भारतीय नौसेना ने एक बार फिर अपनी बहादुरी, सैन्य क्षमता और समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का शानदार प्रदर्शन किया है। अरब सागर में समुद्री लुटेरों के कब्जे में पहुंचे मछली पकड़ने वाले जहाज ‘अजिनी’ (Azini) को भारतीय नौसेना ने 48 घंटे तक चले विशेष अभियान के बाद सफलतापूर्वक मुक्त करा लिया। इस कार्रवाई में जहाज पर सवार सभी 20 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया गया। इस अभियान को 2 नवंबर 2026 को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
यह ऑपरेशन मुंबई से लगभग 3,000 किलोमीटर दूर अरब सागर में चलाया गया। इस चुनौतीपूर्ण मिशन में भारतीय नौसेना के साथ भारतीय वायुसेना ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल अभियान के लिए भारतीय नौसेना के जवानों को बधाई दी और उनकी तत्परता की सराहना की।
29 अक्टूबर को सोमालियाई समुद्री लुटेरों ने किया था जहाज पर कब्जा
उत्तर-पूर्वी सोमालिया के तट पर हुई थी घटना
जानकारी के मुताबिक, ईरान का मछली पकड़ने वाला जहाज ‘अजिनी’ 29 अक्टूबर को सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास समुद्री लुटेरों के कब्जे में चला गया था। यह घटना सोमालिया के बंदर बायला और हाफुन नामक तटीय क्षेत्रों के बीच हुई थी।
जहाज पर भारी हथियारों से लैस समुद्री लुटेरों ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद जहाज पर मौजूद 20 क्रू मेंबर्स की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई थी।
भारतीय नौसेना के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी लोगों को सुरक्षित बचाने के साथ-साथ जहाज को भी समुद्री लुटेरों के नियंत्रण से मुक्त कराना था।
भारतीय नौसेना ने कैसे चलाया 48 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन?
लगातार निगरानी और सटीक लोकेशन का पता लगाया
घटना की जानकारी मिलने के बाद भारतीय नौसेना ने तुरंत एक मिशन-तैनात युद्धपोत को कार्रवाई के लिए भेजा। इसके साथ ही समुद्री निगरानी विमान की मदद से जहाज की तलाश शुरू की गई।
नौसेना के अधिकारियों ने लगातार निगरानी करते हुए जहाज की लोकेशन और उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से समुद्री लुटेरों की गतिविधियों को सीमित करने के लिए गैर-घातक रणनीतिक उपाय अपनाए गए, ताकि जहाज को भागने से रोका जा सके।
इस पूरी कार्रवाई में नौसेना के युद्धपोत, निगरानी विमान और विशेष कमांडो दस्ते के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला।
भारतीय वायुसेना के C-17 विमान से उतारे गए मरीन कमांडो
इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना की भूमिका भी बेहद अहम रही। वायुसेना के C-17 विमान की मदद से मरीन कमांडो को अभियान क्षेत्र में पहुंचाया गया।
विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो ने रणनीतिक तरीके से जहाज पर कार्रवाई की और समुद्री लुटेरों के खतरे को समाप्त किया। इसके बाद जहाज को सुरक्षित नियंत्रण में लेकर सभी 20 क्रू मेंबर्स को मुक्त करा लिया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान में 12 हथियारबंद समुद्री लुटेरों को भी काबू किया गया। इस तरह भारतीय नौसेना ने बिना किसी बड़े नुकसान के एक जटिल समुद्री सुरक्षा अभियान को सफल बनाया।
जहाज को मदर शिप बनाने की थी आशंका
समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा बन सकते थे लुटेरे
भारतीय नौसेना के मुताबिक, इस घटना को केवल एक जहाज के अपहरण के रूप में नहीं देखा जा रहा था। आशंका थी कि समुद्री लुटेरे मछली पकड़ने वाले जहाज ‘अजिनी’ का इस्तेमाल मदर शिप के रूप में कर सकते थे।
मदर शिप का इस्तेमाल समुद्री लुटेरे दूसरे व्यापारिक जहाजों पर हमले करने के लिए करते हैं। इसके जरिए वे समुद्र में दूर तक जाकर मालवाहक जहाजों को निशाना बना सकते हैं।
ऐसी स्थिति में अरब सागर और आसपास के अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ सकता था। इसलिए भारतीय नौसेना ने समय रहते कार्रवाई करते हुए इस संभावित खतरे को टाल दिया।
राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना की जमकर की तारीफ
बोले- भारत समुद्री सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए भारतीय नौसेना को इस सफल अभियान की बधाई दी।
उन्होंने कहा कि 3,000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर 48 घंटे तक चले इस सुनियोजित ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने शानदार समन्वय और उच्च परिचालन क्षमता का परिचय दिया है।
उन्होंने भारतीय वायुसेना के समय पर मिले सहयोग की भी सराहना की। रक्षा मंत्री के मुताबिक, इस अभियान ने साबित कर दिया कि भारत समुद्री खतरों का निर्णायक रूप से सामना करने और जरूरत पड़ने पर दूर-दराज के समुद्री क्षेत्रों में भी कार्रवाई करने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हिंद महासागर में भारत की बढ़ती समुद्री ताकत
2008 से जारी है समुद्री लुटेरों के खिलाफ अभियान
भारतीय नौसेना लंबे समय से अरब सागर, अदन की खाड़ी और पूर्वी अफ्रीका के तटीय क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा के लिए सक्रिय है। 23 अक्टूबर 2008 से अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों के खिलाफ नियमित गश्त की जा रही है।
इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा करना, जहाजों के कर्मचारियों में विश्वास बनाए रखना और समुद्री लुटेरों की गतिविधियों पर रोक लगाना है।
‘अजिनी’ रेस्क्यू ऑपरेशन इसी व्यापक समुद्री सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
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निष्कर्ष:
भारत ने फिर दिखाया अपनी सैन्य क्षमता का दम
भारतीय नौसेना का 48 घंटे तक चला यह अभियान केवल 20 लोगों की जान बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री सुरक्षा नीति और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी को भी दर्शाता है।
नौसेना और वायुसेना के संयुक्त प्रयासों ने साबित किया कि भारत समुद्र में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। ‘अजिनी’ जहाज के सभी 20 क्रू मेंबर्स की सुरक्षित रिहाई ने एक बार फिर हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की मजबूत उपस्थिति और समुद्री सुरक्षा के प्रति उसके संकल्प को दुनिया के सामने रखा है।

