भारत की अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, गिग वर्कर्स तथा प्लेटफॉर्म वर्कर्स का महत्वपूर्ण योगदान है। देश की बड़ी आबादी आजीविका के लिए निर्माण कार्य, घरेलू काम, रेहड़ी-पटरी, डिलीवरी सेवाओं, कैब संचालन तथा अन्य अस्थायी कार्यों पर निर्भर है। इन श्रमिकों को नियमित वेतन, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएँ प्रायः उपलब्ध नहीं होती हैं। इसी समस्या को दूर करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा बोर्डों के गठन एवं उनके माध्यम से कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का प्रावधान किया है।
सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का अर्थ एवं उद्देश्य
सामाजिक सुरक्षा बोर्ड एक संस्थागत व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना तथा उनके लिए कल्याणकारी योजनाओं का निर्माण, संचालन और निगरानी करना है।
इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
- असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना।
- श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य, जीवन एवं दुर्घटना बीमा की व्यवस्था करना।
- वृद्धावस्था में पेंशन एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना।
- मातृत्व लाभ तथा अन्य आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करना।
- श्रमिकों के पंजीकरण एवं सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करना।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के प्रमुख प्रावधान
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में असंगठित श्रमिकों, गिग वर्कर्स तथा प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
(क) असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड
केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन का प्रावधान किया गया है। यह बोर्ड असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के कल्याण से संबंधित योजनाओं की सिफारिश करता है तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग देता है।
(ख) गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए बोर्ड
गिग वर्कर्स वे श्रमिक हैं, जो पारंपरिक स्थायी रोजगार संबंधों के बाहर अस्थायी या कार्य-आधारित सेवाएँ प्रदान करते हैं। वहीं प्लेटफॉर्म वर्कर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कार्य प्राप्त करते हैं, जैसे ऑनलाइन डिलीवरी और कैब सेवाओं से जुड़े कर्मचारी।
इन श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का निर्माण एवं संचालन महत्वपूर्ण प्रावधान है।
(ग) राज्य स्तरीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड
राज्य सरकारों को भी असंगठित श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड गठित करने का प्रावधान किया गया है, ताकि योजनाओं का लाभ स्थानीय स्तर तक पहुँच सके।
गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा का महत्व
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के कारण गिग और प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन इन श्रमिकों को रोजगार की अनिश्चितता, कम आय, दुर्घटना के जोखिम और सामाजिक सुरक्षा के अभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
सामाजिक सुरक्षा बोर्डों के माध्यम से निम्नलिखित लाभ सुनिश्चित किए जा सकते हैं—
- स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा।
- वृद्धावस्था पेंशन।
- मातृत्व सहायता।
- जीवन बीमा एवं आर्थिक सुरक्षा।
- कौशल विकास एवं प्रशिक्षण।
- श्रमिकों की शिकायतों के समाधान की व्यवस्था।
सामाजिक सुरक्षा बोर्डों के समक्ष चुनौतियाँ
इन बोर्डों की प्रभावशीलता के सामने कई चुनौतियाँ मौजूद हैं—
- पंजीकरण की समस्या: बड़ी संख्या में श्रमिक अभी भी सरकारी डेटाबेस से बाहर हैं।
- जागरूकता का अभाव: श्रमिकों को उपलब्ध योजनाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं है।
- वित्तीय संसाधनों की कमी: योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए पर्याप्त धन की आवश्यकता है।
- रोजगार की अनिश्चितता: गिग वर्कर्स की आय एवं रोजगार स्थिर नहीं होते।
- क्रियान्वयन की कमजोरी: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी से योजनाओं का लाभ प्रभावित हो सकता है।
- डिजिटल विभाजन: ग्रामीण एवं कमजोर वर्गों के श्रमिकों को ऑनलाइन पंजीकरण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सुधार हेतु सुझाव
सामाजिक सुरक्षा बोर्डों को प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए—
- सभी असंगठित, गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों का सरल एवं सार्वभौमिक पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।
- ई-श्रम पोर्टल को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से प्रभावी रूप से जोड़ा जाए।
- श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा एवं पेंशन की सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
- केंद्र, राज्य सरकारों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ।
- श्रमिकों की शिकायतों के समाधान हेतु पारदर्शी एवं जवाबदेह तंत्र विकसित किया जाए।
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निष्कर्ष
केंद्र सरकार द्वारा असंगठित, गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा बोर्डों की व्यवस्था भारत में समावेशी एवं न्यायपूर्ण श्रम व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह व्यवस्था श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने तथा उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत करने की क्षमता रखती है। हालांकि, इसकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन, पर्याप्त वित्तपोषण, व्यापक पंजीकरण और केंद्र-राज्य समन्वय पर निर्भर करेगी। वास्तव में, सामाजिक सुरक्षा को केवल कल्याणकारी सुविधा न मानकर प्रत्येक श्रमिक का अधिकार सुनिश्चित करना ही विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सार्थक कदम होगा।

