Pitru Paksha : हिंदू धर्म में हर साल भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितृ लोक के पूर्वज धरती पर आते हैं। इस दौरान श्राद्ध करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और अपने परिवार के सदस्यों को आशीर्वाद देते हैं। पितृ पक्ष (Pitru Paksha) के दूसरे दिन श्राद्ध करने के लिए शुभ समय निर्धारित किया जाता है, इस दौरान श्राद्ध करके पितरों को प्रसन्न किया जा सकता है।
हिंदू धर्म में हर साल भाद्रपद पूर्णिमा से पितृ पक्ष (Pitru Paksha) की शुरुआत होती है। पितृ पक्ष के दूसरे दिन, यानी गुरुवार 19 सितंबर को श्राद्ध कर्म किया जाएगा। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज पितृ लोक से धरती पर आते हैं, और श्राद्ध करने से वे प्रसन्न होकर परिवार को आशीर्वाद देते हैं।
आज पितृ पक्ष के दूसरे दिन श्राद्ध करने के लिए शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया है, जिसमें श्राद्ध कर्म करके पितरों को प्रसन्न किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की द्वितीया तिथि को हुई थी।
पंचांग के अनुसार, इस दिन शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष दोनों की द्वितीया तिथि पर श्राद्ध किया जा सकता है। यदि किसी के पिता की तिथि ज्ञात न हो, तो पितृ विसर्जन के दिन श्राद्ध करना उचित माना जाता है। द्वितीया श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न मुहूर्त को शुभ माना जाता है।

Pitru Paksha : पितृ विसर्जन के लिए, इन विधियों का पालन किया जा सकता है:
- सुबह स्नान करके पितरों को जल से तर्पण दें.इसके लिए कुशा की जूड़ी लेकर जल से भरे लोटे में डालें और पितरों का नाम लेते हुए जल चढ़ाएं.
- त्रिपिंडी श्राद्ध करें. इसमें पिता को वसु, दादा को रुद्र और परदादा को आदित्य देव के रूप में पूजा करें.
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं.भोजन में खीर, पूड़ी, और कद्दू की सब्ज़ी अवश्य बनाएं.
- पीपल की पूजा करें. मान्यता है कि इस पर पितरों का वास होता है.
- शाम के समय चार मिट्टी के दीपकों में सरसों का तेल और रुई की बत्ती डालकर जलाएं.इन्हें घर की चौखट पर रख दें.
- एक दीपक लें, उसे सरसों का तेल और रुई की बत्ती डालकर जलाएं.
- एक लोटे में जल लें और मंदिर जाएं.मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने पीपल के पेड़ के नीचे दीपक रखकर और पानी चढ़ाएं.
- पितृ लोक गमन मार्ग को आलोकित करने के लिए सायं काल घी का दीपक जलाएं.
पितृ पक्ष (Pitru Paksha) के इन दिनों में पितरों को भोजन, फल, मिठाई आदि का दान करना पसंद होता है। उनका आशीर्वाद प्राप्त करने से पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है। ऐसा माना जाता है कि श्राद्ध तीन पीढ़ियों तक किया जा सकता है और इसका अधिकार पुत्र, पौत्र, भतीजी और भतीजे को होता है। इस बार किसी तिथि का क्षय नहीं है। अत: पूरे सोलह दिन तर्पण किया जा सकता है। इन दिनों पितृ अपने रिश्तेदारों के घर आते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं।

Pitru Paksha : पितृ पक्ष में ध्यान रखने खास वाली बातें:
पितृ पक्ष (Pitru Paksha) में पूर्वजों के नाम से श्राद्ध किया जाता है। जो भी व्यक्ति पितृपक्ष का पालन करता है या श्राद्ध करता है, उसे सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। इस दौरान प्याज, लहसुन, मांस, और मदिरा से दूर रहना चाहिए। दूध का उपयोग भी कम से कम करना चाहिए।
श्राद्ध में हल्की सुगंध वाले फूलों का ही प्रयोग करें और अधिक सुगंधित फूलों से बचें। पितरों के तर्पण के समय दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके जल अर्पित करें। साथ ही, गीता का रोजाना पाठ करना पितृ पक्ष के दौरान शुभ माना जाता है। श्राद्ध के लिए किसी से कर्ज लेना उचित नहीं है, अपनी क्षमता के अनुसार ही करें।
Pitru Paksha : श्राद्ध के नियम:
- घर के सबसे वरिष्ठ पुरुष द्वारा ही पितरों को तर्पण यानी जल चढ़ाना चाहिए। अगर वरिष्ठ न हो, तो पौत्र या नाती भी तर्पण कर सकते हैं।
- श्राद्ध कर्म का समय दोपहर में सबसे उत्तम माना जाता है। सुबह और शाम दोनों समय स्नान करके पितरों को याद करना चाहिए।
- पितरों के तर्पण के लिए सूर्योदय से पहले जूड़ी तैयार करें और पीपल के पेड़ के नीचे जल अर्पित करें। लोटे में गंगाजल, सादा जल, दूध, जौ, बूरा, और काले तिल मिलाएं। फिर 108 बार जल चढ़ाकर मंत्रों का जाप करें। आप “ओम पितृ देवतायै नमः” या “ओम पितृ गणाय विद्महे जगत धारिणे धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात्” मंत्र का जाप कर सकते हैं।
- ब्राह्मण को भोजन कराते समय ध्यान रखें कि भोजन के बर्तन दोनों हाथों से लाएं। ब्राह्मण को भोजन मौन रहकर करना चाहिए, क्योंकि जब तक ब्राह्मण मौन रहता है, तब तक पितर भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन परोसते समय भी मौन रहना चाहिए।

- पितरों का श्राद्ध सिर्फ अपने घर में ही करें, दूसरों की जमीन पर श्राद्ध न करें।
- ब्राह्मण को भोजन कराने के अलावा गाय, कौए, कुत्ते, और चीटियों के लिए भी भोजन निकालें और उन्हें खिलाएं।
इन नियमों का पालन करने से पितृ (Pitru Paksha) प्रसन्न होते हैं और परिवार को आशीर्वाद देते हैं।
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