HomeEducationहोली 2026: रंगों, उमंग और सांस्कृतिक एकता का महापर्व

होली 2026: रंगों, उमंग और सांस्कृतिक एकता का महापर्व

HOLI 2026: आज पूरे देश में होली पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है, ये त्यौहार भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन त्योहार है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह पर्व न केवल वसंत ऋतु के आगमन का संदेश देता है, बल्कि समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक भी है। इतिहासकारों के अनुसार, होली का प्रचलन आर्यों के काल से ही रहा है। इसका उल्लेख जैमिनी के ‘पूर्व मीमांसा-सूत्र’ और ‘नारद पुराण’ जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।

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HOLI से जुड़ी पौराणिक कथाएँ

होली से जुड़ी सबसे प्रचलित कथा भक्त प्रह्लाद और उनके पिता हिरण्यकशिपु की है। अभिमानी राजा हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र को मारने के लिए अपनी बहन होलिका (जिसे आग में न जलने का वरदान प्राप्त था) की गोद में बिठाकर आग में डाल दिया। परंतु भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। यही कारण है कि होली के पहले दिन ‘होलिका दहन’ किया जाता है। मध्यकाल में मुगल शासकों, विशेषकर अकबर, जहाँगीर और शाहजहाँ के समय में भी होली को ‘ईद-ए-गुलाबी’ के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता था।

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होली के विभिन्न रूप और क्षेत्रीय विविधता

भारत के विभिन्न हिस्सों में होली अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है:

  • ब्रज की होली: मथुरा और वृंदावन की होली विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ बरसाने की लठमार होली विशेष आकर्षण का केंद्र होती है।

  • उत्तराखंड की होली: यहाँ कुमाऊँनी क्षेत्र में बैठकी होली (शास्त्रीय संगीत पर आधारित) और खड़ी होली (सामूहिक नृत्य और गायन) की अनूठी परंपरा है।

  • हरियाणा: यहाँ ‘धुलंडी‘ के दिन भाभी द्वारा देवर को मजाक में सताने की प्रथा है।

  • पश्चिम बंगाल: यहाँ इसे ‘दोल जात्रा’ के रूप में मनाया जाता है।

  • पंजाब: सिख समुदाय इसे शक्ति प्रदर्शन के पर्व ‘होला मोहल्ला’ के रूप में मनाता है।

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होली के प्रमुख पकवान और संगीत

होली का त्योहार पकवानों के बिना अधूरा है। गुजिया इस पर्व का सबसे मुख्य व्यंजन है। इसके अलावा उत्तर भारत में कांजी के बड़े, दही-भल्ले, नमकीन और ठंडाई का विशेष प्रचलन है। संगीत की दृष्टि से होली अत्यंत समृद्ध है। शास्त्रीय संगीत में धमार और लोक संगीत में फाग, चैती व ठुमरी के जरिए इस उत्सव के रंगों को बिखेरा जाता है। आज के समय में रासायनिक रंगों के दुष्प्रभाव को देखते हुए लोग पुनः प्राकृतिक रंगों (टेसू के फूल, हल्दी, चंदन और गुलाबजल) की ओर लौट रहे हैं। विदेशों में भी इसे ‘फेस्टिवल ऑफ कलर्स’ के रूप में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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