UTTARAKHAND STF: उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर क्राइम पुलिस टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी ट्रस्ट और कंपनियां बनाकर साइबर अपराध करने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज़ और उपकरण बरामद किए गए हैं। इस मामले का खुलासा एक वरिष्ठ नागरिक के साथ हुई साइबर ठगी की जांच के बाद हुआ। देहरादून निवासी एक वरिष्ठ नागरिक ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि फेसबुक लिंक के माध्यम से उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया।

UTTARAKHAND STF की बड़ी कार्यवाई
इस ग्रुप का नाम “11-Start up Multiple Growth VIP Group” था और यह Abhinandan Stock Broking Pvt. Ltd./ASB Invest & Grow से जुड़ा बताया गया। वहां उन्हें शेयर ट्रेडिंग और IPO/FPO में मोटा लाभ देने का लालच दिया गया। पीड़ित से एक फर्जी ASBPL मोबाइल एप डाउनलोड कराया गया और 10 जून से 5 अगस्त 2025 के बीच विभिन्न खातों में कुल 44.50 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। इस शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज किया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, चैट्स और अन्य तकनीकी जानकारी जुटाकर आरोपी को चिन्हित किया। गहन प्रयासों के बाद मुख्य आरोपी अजय कुमार त्रिपाठी को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से पांच चेकबुक, तीन फर्जी पैन कार्ड, दो आधार कार्ड, डेबिट कार्ड, तीन ट्रस्ट की फ्लैक्स, एक मोबाइल फोन, दो अतिरिक्त सिम कार्ड और तीन ट्रस्ट डीड बरामद की गईं। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी Shree Shiv Shyam Sewa Trust नाम से बैंक खाता संचालित कर रहा था और इसका उपयोग विभिन्न साइबर अपराधों में किया जाता था।

आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने फर्जी दस्तावेज़ और ट्रस्ट बनाकर बैंक खाते खोले और निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी की। आरोपी के तार कम्बोडिया और थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय गिरोह से भी जुड़े पाए गए। पुलिस के अनुसार आरोपी पहले से ही हैदराबाद और उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में दर्ज साइबर ठगी के मामलों में वांछित था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह फर्जी पहचान पत्र बनाता और अपने पते बदलता रहता था।

एसटीएफ ने जनता से अपील की है कि ऑनलाइन जॉब या इन्वेस्टमेंट के नाम पर आने वाले किसी भी संदिग्ध लिंक, वेबसाइट या मोबाइल एप से बचें। गूगल से किसी भी कस्टमर केयर नंबर की खोज न करें और किसी भी ऑफर पर बिना जांचे-परखे भरोसा न करें। किसी भी साइबर अपराध की घटना पर तुरंत 1930 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। यह मामला इस बात का सबूत है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं और अधिक लाभ के लालच में लोग उनका आसान शिकार बन जाते हैं। सतर्क रहना ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।

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