महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों ने बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी के बीच अंदरूनी खींचतान को एक बार फिर उजागर कर दिया है। चुनाव में विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) के बेहतर प्रदर्शन के बाद अब सत्ता पक्ष के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा शिवसेना नेता की उस मांग को लेकर हो रही है, जिसमें एकनाथ शिंदे को दोबारा महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाने की बात कही गई है।
इस बयान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। वहीं, बीजेपी नेता नितेश राणे के ‘शकुनि मामा’ वाले बयान ने गठबंधन के भीतर चल रही नाराजगी को सार्वजनिक मंच पर ला दिया है।
MLC चुनाव में महायुति को लगा झटका
महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के लिए 23 अक्टूबर को चुनाव हुए थे। इन चुनावों में महाविकास अघाड़ी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को दो सीटों से संतोष करना पड़ा।
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराया। वंजारी को 67,231 वोट मिले, जबकि कोहले को 63,960 वोट हासिल हुए। यह हार बीजेपी के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नागपुर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है।
इसके अलावा पुणे स्नातक सीट और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर भी विपक्षी महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। वहीं, महायुति को पुणे शिक्षक और अमरावती शिक्षक सीट पर सफलता मिली।
एकनाथ शिंदे को फिर मुख्यमंत्री बनाने की मांग
चुनावी नतीजों के बाद शिवसेना नेता और पूर्व विधायक रवींद्र धंगेकर ने ऐसा बयान दिया, जिसने महायुति के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी।
धंगेकर ने कहा कि चुनाव परिणाम राज्य सरकार की छवि और जनता की सोच को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने महायुति को सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में शिंदे को दोबारा मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।
उनके इस बयान को केवल व्यक्तिगत राय मानकर खारिज करना आसान नहीं है। महाराष्ट्र की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर पहले भी बीजेपी और शिवसेना के बीच अलग-अलग राजनीतिक समीकरण देखने को मिले हैं।
हालांकि, धंगेकर के बयान पर बीजेपी नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई और स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर फैसला गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व का विषय है।
बीजेपी ने दिया करारा जवाब
धंगेकर की टिप्पणी के बाद बीजेपी नेताओं ने उन्हें अपनी सीमा में रहने की सलाह दी। वरिष्ठ बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2024 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 149 सीटों पर चुनाव लड़कर 137 सीटें जीती थीं।
वहीं, बीजेपी एमएलसी प्रवीण दरेकर ने भी धंगेकर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र अभूतपूर्व तरीके से आगे बढ़ रहा है और किसी को भी मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
बीजेपी नेताओं की इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि पार्टी मुख्यमंत्री फडणवीस के नेतृत्व को लेकर किसी तरह की सार्वजनिक चुनौती स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
‘शकुनि मामा’ वाले बयान से बढ़ा विवाद
महायुति के भीतर बढ़ती बयानबाजी के बीच बीजेपी नेता और मंत्री नितेश राणे ने भी विवादित टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन के भीतर यह पता लगाने की जरूरत है कि कहीं कोई ‘शकुनि मामा’ तो मौजूद नहीं है, जो महायुति को कमजोर करने का काम कर रहा हो।
राणे ने महाभारत के पात्र शकुनि का उदाहरण देते हुए इशारों में कहा कि गठबंधन के भीतर ऐसे लोगों की पहचान होनी चाहिए, जो विरोधियों के इशारे पर राजनीतिक माहौल बिगाड़ रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि महायुति को विधानसभा चुनाव की तरह एकजुट होकर काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, गठबंधन ने अपेक्षित सफलता हासिल नहीं की, लेकिन बीजेपी ने उन सीटों पर भी जीत दर्ज की, जहां पिछले चुनाव में उसका प्रदर्शन अलग रहा था।
इस बयान को गठबंधन के भीतर संभावित असंतोष और एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
फडणवीस के लिए क्यों अहम है नागपुर की हार?
नागपुर स्नातक सीट पर बीजेपी की हार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए भी राजनीतिक चुनौती खड़ी की है। इस सीट पर बीजेपी ने पूरी ताकत लगाई थी। इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की जीत ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया।
कांग्रेस ने फडणवीस के उस सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी निशाना साधा, जिसे चुनावी नतीजों के बाद हटा दिया गया। पार्टी ने इसे बीजेपी के आत्मविश्वास और चुनावी दावों पर सवाल उठाने का अवसर बनाया।
विपक्ष का मानना है कि नागपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में हार महायुति के लिए चेतावनी है। हालांकि, विधान परिषद चुनाव के नतीजों को सीधे विधानसभा चुनाव की लोकप्रियता का पैमाना मानना उचित नहीं होगा।
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आगे क्या होगा महायुति का सियासी समीकरण?
MLC चुनाव के परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एकनाथ शिंदे गुट के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई असंतोष है? क्या बीजेपी और शिवसेना के बीच नेतृत्व को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं? और क्या ‘शकुनि मामा’ वाला बयान गठबंधन की अंदरूनी राजनीति का संकेत है?
फिलहाल, मुख्यमंत्री बदलने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। लेकिन जिस तरह सहयोगी दलों के नेता सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं, उससे महायुति की एकजुटता पर सवाल जरूर उठने लगे हैं।
आने वाले दिनों में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के शीर्ष नेताओं की प्रतिक्रियाएं यह तय करेंगी कि यह विवाद केवल चुनावी हार के बाद की बयानबाजी है या महाराष्ट्र की सत्ता में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत।
फिलहाल इतना तय है कि MLC चुनाव की पांच सीटों के नतीजों ने महायुति के भीतर एक नई सियासी लड़ाई को जन्म दे दिया है।

