AI in Indian Education अब सिर्फ एक चर्चा नहीं, बल्कि हकीकत बन चुका है, क्योंकि 2026-27 सत्र से देश के स्कूलों में छोटी कक्षाओं से ही एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग की पढ़ाई शुरू हो गई है। यह बदलाव आने वाली पीढ़ी के सोचने और सीखने का तरीका बदल सकता है।
कई अभिभावकों के मन में सवाल है कि तीसरी कक्षा का बच्चा एआई में क्या पढ़ेगा। क्या उसे कोडिंग सिखाई जाएगी या सिर्फ मशीन के बारे में बताया जाएगा?
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सरकार और सीबीएसई ने क्या फैसला लिया है, बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा है और इसकी चुनौतियां क्या हैं।
सरकार ने क्या फैसला लिया?
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने अक्टूबर 2025 में घोषणा की थी कि कक्षा 3 से एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग की पढ़ाई शुरू होगी। यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और स्कूली शिक्षा के राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे 2023 के तहत लिया गया।
मंत्रालय का कहना है कि एआई की समझ को पढ़ने और गिनती की तरह एक बुनियादी कौशल माना जाना चाहिए। इसके लिए सीबीएसई, एनसीईआरटी, केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति और राज्यों के शिक्षा विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए सीबीएसई ने आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर कार्तिक रमन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई थी।
सीबीएसई का नया पाठ्यक्रम क्या है?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 1 अप्रैल 2026 को कक्षा 3 से 8 के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई का पाठ्यक्रम जारी किया। इसके साथ शिक्षकों के लिए हैंडबुक और छात्रों के लिए पढ़ाई की सामग्री भी जारी की गई।
यह पाठ्यक्रम 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू हुआ है। इसका मकसद बच्चों में तार्किक सोच, समस्या हल करने की क्षमता, पैटर्न पहचानने की आदत और तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल की समझ विकसित करना है।
शिक्षा मंत्री के अनुसार यह कदम पढ़ाई को रटने से हटाकर सोचने और समझने की ओर ले जाएगा।
किस कक्षा में क्या पढ़ाया जा रहा है?
कक्षा 3 से 5 में मुख्य जोर कंप्यूटेशनल थिंकिंग पर है, जिसे गणित और आसपास की दुनिया से जुड़े विषयों के साथ जोड़कर पढ़ाया जा रहा है। यहां बच्चे खेल, पहेलियों और रोजमर्रा के उदाहरणों से किसी समस्या को छोटे हिस्सों में बांटना सीखते हैं।
कक्षा 6 से 8 में इसके साथ एआई की बुनियादी समझ जोड़ी गई है। बच्चे जानते हैं कि एआई क्या है, यह स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और संचार में कैसे काम आता है और इसके इस्तेमाल में किन नैतिक बातों का ध्यान रखना चाहिए।
ऊंची कक्षाओं में आगे चलकर कोडिंग जैसे एआई कौशल पर ज्यादा ध्यान देने की योजना है। सीबीएसई पहले से ही कक्षा 9 से 12 तक एआई को एक वैकल्पिक स्किल विषय के रूप में पढ़ा रहा है।
AI in Indian Education से जुड़ी दूसरी पहल
केंद्रीय बजट 2025-26 में सरकार ने अगले पांच सालों में सरकारी स्कूलों में 50,000 अटल टिंकरिंग लैब बनाने की घोषणा की थी। इन लैब में बच्चे रोबोटिक्स, सेंसर और नई तकनीक पर खुद प्रयोग कर सकते हैं।
इसी बजट में शिक्षा के लिए एआई का एक उत्कृष्टता केंद्र बनाने के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया था। सरकार का लक्ष्य है कि एआई का इस्तेमाल पढ़ाई को बेहतर और सबके लिए सुलभ बनाने में हो।
चुनौतियां क्या हैं?
सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों की ट्रेनिंग है। जब तक शिक्षक खुद एआई को अच्छी तरह नहीं समझेंगे, तब तक बच्चों को सही तरीके से पढ़ाना मुश्किल होगा।
गांवों और छोटे कस्बों के कई स्कूलों में अभी भी कंप्यूटर, बिजली और इंटरनेट की कमी है। ऐसे में शहर और गांव के बच्चों के बीच डिजिटल खाई बढ़ने का खतरा भी है।
बच्चों के डेटा की सुरक्षा और स्क्रीन टाइम भी बड़े सवाल हैं। इसलिए AI in Indian Education की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे जमीन पर कितनी समझदारी से लागू किया जाता है।
अभिभावकों और छात्रों के लिए क्या मायने हैं?
AI in Indian Education को लेकर अभिभावकों को घबराने की जरूरत नहीं है। छोटी कक्षाओं में बच्चों पर कोडिंग का बोझ नहीं डाला जा रहा, बल्कि उन्हें सोचने और सवाल पूछने की आदत सिखाई जा रही है।
घर पर बच्चों से बात करें कि वे स्कूल में क्या सीख रहे हैं। उन्हें एआई का इस्तेमाल सीखने के साधन की तरह करने दें, नकल या होमवर्क पूरा करने के शॉर्टकट की तरह नहीं।
आने वाले समय में लगभग हर नौकरी में एआई की कुछ न कुछ भूमिका होगी। ऐसे में स्कूल से ही इसकी बुनियादी समझ बच्चों के भविष्य के लिए बड़ा फायदा बन सकती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- AI in Indian Education के तहत किस कक्षा से एआई पढ़ाया जा रहा है?
2026-27 सत्र से कक्षा 3 से कंप्यूटेशनल थिंकिंग की पढ़ाई शुरू हुई है, जबकि एआई की बुनियादी समझ कक्षा 6 से जोड़ी गई है। - क्या छोटे बच्चों को कोडिंग सीखनी होगी?
नहीं, छोटी कक्षाओं में कोडिंग पर जोर नहीं है। यहां तार्किक सोच, पैटर्न पहचानना और समस्या हल करना खेल और उदाहरणों के जरिए सिखाया जा रहा है। - क्या यह पाठ्यक्रम राज्य बोर्ड के स्कूलों में भी लागू होगा?
फिलहाल यह सीबीएसई स्कूलों में लागू हुआ है। शिक्षा मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर काम कर रहा है, इसलिए अपने राज्य बोर्ड की आधिकारिक सूचना जरूर देखें। - सीबीएसई का पूरा पाठ्यक्रम कहां देखें?
कक्षा 3 से 8 के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई का आधिकारिक पाठ्यक्रम सीबीएसई की अकादमिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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