
Hard Inquiry वह जांच है, जो कोई बैंक या NBFC आपकी लोन या क्रेडिट कार्ड एप्लिकेशन मिलने पर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट निकालकर करता है, और इसका असर आपके सिबिल स्कोर पर पड़ता है। कई लोग जल्दी लोन पाने के चक्कर में एक ही हफ्ते में चार पांच बैंकों और ऐप्स पर अप्लाई कर देते हैं।
नतीजा यह होता है कि लोन तो मिलता नहीं, उल्टा स्कोर भी गिर जाता है। इस लेख में आसान भाषा में समझेंगे कि ऐसा क्यों होता है और बार बार अप्लाई करने की गलती से कैसे बचें।
Hard Inquiry और Soft Inquiry में क्या फर्क है?
जब आप खुद अपना क्रेडिट स्कोर चेक करते हैं, तो उसे सॉफ्ट इंक्वायरी कहा जाता है। इसी तरह बैंक जब आपको पहले से मंजूर ऑफर भेजने के लिए सामान्य जांच करते हैं, तो वह भी आमतौर पर सॉफ्ट इंक्वायरी होती है।
सॉफ्ट इंक्वायरी का स्कोर पर कोई असर नहीं पड़ता, इसलिए आप जितनी बार चाहें अपना स्कोर देख सकते हैं। वहीं Hard Inquiry तभी होती है, जब आप खुद किसी लोन या कार्ड के लिए औपचारिक आवेदन करते हैं।
यह जानकारी आपकी क्रेडिट रिपोर्ट के इंक्वायरी सेक्शन में दर्ज हो जाती है। बाद में कोई भी नया लेंडर इसे देख सकता है।
बार बार अप्लाई करने से स्कोर क्यों गिरता है?
हर नई Hard Inquiry लेंडर को यह संकेत देती है कि आप नया कर्ज लेने की कोशिश कर रहे हैं। एक दो इंक्वायरी से स्कोर पर बहुत मामूली असर होता है, लेकिन कम समय में कई इंक्वायरी हों तो तस्वीर बदल जाती है।
ऐसी स्थिति में बैंक मान लेते हैं कि आपको पैसों की सख्त जरूरत है या दूसरे बैंक आपका आवेदन ठुकरा चुके हैं। इसे क्रेडिट हंग्री व्यवहार माना जाता है, जिससे जोखिम ज्यादा दिखता है और स्कोर कुछ अंक नीचे आ सकता है।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि रिजेक्शन के बाद लोग घबराकर और जगह अप्लाई करते हैं। इससे Hard Inquiry की संख्या बढ़ती जाती है और अगली मंजूरी और मुश्किल हो जाती है।
इसका असर कितने समय तक रहता है?
Hard Inquiry का रिकॉर्ड आपकी रिपोर्ट में लंबे समय तक दिख सकता है, लेकिन स्कोर पर इसका असर आमतौर पर कुछ महीनों में धीरे धीरे कम हो जाता है। अगर इस बीच आप समय पर EMI और कार्ड बिल भरते रहें, तो स्कोर फिर से सुधर जाता है।
भुगतान का इतिहास और क्रेडिट यूटिलाइजेशन स्कोर के ज्यादा बड़े हिस्से तय करते हैं। इसलिए एक दो इंक्वायरी से घबराने की जरूरत नहीं है, बस इनकी संख्या पर नजर रखें।
स्कोर को बचाने के आसान तरीके
लोन लेने से पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट खुद देखें और गलतियां हों तो पहले उन्हें ठीक करवाएं। इससे अंदाजा हो जाएगा कि आपको कहां मंजूरी मिलने की संभावना ज्यादा है।
कई बैंकों में एक साथ अप्लाई करने की बजाय पहले उनकी शर्तों, ब्याज दर और योग्यता की तुलना करें और फिर सिर्फ एक या दो जगह आवेदन करें। लोन ऐप्स पर सिर्फ ऑफर देखने के लिए भी पूरी डिटेल भरने से पहले जांच लें कि कहीं वह Hard Inquiry तो नहीं करेगा।
एक आवेदन रिजेक्ट होने पर तुरंत दूसरी जगह दौड़ने की बजाय कारण समझें और कुछ समय रुककर स्कोर सुधारें। RBI के नियमों के मुताबिक अब जब भी कोई लेंडर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट देखता है, तो क्रेडिट ब्यूरो आपको SMS या ईमेल से सूचना भेजता है, जिससे बिना जानकारी के हो रही जांच भी पकड़ में आ जाती है।
क्रेडिट स्कोर से जुड़ी ये जानकारियां भी आपके काम आएंगी: CIBIL के अलावा भी हैं 3 और Credit Bureau, Credit Card Limit Increase का सिबिल पर असर और Loan Settlement का सिबिल रिपोर्ट से संबंध।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. एक Hard Inquiry से सिबिल स्कोर कितना गिरता है?
इसका कोई तय आंकड़ा नहीं है, लेकिन एक इंक्वायरी का असर आमतौर पर बहुत मामूली होता है। असली नुकसान तब होता है, जब कम समय में कई इंक्वायरी जमा हो जाती हैं।
2. क्या खुद स्कोर चेक करने से स्कोर गिरता है?
नहीं, खुद अपना स्कोर देखना सॉफ्ट इंक्वायरी है और इसका स्कोर पर कोई असर नहीं होता।
3. क्या रिपोर्ट से इंक्वायरी हटवाई जा सकती है?
अगर कोई इंक्वायरी आपकी जानकारी या सहमति के बिना हुई है, तो आप क्रेडिट ब्यूरो के पास विवाद दर्ज कर सकते हैं। सही तरीके से हुई इंक्वायरी नहीं हटती।
4. अपनी पूरी क्रेडिट रिपोर्ट मुफ्त में कहां देखें?
हर क्रेडिट ब्यूरो से साल में एक बार पूरी रिपोर्ट मुफ्त मिलती है, जिसे आप CIBIL की आधिकारिक वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते हैं।
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