UTTARAKHAND WEATHER UPDATE: उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) देहरादून ने राज्य के लिए सात दिनों का पूर्वानुमान जारी करते हुए आने वाले दिनों में कड़ाके की ठंड और मौसम में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। फिलहाल प्रदेश में जारी शुष्क दौर के बीच मौसम विभाग ने 4 दिसंबर से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश की संभावना जताई है, जिसका सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर भी पड़ेगा।मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, दिसंबर महीने की शुरुआत शुष्क मौसम के साथ हुई है। 1 से 3 दिसंबर तक पूरे उत्तराखंड में मौसम पूरी तरह साफ रहने के आसार हैं।

हालांकि, दिन में खिल रही चटख धूप के बावजूद रातें तेजी से सर्द हो रही हैं। IMD ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर राज्य के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। तापमान में इस गिरावट के कारण पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक सुबह और शाम के समय ठिठुरन काफी बढ़ जाएगी। पर्वतीय इलाकों में बढ़ती ठंड के चलते लोग अभी से अलाव का सहारा लेने लगे हैं।

UTTARAKHAND WEATHER UPDATE:4 दिसंबर से बदल सकता है मौसम का मिजाज
मौसम में असली बदलाव 4 दिसंबर से देखने को मिलेगा। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते प्रदेश के पर्वतीय जिलों में मौसम का मिजाज बिगड़ेगा। विशेष रूप से उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की से बहुत हल्की बारिश और बर्फबारी होने की प्रबल संभावना है। यह सिलसिला 5 दिसंबर को भी जारी रह सकता है, जब रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जैसे अन्य ऊंचाई वाले जिलों में भी बर्फबारी का दौर देखने को मिल सकता है। हालांकि, इस दौरान निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के मुख्यतः शुष्क रहने की ही उम्मीद है।

सप्ताह के अंत में भी मौसम के तेवर ढीले पड़ते नहीं दिख रहे हैं। 6 और 7 दिसंबर को भी उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले हिस्सों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी रहेगी। बर्फबारी के अलर्ट के साथ ही मौसम विभाग ने पर्वतीय घाटियों में कोहरे की चेतावनी भी जारी की है। सप्ताह के दौरान इन घाटी क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्का से मध्यम घना कोहरा छा सकता है, जिससे सुबह के वक्त विजिबिलिटी कम हो सकती है। ऐसे में स्थानीय निवासियों और चारधाम यात्रा मार्गों पर चलने वाले यात्रियों को वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।


