देश की राजनीति में चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर जारी बहस के बीच विपक्षी INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ यानी ‘जनता द्वारा महाभियोग’ कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित कर दिया है। शुक्रवार को दिल्ली में बारिश के कारण यह कार्यक्रम नहीं हो सका। गठबंधन ने इसे शनिवार तक के लिए टालने का फैसला किया है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को सार्वजनिक रूप से उठाना और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करना है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा से जुड़ा अभियान बता रहा है।
मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर होना था आयोजन
INDIA गठबंधन का यह कार्यक्रम पहले शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नई दिल्ली स्थित आवास, 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित किया जाना था। इसके लिए विपक्षी दलों के नेताओं और सांसदों को आमंत्रित किया गया था।
कार्यक्रम को प्रतीकात्मक रूप से महाभियोग की कार्यवाही का रूप देने की योजना बनाई गई थी। इसमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अध्यक्षता करनी थी। मल्लिकार्जुन खड़गे को प्रस्तावित प्रस्ताव पेश करना था, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को समापन भाषण देना था।
विपक्ष की योजना थी कि विभिन्न दलों के प्रतिनिधि इस मंच से अपनी बात रखें और चुनाव आयोग की भूमिका पर चर्चा करें। हालांकि बारिश के कारण कार्यक्रम की तारीख बदलनी पड़ी।
‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विपक्ष का हमला
INDIA गठबंधन लंबे समय से चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का प्रमुख आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं।
विपक्षी नेताओं का दावा है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसे ‘वोट चोरी’ का मुद्दा बताते हुए जनता के बीच ले जाना चाहते हैं।
विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी केवल चुनाव कराना नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं का विश्वास बनाए रखना भी है। इसी आधार पर गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग उठाई है।
मीरा कुमार, खड़गे और राहुल गांधी की अहम भूमिका
प्रस्तावित कार्यक्रम में विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका तय की गई थी। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को कार्यवाही की अध्यक्षता करनी थी। उनके अनुभव के कारण कार्यक्रम को संसदीय चर्चा जैसा स्वरूप देने की तैयारी थी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को प्रस्तावित प्रस्ताव पेश करना था। वहीं राहुल गांधी को अंत में अपना पक्ष रखते हुए विपक्ष के अभियान का राजनीतिक संदेश जनता तक पहुंचाना था।
इसके अतिरिक्त गठबंधन के घटक दलों के प्रतिनिधियों को भी बोलने का अवसर देने की योजना थी। विपक्ष का उद्देश्य इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाना और इसे केवल कांग्रेस का नहीं, बल्कि व्यापक लोकतांत्रिक चिंता का विषय बताना है।
क्या वास्तव में CEC को हटाया जा सकता है?
इस पूरे विवाद में संवैधानिक प्रक्रिया को समझना भी जरूरी है। विपक्ष जिस ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ की बात कर रहा है, वह वास्तविक संवैधानिक महाभियोग नहीं है। यह एक राजनीतिक और प्रतीकात्मक विरोध कार्यक्रम है।
भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत निर्धारित है। मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। केवल किसी राजनीतिक गठबंधन द्वारा आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता। इसलिए विपक्ष का यह आयोजन मुख्य रूप से राजनीतिक दबाव बनाने और जनता के सामने अपना पक्ष रखने का माध्यम है।
1 नवंबर की रैली पर भी रहेंगी निगाहें
INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्यक्रम के साथ-साथ 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना भी बनाई है। इस रैली को ‘वोट चोरी’ के खिलाफ व्यापक जनअभियान का हिस्सा बताया गया है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल पहले ही इस अभियान को लेकर विपक्षी दलों से एकजुट होकर दिल्ली पहुंचने की अपील कर चुके हैं। गठबंधन का दावा है कि इस रैली के जरिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को मजबूती से उठाया जाएगा।
आगे और समाचार पढ़े:
- महाराष्ट्र में MLC चुनाव के नतीजों से महायुति में बढ़ी रार, शिंदे को CM बनाने की मांग से सियासी हलचल; ‘शकुनि मामा’ वाले बयान ने बढ़ाया विवाद
- दिल्ली के 20 बाजारों पर मंडराया संकट, 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार दांव पर; व्यापारियों ने सोनिया गांधी से की राहुल गांधी की रैली टालने की मांग
विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बढ़ सकती है तकरार
बारिश के कारण कार्यक्रम की तारीख बदलने से विपक्ष का अभियान समाप्त नहीं हुआ है। शनिवार को प्रस्तावित आयोजन और 1 नवंबर की रैली के जरिए INDIA गठबंधन इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में बनाए रखना चाहता है।
दूसरी ओर, इस विवाद का वास्तविक समाधान आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर तथ्यों, पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर आधारित चर्चा से ही संभव होगा।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में कौन-से तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देता है। फिलहाल बारिश ने कार्यक्रम को एक दिन के लिए जरूर टाल दिया है, लेकिन ‘वोट चोरी’ और चुनावी निष्पक्षता का राजनीतिक मुद्दा और तेज होता दिखाई दे रहा है।

