्थ्य संबंधी गाइडलाइंस भी जारी की गई हैं। केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने के लिए यात्रियों को अपना फिटनेस सर्टिफिकेट साथ रखना होगा। पहाड़ी रास्तों पर चलने वाले वाहनों के लिए ट्रिप कार्ड और बाहरी राज्यों के वाहनों के लिए पुलिस वेरिफिकेशन को अनिवार्य बनाया गया है।

CHARDHAM YATRA 2026 में यूट्यूबर्स और ब्लॉगर्स के लिए नई गाइडलाइंस

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जो पहले मंदिर के भीतर से लाइव स्ट्रीमिंग या व्लॉगिंग करते थे, उनके लिए अब नियम बदल गए हैं। मंदिर समिति ने साफ किया है कि यदि कोई प्रतिबंधित क्षेत्र में वीडियोग्राफी करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दर्शन पर भी रोक लगाई जा सकती है। कंटेंट क्रिएटर्स को सलाह दी गई है कि वे मंदिर परिसर के बाहर से यात्रा के अन्य पहलुओं जैसे रूट, लॉजिस्टिक्स, ट्रेकिंग टिप्स और यात्रा की तैयारियों पर वीडियो बना सकते हैं।

CHARDHAM YATRA 2026
CHARDHAM YATRA 2026

सुविधाओं के लिए 121 करोड़ का बजट

CHARDHAM YATRA 2026 को सुगम बनाने के लिए BKTC ने 121 करोड़ रुपये का बजट पास किया है। इस धनराशि का उपयोग यात्रा मार्गों के सुधार, विश्राम गृहों (गेस्ट हाउस) के आधुनिकीकरण, स्वच्छता, पानी और बिजली की व्यवस्था दुरुस्त करने में किया जाएगा। केदारनाथ के 16 किमी लंबे पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों और पालकी की व्यवस्था को और बेहतर किया गया है। साथ ही, पंजीकरण के आधार पर ही प्रतिदिन दर्शन की संख्या निर्धारित की जा रही है ताकि किसी भी धाम में क्षमता से अधिक भीड़ जमा न हो। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बार तकनीक के बजाय श्रद्धा और शांति पर केंद्रित है।

ये भी पढ़िए- बदरी-केदार में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन, धार्मिक संगठनों की आ रही मिली जुली प्रतिक्रिया

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