SAFE INTERNET IN INDIA: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में इंटरनेट सुरक्षा और सोशल मीडिया के नियमों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सरकार की नीतियां इंटरनेट को अपने उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों के लिए खुला, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाने पर केंद्रित हैं। इंटरनेट के विस्तार और उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या के साथ, अनुचित सामग्री के संपर्क में आने का जोखिम और इन गतिविधियों के हानिकारक प्रभाव भी बढ़ गए हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ाने के लिए कई उपाय अपनाए हैं।

SAFE INTERNET IN INDIA: सोशल मीडिया पर गैरकानूनी सामग्री रोकने के लिए कानूनी ढांचा
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एक्ट, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 ने मिलकर डिजिटल स्पेस में गैरकानूनी और हानिकारक सामग्री से निपटने के लिए एक कठोर ढांचा तैयार किया है। इसमें धारा 66सी के तहत पहचान की चोरी, धारा 66डी के तहत प्रतिरूपण, धारा 66ई के तहत गोपनीयता का उल्लंघन और धारा 67, 67ए, 67बी के तहत अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करना शामिल है। यह एक्ट पुलिस को अपराधों की जांच करने (धारा 78) और सार्वजनिक स्थान में प्रवेश करने, तलाशी लेने और संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार करने (धारा 80) का अधिकार भी देता है।

SAFE INTERNET IN INDIA: आईटी नियम 2021 के तहत कड़े प्रावधान और जवाबदेही
आईटी नियम 2021 के नियम 3(1)(बी) के अनुसार ऑनलाइन ऐसी कोई भी सामग्री नहीं डाली जा सकती जो अश्लील हो, किसी की निजता तोड़ती हो, लिंग के आधार पर किसी का अपमान करती हो, नफरत या हिंसा फैलाती हो, बच्चों के लिए हानिकारक हो, डीपफेक या एआई के जरिए किसी को धोखा देती हो, किसी की पहचान बनकर पेश आती हो, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालती हो या किसी कानून का उल्लंघन करती हो। प्लेटफॉर्म्स को अपने उपयोगकर्ताओं को साफ-साफ बताना होता है कि अगर वे ऐसी गैरकानूनी सामग्री साझा करते हैं तो उनकी पोस्ट हटाई जा सकती है या उनका खाता बंद किया जा सकता है।

SAFE INTERNET IN INDIA: सोशल मीडिया कंपनियों और शिकायत निवारण की जिम्मेदारी
नियमों के अनुसार ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों को अदालत या सरकार के निर्देश मिलते ही गैरकानूनी सामग्री तुरंत हटानी होती है। उन्हें शिकायत अधिकारी नियुक्त करने होते हैं, जो 72 घंटे के भीतर शिकायतों का समाधान करें। यदि शिकायत किसी की निजता के उल्लंघन, प्रतिरूपण या नग्नता से जुड़ी हो, तो सामग्री 24 घंटे के भीतर हटाना जरूरी है। अगर उपयोगकर्ता की शिकायत प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी द्वारा नहीं सुनी जाती, तो वह ऑनलाइन अपील कर सकता है। इसके साथ ही, प्लेटफॉर्मों को पहचान सत्यापन या अपराधों की जांच के लिए अधिकृत सरकारी एजेंसियों को जरूरी जानकारी और सहायता भी देनी होती है।

बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए अतिरिक्त नियम
डेटा सुरक्षा और बच्चों के लिए नए कानून
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) एक्ट 2023 उपयोगकर्ताओं के डिजिटल डेटा की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा बनाता है। इस कानून के तहत कोई भी कंपनी बच्चों का व्यक्तिगत डेटा तभी इस्तेमाल कर सकती है जब उनके माता-पिता की सत्यापित सहमति हो। बच्चों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली डेटा प्रोसेसिंग, ट्रैकिंग या व्यवहारिक निगरानी की अनुमति नहीं है। इसके साथ ही, BNS 2023 की धारा 296 अश्लील कृत्यों और गानों पर सजा का प्रावधान करती है, जबकि धारा 294 अश्लील सामग्री बेचने पर दंड देती है। धारा 353 उन लोगों को सजा देती है जो गलत या भ्रामक बयान देकर लोगों में डर या गड़बड़ी फैलाते हैं।

पॉक्सो एक्ट और जागरूकता अभियान
पॉक्सो एक्ट 2012 की धारा 13 में किसी भी मीडिया के माध्यम से बच्चे का यौन उद्देश्य से उपयोग करना अपराध माना गया है। धारा 14 और 15 बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री रखने, स्टोर करने या उससे जुड़े किसी भी काम में शामिल होने पर कठोर सजा और जुर्माना तय करती हैं। बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए एनसीपीसीआर और एनसीईआरटी ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कई दिशानिर्देश और हैंडबुक जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों, अभिभावकों और स्कूलों में जागरूकता बढ़ाना है।
भारत का साइबर सुरक्षा ढांचा भी कई स्तरों पर काम करता है। इसमें आई4सी, सहयोग पोर्टल, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (हेल्पलाइन 1930) और सीईआरटी-इन जैसी संस्थाएं शामिल हैं, जो साइबर अपराधों और शिकायतों को संभालने के लिए लगातार सक्रिय रहती हैं। इसके साथ ही सरकार हर साल अक्टूबर में साइबर सुरक्षा जागरूकता माह और फरवरी में सुरक्षित इंटरनेट दिवस जैसे कार्यक्रम आयोजित करके जनता में जागरूकता बढ़ाती है।

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