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SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम गायब होने पर EC की बड़ी राहत, Form 6 से दोबारा जुड़ सकेंगे मतदाता; नहीं होगी कानूनी कार्रवाई

चुनाव आयोग ने दूर किया मतदाताओं का डर, नए सिरे से नाम जुड़वाने का दिया विकल्प

देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि SIR के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जिन मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हैं, वे दोबारा अपना नाम जुड़वाने के लिए Form 6 भर सकते हैं। खास बात यह है कि यदि कोई व्यक्ति पहले भी मतदाता सूची में दर्ज था और अब उसका नाम ड्राफ्ट सूची से गायब है, तो केवल इस आधार पर उसके खिलाफ मुकदमा या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी कि उसने दोबारा Form 6 जमा किया है।

चुनाव आयोग के इस फैसले को उन लाखों मतदाताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो अपने नाम मतदाता सूची से गायब होने के कारण परेशान थे और दोबारा आवेदन करने में कानूनी कार्रवाई का डर महसूस कर रहे थे।

Form 6 को लेकर क्यों पैदा हुआ था भ्रम?SIR

दरअसल, Form 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नया नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। इस फॉर्म में आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि वह पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर रहा है।

ऐसे में जिन लोगों का नाम पहले से वोटर लिस्ट में मौजूद था, लेकिन SIR के दौरान जारी ड्राफ्ट सूची से हट गया, उनके सामने एक बड़ी परेशानी खड़ी हो गई थी।

उन्हें आशंका थी कि यदि वे पहले मतदाता होने के बावजूद Form 6 भरते हैं, तो पहली बार नाम जुड़वाने से संबंधित घोषणा को गलत मानकर उनके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

इसी आशंका को दूर करने के लिए चुनाव आयोग ने मंगलवार, 3 नवंबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को स्पष्टीकरण जारी किया।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के दौरान जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं मिलते हैं, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत नए सिरे से नामांकन कराना होगा। यह नियम उन लोगों पर भी लागू होगा, जिनका नाम पहले किसी मतदाता सूची में दर्ज था।

आयोग के अनुसार, केवल इस वजह से Form 6 जमा करना गलत नहीं माना जा सकता कि संबंधित व्यक्ति पहले भी मतदाता सूची में शामिल था।

EC ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) को निर्देश दिया है कि केवल पुराने मतदाता होने और SIR के दौरान Form 6 जमा करने के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ धारा 31 के तहत कार्रवाई शुरू न की जाए।

हालांकि, इस राहत के साथ कुछ शर्तें भी हैं। आवेदक का नाम किसी दूसरी संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज नहीं होना चाहिए और आवेदन में दी गई घोषणा कानून के अनुरूप होनी चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में दिल्ली हाईकोर्ट के निलोत्पल दत्ता एवं अन्य से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया।

इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई थी कि पहले से मतदाता होने के बावजूद Form 6 जमा करने पर उन्हें गलत घोषणा करने का दोषी माना जा सकता है।

हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी इस आशंका को निराधार बताया था और कहा था कि वे चाहें तो Form 6 जमा कर सकते हैं। उनके आवेदन पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।

इसी न्यायिक फैसले का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने दोहराया कि पुराने मतदाता होने के कारण किसी व्यक्ति को दोबारा Form 6 जमा करने से नहीं रोका जा सकता, यदि उसका नाम SIR की ड्राफ्ट सूची में मौजूद नहीं है।

सभी राज्यों को प्रचार-प्रसार करने का निर्देश

चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से कहा है कि इस स्पष्टीकरण की जानकारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचाई जाए।

इसके साथ ही आयोग ने निर्देश दिया है कि इस जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि मतदाताओं के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

आयोग चाहता है कि स्थानीय भाषाओं और विभिन्न मीडिया माध्यमों के जरिए लोगों को बताया जाए कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने पर वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form 6 के माध्यम से दोबारा आवेदन कर सकते हैं।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग के फैसले पर उठाए सवाल

चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस ने इस कदम की आलोचना की है। पार्टी ने इसे SIR प्रक्रिया की खामियों को छिपाने की कोशिश बताया है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि Form 6 में स्पष्ट रूप से पूछा जाता है कि क्या आवेदक पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर रहा है।

उनका आरोप है कि आयोग अब दोबारा नाम जुड़वाने वाले मतदाताओं को भी पहली बार आवेदन करने वाला मानने की बात कह रहा है, जो भ्रम पैदा करने वाला कदम है।

कांग्रेस का कहना है कि SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे कई योग्य मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं।

वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि उसका उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाना है तथा किसी भी पात्र मतदाता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने का अवसर दिया जा रहा है।

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निष्कर्ष:

मतदाताओं के लिए राहत, लेकिन नाम जांचना जरूरी

चुनाव आयोग के इस स्पष्टीकरण से उन लोगों को राहत मिली है, जिनका नाम SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं है। अब वे पुराने मतदाता होने के बावजूद Form 6 के जरिए दोबारा नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

हालांकि, मतदाताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका नाम किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र की सूची में पहले से दर्ज न हो और आवेदन में सभी जानकारियां सही दी गई हों।

लोकतंत्र में मतदान का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए मतदाता सूची में नाम की जांच करना और समय रहते आवश्यक प्रक्रिया पूरी करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। चुनाव आयोग का यह स्पष्टीकरण निश्चित रूप से उन लोगों के लिए राहत भरा कदम है, जो अपना नाम वोटर लिस्ट में दोबारा शामिल कराने को लेकर कानूनी परेशानी की आशंका से चिंतित थे।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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