BAL VIVAH MUKTI RATH: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास से एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल की शुरुआत की। उन्होंने समर्पण सोसाइटी फॉर हेल्थ रिसर्च एंड डेवलपमेंट द्वारा संचालित ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। देहरादून में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से मुख्यमंत्री ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई का शंखनाद किया है। इस रथ का मुख्य उद्देश्य जन-जन को जागरूक करना और समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचाना है कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।
BAL VIVAH MUKTI RATH जन-जागरूकता अभियान का प्रतीक है
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह रथ महज एक वाहन नहीं, बल्कि एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान का प्रतीक है। इसका लक्ष्य राज्य के दूरस्थ, ग्रामीण और उन उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों तक पहुंच बनाना है जहां बाल विवाह की घटनाएं या संभावनाएं अधिक हो सकती हैं। सरकार और संस्था का प्रयास है कि एक समयबद्ध और सघन अभियान के जरिए लोगों की मानसिकता में बदलाव लाया जाए। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि एक विकसित और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए इस कुप्रथा का समूल नाश अत्यंत आवश्यक है

8 मार्च 2026 तक संचालित किया जाएगा
यह जागरूकता अभियान आज यानी 24 जनवरी 2026 से शुरू होकर 8 मार्च 2026 तक संचालित किया जाएगा। करीब डेढ़ महीने तक चलने वाले इस अभियान के तहत यह रथ विभिन्न गांवों, शहरी बस्तियों, स्कूलों, पंचायतों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्थलों पर जाएगा। वहां नुक्कड़ नाटकों, संवाद सत्रों और परामर्श शिविरों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा, शपथ ग्रहण कार्यक्रम और आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) सामग्री का वितरण भी किया जाएगा ताकि संदेश प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंच सके।

फ्लैग ऑफ कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना और समर्पण सोसाइटी के अध्यक्ष विपिन पंवार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र और सामाजिक संस्थाओं का यह साझा प्रयास निश्चित रूप से रंग लाएगा। जनसंवाद जैसी गतिविधियों के जरिए सीधे आम जनता से जुड़कर उनकी भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे प्रदेश में बाल अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।(BAL VIVAH MUKTI RATH)

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