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ISRAEL IRAN WAR: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’, मध्य-पूर्व तनाव, तेल संकट की जानिए लेटेस्ट अपडेट

ISRAEL IRAN WAR: मध्य-पूर्व में जारी भीषण युद्ध अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किए गए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। 17 मार्च 2026 तक प्राप्त आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, यह संघर्ष अब ईरान और इज़राइल की सीमाओं से निकलकर लेबनान, इराक, बहरीन और खाड़ी देशों तक फैल गया है। इस युद्ध ने न केवल हजारों जिंदगियां निगल ली हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के सामने इतिहास का सबसे बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

ISRAEL IRAN WAR की 18 दिनों की तबाही और मानवीय क्षति

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध के इन 18 दिनों में अब तक 2,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। ईरान के राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र में पुष्टि की है कि अकेले ईरान में 1,300 से अधिक लोगों की जान गई है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। 17 मार्च को ईरान के मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले में 170 से अधिक लोगों की मौत की खबर है, जिनमें ज्यादातर स्कूली छात्राएं थीं।

युद्ध की शुरुआत में ही ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया नेता नियुक्त किया गया था। हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ ने दावा किया है कि मोजतबा भी हमलों में घायल हैं और उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इज़राइली नेतृत्व को “खोजकर मारने” की कसम खाई है।

ISRAEL IRAN WAR
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होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक ऊर्जा संकट का केंद्र

ISRAEL IRAN WAR का सबसे घातक असर दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। IRGC ने स्पष्ट ऐलान किया है कि वे यहां से तेल का एक कतरा भी नहीं गुजरने देंगे। इसके परिणामस्वरूप, होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य 24 प्रतिदिन से घटकर मात्र 4 रह गई है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा व्यवधान करार दिया है। खाड़ी देशों ने अपने उत्पादन में 10 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कटौती की है। इस संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 40% से अधिक का उछाल आया है। रविवार 16 मार्च को ब्रेंट क्रूड की कीमत $106 प्रति बैरल के पार पहुँच गई, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। Goldman Sachs के अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि तेल की कीमतें इसी स्तर पर रहीं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है।

ISRAEL IRAN WAR का विस्तार: लेबनान और खाड़ी देशों में हाहाकार

यह संघर्ष अब बहुआयामी हो चुका है। लेबनान में इज़राइली हमलों में अब तक 850 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। इज़राइल ने दक्षिण लेबनान में “सीमित जमीनी ऑपरेशन” शुरू कर दिए हैं। वहीं, ईरान ने पहली बार ‘सेजिल’ (Sejjil) बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है, जिसकी मारक क्षमता 2,500 किलोमीटर तक है।

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खाड़ी देशों में भी तनाव चरम पर है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के मुख्यालय पर कई हमले हुए हैं। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक फ्यूल टैंक में ड्रोन हमले के बाद आग लगने की घटना से हवाई यातायात बाधित हुआ। अबू धाबी में भी मिसाइल के मलबे से एक व्यक्ति की मौत दर्ज की गई है। सऊदी अरब और कतर की सेनाएं लगातार ईरानी ड्रोन्स और मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में जुटी हैं।

सांस्कृतिक विरासत और भविष्य की अनिश्चितता

मानवीय क्षति के साथ-साथ ईरान की ऐतिहासिक विरासत को भी अपूरणीय क्षति पहुँची है। यूनेस्को (UNESCO) के अनुसार, इस्फहान के नक्श-ए-जहाँ स्क्वायर और तेहरान के गोलेस्तान पैलेस जैसी विश्व धरोहर स्थल बमबारी में क्षतिग्रस्त हुए हैं।

ISRAEL IRAN WAR
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वर्तमान में युद्धविराम (Ceasefire) की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कभी शांति की मांग नहीं की है, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को “पेपर टाइगर” बताते हुए अन्य देशों से होर्मुज का रास्ता खोलने के लिए नौसेना भेजने की अपील की है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया, जापान और कई यूरोपीय देशों ने इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार कर दिया है। 18वें दिन भी आसमान से बरसते बम और समुद्र में लगा पहरा दुनिया को एक गहरे अनिश्चित भविष्य की ओर धकेल रहा है।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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