KEDARNATH YATRA शुरू होने से पहले उत्तराखंड सरकार ने घोड़े-खच्चरों में फैल रहे एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। इस बीमारी की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पशुपालन मंत्री सौरव बहुगुणा के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने यात्रा मार्ग पर कड़े कदम उठाए हैं। सचिव पशुपालन डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सचिवालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि 4 अप्रैल से यात्रा शुरू होने तक पूरे उत्तराखंड में 16 हजार घोड़े-खच्चरों की जांच की गई है।

KEDARNATH YATRA पर और सख्त होगी मॉनिटरिंग
रुद्रप्रयाग जिले के दो गांवों में 26 मार्च को लिए गए सैंपलों में वायरस की पुष्टि हुई थी। इसके बाद 16 हजार घोड़े-खच्चरों की सैंपलिंग की गई, जिनमें से 152 सैंपल पहले पॉजिटिव पाए गए। लेकिन दोबारा RT-PCR जांच में सभी सैंपल निगेटिव पाए गए। यात्रा में केवल उन्हीं जानवरों को अनुमति दी गई है जिनकी रिपोर्ट निगेटिव है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि अस्वस्थ या संक्रमित जानवरों को यात्रा मार्ग पर जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

घोड़े-खच्चरों की मौत का कारण
यात्रा शुरू होने के शुरुआती दो दिन में 13 घोड़े-खच्चरों की मौत की खबर मिली है। इनमें 8 की मौत डायरिया और 5 की मौत एक्यूट कोलिक बीमारी से हुई है। इन मामलों की विस्तृत जांच के लिए सैंपल बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) भेजे गए हैं। संक्रमण की रोकथाम और घोड़े-खच्चरों की निगरानी के लिए सरकार ने यात्रा मार्ग में 22 से ज्यादा डॉक्टरों की टीम तैनात की है। इसके अलावा एक मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, दो उप मुख्य अधिकारी, 22 पशु चिकित्सक, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के दो वैज्ञानिक और पंतनगर विश्वविद्यालय के दो विशेषज्ञ डॉक्टर भी मौके पर मौजूद हैं।

घोड़े-खच्चरों पर लगी रोक को लेकर केदारनाथ घाटी के स्थानीय लोग, खच्चर व्यवसायी और अन्य संगठनों ने संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए इस रोक को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है। पशुपालन सचिव ने कहा कि इस पर फैसला जिला प्रशासन स्थानीय स्थिति को देखकर लेगा। सचिव पशुपालन ने बताया कि हर साल यात्रा में उत्तर प्रदेश से 2 से 3 हजार घोड़े-खच्चर आते हैं। लेकिन इस बार संक्रमण के खतरे को देखते हुए फिलहाल इन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। उन्होंने बताया कि एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस इंसानों में नहीं फैलता, लेकिन घोड़े-खच्चरों में यह तेजी से फैलता है।

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की बीमारी से हड़कंप, 24 घंटे की रोक
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