AI Fraud आज साइबर ठगी का सबसे तेजी से बढ़ता तरीका बन गया है, जिसमें ठग नकली आवाज, नकली वीडियो और असली जैसे दिखने वाले मैसेज से लोगों को निशाना बना रहे हैं। कभी किसी रिश्तेदार की हूबहू आवाज में पैसे मांगे जाते हैं, तो कभी बैंक अधिकारी बनकर कॉल आती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आम आदमी खुद को कैसे बचाए? अच्छी बात यह है कि आपके फोन में ही कई ऐसी सुरक्षा सेटिंग्स मौजूद हैं जिन्हें चालू करके ज्यादातर खतरों से बचा जा सकता है। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं।
ठग AI का इस्तेमाल कैसे करते हैं?
आज कुछ सेकंड की ऑडियो रिकॉर्डिंग से किसी की आवाज की नकल तैयार की जा सकती है। ठग सोशल मीडिया वीडियो से यह आवाज जुटाकर परिवार वालों को इमरजेंसी के नाम पर कॉल करते हैं। इसके अलावा AI की मदद से बिल्कुल असली जैसे दिखने वाले ईमेल, SMS और वेबसाइट भी बनाई जाती हैं, जिनमें भाषा की कोई गलती नहीं होती और लोग आसानी से धोखा खा जाते हैं।
कॉल और मैसेज के लिए जरूरी सेटिंग्स
एंड्रॉयड फोन के Phone ऐप की Settings में Caller ID and Spam विकल्प चालू रखें। इससे संदिग्ध नंबर से आने वाली कॉल पर पहले ही चेतावनी दिख जाती है। iPhone में Settings के अंदर Phone सेक्शन में Silence Unknown Callers चालू किया जा सकता है।
इससे अनजान नंबर की कॉल सीधे साइलेंट होकर वॉइसमेल में चली जाती है। AI Fraud से बचने के लिए मैसेज ऐप में Spam Protection और संदिग्ध लिंक की चेतावनी वाला विकल्प भी जरूर चालू रखें।
AI Fraud से बचाने वाली फोन सेटिंग्स
AI Fraud से बचाव की पहली दीवार Google Play Protect है। Play Store खोलकर प्रोफाइल फोटो पर टैप करें, फिर Play Protect में जाकर स्कैनिंग चालू रखें। Settings में Install Unknown Apps का विकल्प बंद रखें, ताकि WhatsApp या SMS पर आई कोई APK फाइल अपने आप इंस्टॉल न हो सके।
WhatsApp में Settings के अंदर Account सेक्शन में जाकर Two Step Verification चालू करें। इससे OTP हाथ लग जाने के बाद भी कोई आपका अकाउंट आसानी से नहीं खोल पाएगा। फोन पर मजबूत स्क्रीन लॉक, बायोमेट्रिक लॉक और Find My Device या Find My चालू रखें।
नए एंड्रॉयड फोन में Theft Protection जैसा फीचर भी मिलता है, जो चोरी होने पर फोन अपने आप लॉक कर देता है। बैंक ऐप में ट्रांजैक्शन लिमिट कम रखें और हर लेनदेन का SMS अलर्ट चालू रखें, ताकि किसी AI Fraud की स्थिति में तुरंत पता चल सके।
आदतें जो सबसे ज्यादा बचाती हैं
परिवार के साथ एक गुप्त कोड वर्ड तय कर लें। कोई अपना बनकर इमरजेंसी में पैसे मांगे, तो पहले वह कोड वर्ड पूछें। ऐसी कोई भी कॉल आए तो फोन काटकर खुद उस व्यक्ति के असली नंबर पर वापस कॉल करें।
जल्दबाजी में पैसे भेजना ही ठगों की सबसे बड़ी जीत होती है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप कभी इंस्टॉल न करें। ऐसा करते ही AI Fraud करने वाले आपकी स्क्रीन पर आने वाला OTP भी देख सकते हैं।

ठगी हो जाए तो क्या करें?
ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे रोके जाने की संभावना उतनी ज्यादा रहेगी। साथ ही अपने बैंक को सूचना देकर कार्ड और UPI ब्लॉक कराएं और सभी जरूरी पासवर्ड बदल दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. नकली आवाज वाली कॉल को कैसे पहचानें?
ऐसी कॉल में अक्सर जल्दबाजी, डर और तुरंत पैसे भेजने का दबाव होता है। आवाज में हल्का रोबोटिक टोन या रुक रुककर बोलना भी इसका संकेत हो सकता है।
2. क्या एंटीवायरस ऐप जरूरी है?
ज्यादातर लोगों के लिए Play Protect और समय पर सिस्टम अपडेट ही काफी हैं। AI Fraud से बचने के लिए फोन का सॉफ्टवेयर हमेशा अपडेट रखना ज्यादा जरूरी है।
3. क्या बुजुर्गों के फोन में भी ये सेटिंग्स करनी चाहिए?
हां, बल्कि सबसे पहले उन्हीं के फोन में करनी चाहिए, क्योंकि AI Fraud करने वाले अक्सर बुजुर्गों को ही निशाना बनाते हैं।
4. संदिग्ध नंबर की शिकायत कहां करें?
संदिग्ध कॉल और मैसेज की शिकायत सरकार के संचार साथी प्लेटफॉर्म की चक्षु सुविधा पर की जा सकती है।
5. ऑनलाइन शिकायत कैसे दर्ज करें?
AI Fraud या किसी भी ऑनलाइन ठगी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जा सकती है।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।
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