/ Jan 28, 2026
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LARGEST KHADI TRICOLOR: गुजरात के सीमावर्ती भुज जिले में स्थित ‘ग्रेट रन ऑफ कच्छ’ के धोरडो में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। इस विशेष अवसर पर खादी से निर्मित दुनिया के सबसे विशाल स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज को पूरे सम्मान और गौरव के साथ प्रदर्शित किया गया। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), भारत सरकार द्वारा आयोजित यह भव्य कार्यक्रम राष्ट्रभक्ति, स्वदेशी भावना और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनकर उभरा।

इस आयोजन में भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने सक्रिय भूमिका निभाई। सेना और बीएसएफ के जवानों द्वारा विश्व के इस सबसे विशाल खादी राष्ट्रीय ध्वज को पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ स्थापित किया गया और गणतंत्र दिवस की औपचारिक सलामी दी गई । कार्यक्रम के दौरान देशभर के लाखों खादी कारीगरों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समारोह में केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने भारतीय सेना के वीर शहीद सार्जेंट मलीधर की पत्नी राजकुमारी को मंच पर सम्मानित किया और उनके त्याग व राष्ट्रसेवा को नमन किया।

गणतंत्र दिवस के इस अवसर पर ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत गुजरात के स्थानीय कारीगरों को आधुनिक उपकरण और टूलकिट का वितरण भी किया गया । यह आयोजन सामरिक और ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि 26 जनवरी 2026 को वर्ष 2001 में आए विनाशकारी भुज भूकंप के 25 वर्ष पूर्ण हुए थे । इस पृष्ठभूमि में कार्यक्रम के दौरान भूकंप प्रभावित नागरिकों का स्मरण किया गया और कच्छ की अदम्य जिजीविषा, पुनर्निर्माण क्षमता और उसकी ऐतिहासिक विकास यात्रा को रेखांकित किया गया।

केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि कच्छ के रन में दुनिया के सबसे विशाल खादी तिरंगे का प्रदर्शन राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने इस कार्यक्रम को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वीर जवानों को समर्पित किया । उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में खादी आंदोलन को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है अध्यक्ष ने याद दिलाया कि वर्ष 2001 की त्रासदी के बाद भुज ने साहस और संकल्प की जो मिसाल पेश की, वह तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री मोदी के अथक परिश्रम और विकासपरक सोच का ही परिणाम है।

खादी उद्योग की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए मनोज कुमार ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में केवीआईसी ने उत्पादन, डिजाइन और तकनीक के क्षेत्र में व्यापक सुधार किए हैं। वर्तमान में खादी ग्रामोद्योग का कारोबार 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है और इससे 2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण कारीगरों की आय में हुई वृद्धि है। खादी कारीगरों का पारिश्रमिक 4 रुपये प्रति हैंक से बढ़कर अब 15 रुपये प्रति हैंक तक पहुंच गया है, जो उनके जीवन स्तर में आए सकारात्मक परिवर्तन और सम्मान को दर्शाता है।

यह ध्वज 225 फीट लंबा और 150 फीट चौड़ा है, जिसका कुल वजन लगभग 1400 किलोग्राम है। 33,750 वर्ग फुट के क्षेत्रफल को कवर करने वाले इस ध्वज को बनाने में हाथ से काते और हाथ से बुने हुए 4500 मीटर खादी कॉटन पट्ट का उपयोग किया गया है । इस विशाल ध्वज में बने अशोक चक्र का व्यास 30 फीट है। इसे तैयार करने के लिए 70 खादी कारीगरों ने 49 दिनों तक कड़ी मेहनत की और लगभग 3500 घंटे का अतिरिक्त कार्य किया। कच्छ के इस विशिष्ट स्थल पर विशाल तिरंगे का यह प्रदर्शन खादी के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य को एक साथ प्रदर्शित करता है।

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