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10 लाख लोग, 20 हजार वाहन और 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने का खतरा: राहुल गांधी की रैली टालने की मांग क्यों कर रहे हैं व्यापारी?

दिल्ली में 1 नवंबर 2026 को प्रस्तावित INDIA गठबंधन की रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि रैली के कारण राजधानी के प्रमुख बाजारों में यातायात बाधित हो सकता है और दिवाली से पहले होने वाली खरीदारी प्रभावित हो सकती है।

CTI के अनुमान के मुताबिक, रैली में लगभग 10 लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है और करीब 20,000 वाहनों की आवाजाही से यातायात पर भारी दबाव पड़ सकता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि इससे लगभग 10,000 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित होने का जोखिम है। हालांकि, यह व्यापारियों का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं।

व्यापारी रैली का विरोध क्यों कर रहे हैं?राहुल गांधी

दिवाली से पहले कारोबार का सबसे महत्वपूर्ण समय

दिवाली से पहले दिल्ली के बाजारों में ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ती है। धनतेरस, दिवाली और भाई दूज के अवसर पर लोग सोना-चांदी, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, बर्तन, मिठाइयां, सूखे मेवे और उपहार खरीदते हैं।

CTI के अध्यक्ष बृजेश गोयल के अनुसार, धनतेरस और दिवाली के आसपास दिल्ली में लगभग 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। ऐसे समय में बाजारों तक पहुंचने वाले रास्तों पर प्रतिबंध लगने से दुकानदारों, थोक व्यापारियों और ग्राहकों को नुकसान हो सकता है।

व्यापारियों ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया है। उनकी मांग है कि कार्यक्रम को कम-से-कम 10 नवंबर के बाद तक टाल दिया जाए।

20 प्रमुख बाजारों पर पड़ सकता है असर

रैली का आयोजन दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित है। इसके आसपास लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में कई बड़े थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं।

इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, कश्मीरी गेट, दरियागंज और करोल बाग जैसे प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र शामिल हैं।

इन बाजारों में दिल्ली के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से व्यापारी सामान खरीदने आते हैं। यदि सड़कें बंद होती हैं या यातायात का मार्ग बदला जाता है, तो माल की आपूर्ति और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

 10 लाख लोगों और 20 हजार वाहनों से क्या समस्याएं हो सकती हैं?

यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव

इतनी बड़ी भीड़ के आने से दिल्ली पुलिस को व्यापक सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ सकती है। संभावित बैरिकेडिंग, यातायात मार्गों में बदलाव और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध बाजारों तक पहुंचने में कठिनाई पैदा कर सकते हैं।

व्यापारियों का कहना है कि रैली स्थल के आसपास की सड़कों पर जाम लगने से थोक माल की ढुलाई बाधित हो सकती है। इससे दुकानों तक सामान पहुंचाने में देरी और कारोबार में गिरावट की आशंका है।

रेलवे स्टेशन और मेट्रो पर भी असर की आशंका

पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री तथा व्यापारी आते-जाते हैं। व्यापारिक संगठन को आशंका है कि भीड़ और यातायात प्रतिबंधों के कारण इन क्षेत्रों में आवागमन मुश्किल हो सकता है।

हालांकि, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने या विशेष प्रतिबंध लगाने का अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों पर निर्भर करेगा। ऐसी किसी कार्रवाई को अभी निश्चित निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

 व्यापारियों ने पहले हुए नुकसान का भी दिया हवाला

CTI का दावा है कि अक्टूबर में रैलियों, मार्च और सड़क बंद होने जैसी परिस्थितियों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। संगठन के अनुसार, कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और मध्य दिल्ली के कुछ क्षेत्रों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।

हालांकि, इस नुकसान के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे व्यापारिक संगठन का दावा समझना चाहिए, न कि आधिकारिक रूप से सत्यापित आर्थिक नुकसान।

राहुल गांधी और कांग्रेस से क्या है मांग?

रैली को दिवाली के बाद कराने की अपील

CTI ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। व्यापारियों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक विरोध और राजनीतिक रैलियों के अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों को बाधित होने से बचाना भी जरूरी है।

संगठन ने दिल्ली पुलिस से भी रामलीला मैदान को निर्धारित विरोध स्थलों की सूची से हटाने और वैकल्पिक स्थानों पर विचार करने का अनुरोध किया है।

राहुल गांधी की ओर से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया के बारे में रिपोर्ट में ‘We hear you’ यानी ‘हम आपकी बात सुन रहे हैं’ का उल्लेख किया गया है। हालांकि, रैली स्थगित करने का अंतिम निर्णय स्पष्ट नहीं है।

लोकतांत्रिक अधिकार और आजीविका के बीच संतुलन

विरोध प्रदर्शन भी जरूरी, व्यापार भी

भारत में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है। राजनीतिक दलों को अपनी मांगें रखने और जनता को एकजुट करने का अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर, दुकानदारों, छोटे कारोबारियों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका भी महत्वपूर्ण है।

इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी है कि रैलियों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए आम नागरिकों और व्यापारियों को कम-से-कम परेशानी हो।

रास्तों की उचित योजना, वैकल्पिक यातायात व्यवस्था और बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करने जैसे कदम इस समस्या को कम कर सकते हैं।

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निष्कर्ष

दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की मांग का मुख्य कारण दिवाली से पहले कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। CTI के अनुसार, 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली के कारण लगभग 20 प्रमुख बाजारों में व्यापार बाधित हो सकता है और 10,000 करोड़ रुपये तक का कारोबार जोखिम में पड़ सकता है।

हालांकि, यह अनुमानित नुकसान है, निश्चित आर्थिक क्षति नहीं। अंतिम प्रभाव रैली में शामिल होने वाले लोगों की संख्या, प्रशासन की तैयारियों और यातायात प्रबंधन पर निर्भर करेगा।

सरकार, प्रशासन, राजनीतिक दलों और व्यापारिक संगठनों के बीच समन्वय से ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा हो और त्योहारों के दौरान व्यापार तथा आम लोगों की आवाजाही भी सुचारु बनी रहे।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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