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Amortization क्या है और यह Depreciation से कैसे अलग है? आसान भाषा में समझें

Amortization का मतलब है किसी अमूर्त संपत्ति की लागत या किसी लोन की रकम को एक तय समय में धीरे-धीरे बांटकर खर्च या चुकता दिखाना। कंपनी के नतीजे पढ़ते समय या होम लोन की EMI शीट देखते समय यह शब्द अक्सर सामने आता है। कई लोग इसे डेप्रिसिएशन जैसा ही मान लेते हैं। दोनों का मकसद मिलता-जुलता है, लेकिन ये अलग-अलग तरह की संपत्तियों पर लागू होते हैं।

Amortization क्या है?

अकाउंटिंग में Amortization उन संपत्तियों पर लगता है, जिन्हें छुआ नहीं जा सकता। जैसे पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, सॉफ्टवेयर लाइसेंस और किसी सरकारी लाइसेंस का अधिकार। ऐसी संपत्ति कुछ सालों तक कंपनी को फायदा देती है। इसलिए उसकी पूरी लागत एक ही साल में खर्च न दिखाकर उसकी उपयोगी अवधि में बराबर बांट दी जाती है। मान लीजिए किसी कंपनी ने 10 लाख रुपये में 5 साल का सॉफ्टवेयर लाइसेंस खरीदा।

तो वह हर साल 2 लाख रुपये एमॉर्टाइजेशन के रूप में खर्च दिखाएगी। ज्यादातर मामलों में इसके लिए सीधी रेखा यानी स्ट्रेट लाइन विधि अपनाई जाती है, जिसमें हर साल बराबर रकम घटती है। अमूर्त संपत्तियों की आखिरी कीमत आमतौर पर शून्य मानी जाती है।

लोन में एमॉर्टाइजेशन का मतलब

बैंकिंग में Amortization का दूसरा मतलब भी है। यहां यह लोन को तय किस्तों में धीरे-धीरे चुकाने की प्रक्रिया को बताता है। आपकी हर EMI में दो हिस्से होते हैं, ब्याज और मूलधन। लोन के शुरुआती सालों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है और मूलधन कम घटता है।

जैसे-जैसे समय बीतता है, ब्याज का हिस्सा घटता है और मूलधन का हिस्सा बढ़ता जाता है। बैंक इसकी पूरी तालिका देता है, जिसे एमॉर्टाइजेशन शेड्यूल कहते हैं। यह शेड्यूल देखकर आप समझ सकते हैं कि प्रीपेमेंट करने से कितना ब्याज बचेगा। लोन के शुरुआती सालों में किया गया प्रीपेमेंट सबसे ज्यादा फायदा देता है।

डेप्रिसिएशन क्या होता है?

डेप्रिसिएशन उन संपत्तियों पर लगता है, जिन्हें देखा और छुआ जा सकता है। जैसे मशीन, गाड़ी, बिल्डिंग, कंप्यूटर और फर्नीचर। इस्तेमाल, घिसावट और पुराने होने से इनकी कीमत समय के साथ घटती है। इसी गिरावट को हर साल खर्च के रूप में दिखाया जाता है। मान लीजिए 20 लाख रुपये की मशीन 10 साल चलेगी और उसके बाद 2 लाख रुपये में बिकेगी।

स्ट्रेट लाइन विधि से हर साल 1.8 लाख रुपये का डेप्रिसिएशन दिखेगा। इसमें स्ट्रेट लाइन के अलावा रिटन डाउन वैल्यू यानी WDV विधि भी चलती है। इसमें हर साल बची हुई कीमत पर तय प्रतिशत घटाया जाता है, इसलिए शुरुआती सालों में खर्च ज्यादा दिखता है।

दोनों में मुख्य अंतर

पहला फर्क संपत्ति का है। एमॉर्टाइजेशन अमूर्त संपत्तियों पर लगता है, जबकि डेप्रिसिएशन मूर्त यानी भौतिक संपत्तियों पर। दूसरा फर्क आखिरी कीमत का है। मशीन या गाड़ी बाद में कुछ दाम पर बिक सकती है, लेकिन पेटेंट या लाइसेंस की अवधि खत्म होने पर उसकी कीमत आमतौर पर शून्य हो जाती है। तीसरा फर्क तरीके का है।

Amortization
Amortization

एमॉर्टाइजेशन में ज्यादातर स्ट्रेट लाइन विधि चलती है, जबकि डेप्रिसिएशन में स्ट्रेट लाइन और WDV दोनों आम हैं। चौथा फर्क दायरे का है। डेप्रिसिएशन सिर्फ संपत्ति पर लागू होता है, जबकि एमॉर्टाइजेशन शब्द लोन चुकाने की प्रक्रिया के लिए भी इस्तेमाल होता है।

दोनों में क्या समानता है?

दोनों नॉन कैश खर्च हैं। यानी इन्हें दिखाते समय कंपनी की जेब से असल में कोई नया पैसा बाहर नहीं जाता। दोनों से कंपनी का कागजी मुनाफा घटता है, जिससे टैक्स योग्य आय भी कम हो सकती है। यही कारण है कि कंपनी के असली कैश प्रदर्शन को समझने के लिए EBITDA देखा जाता है, जिसमें ये दोनों खर्च जोड़कर वापस गिने जाते हैं।

भारत में कंपनियां अमूर्त संपत्तियों के लिए Ind AS 38 और भौतिक संपत्तियों के लिए Ind AS 16 जैसे अकाउंटिंग मानकों का पालन करती हैं। निवेशक हों या छोटे कारोबारी, Amortization और डेप्रिसिएशन का फर्क समझकर कंपनी की बैलेंस शीट और अपने लोन दोनों को बेहतर तरीके से पढ़ा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. Amortization किन संपत्तियों पर लगता है?

यह पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, सॉफ्टवेयर लाइसेंस और ऐसी ही दूसरी अमूर्त संपत्तियों पर लगता है।

2. Amortization शेड्यूल क्या होता है?

यह बैंक की दी हुई तालिका है, जिसमें हर EMI का ब्याज, मूलधन और बचा हुआ लोन अलग-अलग दिखाया जाता है।

3. क्या जमीन पर डेप्रिसिएशन लगता है?

नहीं, जमीन की उम्र सीमित नहीं मानी जाती, इसलिए आमतौर पर उस पर डेप्रिसिएशन नहीं लगाया जाता।

4. क्या डेप्रिसिएशन और Amortization कैश खर्च हैं?

नहीं, दोनों नॉन कैश खर्च हैं। ये सिर्फ संपत्ति की लागत को समय के साथ खातों में बांटते हैं।

5. भारत में Amortization नियमों की आधिकारिक जानकारी कहां मिलती है?

अकाउंटिंग मानकों और उनसे जुड़े दिशा निर्देशों की पूरी जानकारी ICAI की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

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अकाउंटिंग और फाइनेंस से जुड़ी ये खबरें भी आपके काम की हैं: कंपनी के खाते में Depreciation दिखाना क्यों जरूरी है, EBITDA क्या होता है और Top-Up Loan लेने से पहले जरूरी बातें।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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