META: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने सोमवार को इंटरनेट मीडिया कंपनी मेटा पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है और आदेश दिया है कि कंपनी अपनी स्वामित्व वाली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वाट्सएप (WhatsApp) को मेटा की अन्य कंपनियों के साथ विज्ञापन उद्देश्यों के लिए यूजर्स का डाटा पांच साल तक साझा नहीं करने देगी। यह आदेश सीसीआइ की तरफ से मेटा की प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई का हिस्सा है। जुर्माने के साथ-साथ यह प्रतिबंध मेटा के अन्य कारोबारों और विशेष रूप से वाट्सएप की गोपनीयता नीति के संबंध में किया गया है।

वाट्सएप की गोपनीयता नीति पर सवाल
इस मामले की जड़ जनवरी 2021 में है, जब वाट्सएप ने अपनी गोपनीयता नीति को अपडेट किया था। वाट्सएप ने यूजर्स को सूचित किया कि वह अधिक डेटा इकट्ठा करेगा और उसे अपनी पैरेंट कंपनी मेटा और मेटा की अन्य कंपनियों के साथ साझा करेगा। यूजर्स को इस अपडेट को स्वीकार करना अनिवार्य कर दिया गया, जबकि यूरोपीय संघ (EU) में कुछ खास परिस्थितियों में यूजर्स को इसे न स्वीकारने का विकल्प मिला था। लेकिन भारत में यूजर्स को मजबूर किया गया था कि वे इस नई नीति को मानें। सीसीआइ ने इसे प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधि माना और मेटा के खिलाफ कार्रवाई की।

सीसीआइ का आदेश और META पर जुर्माना
सीसीआइ ने मेटा को अपनी प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, मेटा पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना इस बात से जुड़ा है कि वाट्सएप ने अपनी गोपनीयता नीति को कैसे लागू किया और यूजर्स के डेटा को मेटा की अन्य कंपनियों के साथ कैसे साझा किया। सीसीआइ का कहना है कि यह जुर्माना मेटा द्वारा यूजर्स की जानकारी का गलत तरीके से उपयोग करने के कारण लगाया गया है, जो भारतीय प्रतिस्पर्धा कानून के खिलाफ है।

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