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Satellite Connectivity वाले Smartphones क्या हैं और Emergency में कैसे काम करते हैं?

Satellite Connectivity वाले स्मार्टफोन ऐसे फोन हैं, जो मोबाइल टावर का नेटवर्क न होने पर भी सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से जुड़कर इमरजेंसी मैसेज भेज सकते हैं। पहाड़, जंगल, रेगिस्तान या समुद्र जैसी जगहों पर फंसे लोगों के लिए यह तकनीक जान बचाने वाली साबित हो रही है। सोचिए, ट्रेकिंग के दौरान रास्ता भटक जाएं और फोन में नेटवर्क का एक भी सिग्नल न हो।

Satellite Connectivity तकनीक क्या है?

आम फोन पास के मोबाइल टावर से सिग्नल लेते हैं। लेकिन नए तरह के फोन में ऐसा हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर होता है, जो टावर न मिलने पर सीधे सैटेलाइट से बात कर सकता है। इसे डायरेक्ट टू डिवाइस यानी D2D या नॉन टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (NTN) तकनीक भी कहा जाता है। मोबाइल मानक तय करने वाली संस्था 3GPP ने अपने रिलीज 17 में इसके लिए नियम जोड़े हैं।

Satellite Connectivity इमरजेंसी में कैसे काम करती है?

नेटवर्क गायब होने पर विकल्प जब फोन को न मोबाइल नेटवर्क मिलता है और न वाई फाई, तब इमरजेंसी कॉल की कोशिश करने पर फोन सैटेलाइट के जरिए मैसेज भेजने का विकल्प दिखाता है। फोन को सही दिशा में रखना स्क्रीन पर एक गाइड बताती है कि फोन को आसमान में किस तरफ घुमाना है। खुला आसमान जरूरी है, क्योंकि घने पेड़, छत या ऊंची इमारतें सिग्नल रोक सकती हैं।

छोटे और कंप्रेस मैसेज

सैटेलाइट लिंक बहुत धीमा होता है, इसलिए फोन कुछ सवाल पूछता है। जैसे कौन घायल है, क्या हुआ है और कितने लोग साथ हैं। इन जवाबों को छोटे डेटा पैकेट में बदलकर भेजा जाता है। लोकेशन और मदद मैसेज के साथ आपकी GPS लोकेशन, बैटरी लेवल और जरूरी मेडिकल जानकारी भी जा सकती है।

यह मैसेज जमीन पर बने केंद्र तक पहुंचता है, जहां से स्थानीय बचाव एजेंसियों को सूचना दी जाती है। मौसम और सैटेलाइट की स्थिति के हिसाब से एक मैसेज जाने में कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक लग सकते हैं।

कौन से फोन में मिलता है यह फीचर?

Apple ने iPhone 14 सीरीज से इमरजेंसी SOS वाया सैटेलाइट फीचर शुरू किया था। Google Pixel 9 सीरीज में सैटेलाइट SOS दिया गया है, जबकि Samsung, Huawei और कुछ अन्य कंपनियों के चुनिंदा मॉडल भी यह सुविधा देते हैं। ध्यान रखें कि Satellite Connectivity का फीचर हर देश में चालू नहीं होता। यह फोन मॉडल, देश के नियम और टेलीकॉम कंपनी की साझेदारी पर निर्भर करता है।

भारत में अभी क्या स्थिति है?

भारत में अभी आम ग्राहकों के लिए फोन से सीधी सैटेलाइट मैसेजिंग पूरी तरह शुरू नहीं हुई है। अक्टूबर 2024 में BSNL और Viasat ने एक सामान्य एंड्रॉयड फोन से सैटेलाइट के जरिए दोतरफा और SOS मैसेज भेजकर इसका सफल प्रदर्शन किया था।

TRAI ने अप्रैल 2026 में D2D सेवाओं के स्पेक्ट्रम पर परामर्श शुरू किया। अगस्त 2026 में Starlink ने भी फोन से सीधे जुड़ने वाली तकनीक वाले अपने बड़े नेटवर्क के लिए दोबारा आवेदन किया है। यानी नियम तय होने के बाद ही आम लोगों तक यह सेवा पहुंचेगी।

सीमाएं जो जानना जरूरी है

इससे सामान्य कॉल या इंटरनेट नहीं चलता, ज्यादातर फोन में सिर्फ टेक्स्ट मैसेज जाते हैं। घर के अंदर, गुफा या घने जंगल में यह फीचर ठीक से काम नहीं करता। यह भी याद रखें कि भारत में बिना सरकारी अनुमति के Thuraya या Iridium जैसे पुराने सैटेलाइट फोन रखना गैरकानूनी है। स्मार्टफोन का सैटेलाइट फीचर इससे अलग है और टेलीकॉम कंपनी की अनुमति वाली सेवा के जरिए ही चलता है।

Satellite Connectivity
Satellite Connectivity

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भविष्य के मोबाइल नेटवर्क की दिशा समझने के लिए पढ़ें 6G नेटवर्क पर भारत की वैश्विक साझेदारी। देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे बदलाव जानें ISRO और स्पेस सेक्टर सुधारों की पूरी खबर में। फोन की बैटरी का ध्यान रखने के लिए यह लेख भी उपयोगी है: चार्जिंग के दौरान फोन गर्म क्यों होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. Satellite Connectivity वाले फोन क्या होते हैं?

ये ऐसे स्मार्टफोन हैं, जो मोबाइल नेटवर्क न होने पर सीधे सैटेलाइट से जुड़कर इमरजेंसी मैसेज और लोकेशन भेज सकते हैं।

2. क्या Satellite Connectivity से सामान्य कॉल की जा सकती है?

ज्यादातर मौजूदा फोन में सिर्फ टेक्स्ट और SOS मैसेज की सुविधा है। वॉइस कॉल और इंटरनेट वाली सेवाएं अभी शुरुआती दौर में हैं।

3. क्या भारत में Satellite Connectivity फीचर इस्तेमाल किया जा सकता है?

फिलहाल आम ग्राहकों के लिए यह सेवा पूरी तरह शुरू नहीं हुई है। स्पेक्ट्रम और नियम तय होने के बाद टेलीकॉम कंपनियां इसे लॉन्च कर सकती हैं।

4. क्या Satellite Connectivity के लिए अलग से पैसे देने होंगे?

कुछ देशों में शुरुआती समय के लिए यह मुफ्त दिया गया, जबकि कई जगह टेलीकॉम प्लान या सब्सक्रिप्शन के साथ मिलता है। भारत में कीमत लॉन्च के समय तय होगी।

5. Satellite Connectivity से जुड़े नियमों की जानकारी कहां मिलेगी?

सैटेलाइट और टेलीकॉम सेवाओं से जुड़े परामर्श पत्र और ताजा अपडेट दूरसंचार नियामक TRAI की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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