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क्या आप भी नया लैपटॉप खरीद रहे हैं? तो SSD स्टोरेज के बारे में ये बातें जरूर जान लें

SSD यानी सॉलिड स्टेट ड्राइव एक ऐसा स्टोरेज डिवाइस है, जो डेटा को घूमती डिस्क की जगह फ्लैश मेमोरी चिप्स में सेव करता है। यही वजह है कि इसमें लगे कंप्यूटर या लैपटॉप कुछ ही सेकंड में चालू हो जाते हैं और ऐप्स पलक झपकते खुलती हैं। पुराना लैपटॉप धीमा चल रहा हो या नया सिस्टम लेना हो, यह तकनीक समझना काम आएगा।

सॉलिड स्टेट ड्राइव क्या होती है?

पुरानी हार्ड डिस्क में एक घूमने वाली प्लेट और उस पर चलने वाला छोटा सा हेड होता है। डेटा पढ़ने के लिए यह प्लेट तेजी से घूमती है, जिसमें समय लगता है। सॉलिड स्टेट ड्राइव में कोई भी हिलने डुलने वाला पुर्जा नहीं होता। सारा डेटा इलेक्ट्रॉनिक चिप्स में रहता है, इसलिए यह ज्यादा तेज, हल्की, शांत और झटकों को बेहतर तरीके से झेलने वाली होती है।

SSD कैसे काम करती है?

SSD के अंदर नैंड फ्लैश मेमोरी चिप्स लगी होती हैं। इन चिप्स में करोड़ों छोटे सेल होते हैं, जो बिजली का चार्ज रोककर 0 और 1 के रूप में डेटा सेव करते हैं। बिजली बंद होने पर भी यह डेटा सुरक्षित रहता है। इन चिप्स को एक कंट्रोलर संभालता है, जिसे ड्राइव का दिमाग कह सकते हैं।

यह तय करता है कि डेटा कहां लिखा जाएगा और कहां से पढ़ा जाएगा। कंट्रोलर वियर लेवलिंग नाम की तकनीक से डेटा को सभी सेल में बराबर बांटता है, ताकि कोई एक हिस्सा जल्दी खराब न हो। कई ड्राइव में तेज काम के लिए डीरैम कैश भी लगा होता है।

इंटरफेस के हिसाब से प्रकार

सैटा ड्राइव पुरानी हार्ड डिस्क वाले कनेक्शन पर चलती है और ज्यादातर 2.5 इंच के आकार में आती है। इसकी अधिकतम रफ्तार लगभग 550 एमबी प्रति सेकंड तक रहती है, जो पुराने सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए काफी है।

एनवीएमई ड्राइव पीसीआईई कनेक्शन से सीधे प्रोसेसर से बात करती है। इसे खास तौर पर फ्लैश स्टोरेज के लिए बनाया गया है, इसलिए यह सैटा से कई गुना तेज होती है। पीसीआईई जेन 3 से लेकर जेन 5 तक, हर नई पीढ़ी के साथ इसकी रफ्तार और बढ़ती गई है।

आकार के हिसाब से प्रकार

2.5 इंच ड्राइव देखने में छोटी हार्ड डिस्क जैसी होती है और डेस्कटॉप व पुराने लैपटॉप में आसानी से लग जाती है। एम.2 ड्राइव च्युइंग गम की पट्टी जितनी पतली होती है और सीधे मदरबोर्ड पर लगती है, इसलिए आजकल के पतले लैपटॉप में यही सबसे आम है।

एम.2 ड्राइव सैटा और एनवीएमई, दोनों तरह की आती हैं, इसलिए खरीदने से पहले अपने लैपटॉप का स्लॉट जरूर जांचें। इसके अलावा यूएसबी से जुड़ने वाली पोर्टेबल एक्सटर्नल ड्राइव भी मिलती है, जो बैकअप और फाइल ले जाने के लिए बढ़िया है।

मेमोरी सेल के हिसाब से प्रकार

एक सेल में कितने बिट सेव होते हैं, इसके आधार पर एसएलसी, एमएलसी, टीएलसी और क्यूएलसी चार प्रकार होते हैं। एसएलसी सबसे टिकाऊ और महंगी होती है, जबकि क्यूएलसी में कम कीमत पर ज्यादा स्टोरेज मिलती है। आम लोगों के लिए टीएलसी ड्राइव सबसे संतुलित विकल्प मानी जाती है।

SSD
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खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?

SSD खरीदने से पहले देखें कि आपका लैपटॉप या मदरबोर्ड किस स्लॉट और इंटरफेस को सपोर्ट करता है। फिर पढ़ने लिखने की रफ्तार, स्टोरेज क्षमता और टीबीडब्ल्यू रेटिंग पर ध्यान दें, जो बताती है कि ड्राइव पर कुल कितना डेटा लिखा जा सकता है। निष्कर्ष पुराने कंप्यूटर में यह एक अपग्रेड उसे नई जान दे सकता है। अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से सही इंटरफेस और आकार चुनें।

फाइलों को सुरक्षित रखने के लिए डेटा बैकअप से जुड़ी गाइड पढ़ें। तेज कनेक्शन के लिए यूएसबी टाइप सी और मोबाइल परफॉर्मेंस के लिए वर्चुअल रैम पर हमारा लेख भी देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या SSD लगाने से पुराना लैपटॉप तेज हो जाता है?

हां, हार्ड डिस्क की जगह इसे लगाने पर सिस्टम का बूट टाइम और ऐप खुलने की रफ्तार काफी बढ़ जाती है।

2. SSD कितने साल चलती है?

सामान्य इस्तेमाल में अच्छी क्वालिटी की ड्राइव कई साल आराम से चलती है। इसकी उम्र टीबीडब्ल्यू रेटिंग से समझी जा सकती है।

3. सैटा SSD और एनवीएमई में से किसे चुनें?

अगर आपका सिस्टम एनवीएमई सपोर्ट करता है, तो वही चुनें क्योंकि यह कहीं ज्यादा तेज है। पुराने सिस्टम के लिए सैटा भी अच्छा अपग्रेड है।

4. क्या SSD से डिलीट हुआ डेटा वापस मिल सकता है?

इसमें ट्रिम फीचर की वजह से डिलीट डेटा वापस पाना मुश्किल होता है, इसलिए नियमित बैकअप जरूरी है।

5. अपने लैपटॉप के लिए सही आकार कैसे पहचानें?

लैपटॉप के मैनुअल या कंपनी की वेबसाइट पर स्टोरेज स्लॉट की जानकारी देखें। अलग अलग आकार और इंटरफेस की पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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