उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस ने संगठन स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने रामपुर खास से विधायक अराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्होंने अजय राय की जगह ली है, जो अगस्त 2023 से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। कांग्रेस ने इस बदलाव के साथ संगठन में कई अन्य नियुक्तियां भी की हैं। सहारनपुर से पार्टी सांसद इमरान मसूद को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। देश के सबसे बड़े राज्य में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने के लिहाज से कांग्रेस का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ने एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अराधना मिश्रा को जिम्मेदारी दी है, वहीं दूसरी तरफ इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर संगठन में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को जगह दी है।
कौन हैं अराधना मिश्रा मोना?
अराधना मिश्रा उत्तर प्रदेश कांग्रेस की वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा सीट से विधायक हैं और इससे पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता की भूमिका निभा चुकी हैं।
अराधना मिश्रा का राजनीतिक परिवार से पुराना संबंध है। वह वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। प्रमोद तिवारी ने रामपुर खास विधानसभा सीट का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2014 में उनके राज्यसभा जाने के बाद उपचुनाव में अराधना मिश्रा ने यह सीट जीती और इसके बाद 2017 में भी उन्होंने जीत दर्ज की।
अराधना मिश्रा की शिक्षा की बात करें तो उन्होंने कॉमर्स में स्नातक और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की है। राजनीति में आने से पहले और उसके साथ उन्होंने स्थानीय स्तर पर भी काम किया। वह वर्ष 2001 से तीन बार ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं।
प्रियंका गांधी के साथ भी सक्रिय भूमिका
अराधना मिश्रा को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ उत्तर प्रदेश में पार्टी के कई अभियानों में सक्रिय रूप से देखा गया है। विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े मुद्दों और कथित अत्याचार के मामलों में प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश दौरों के दौरान वह उनके साथ रही हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के महिला-केंद्रित अभियान ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ के दौरान भी अराधना मिश्रा ने प्रियंका गांधी के साथ प्रदेश के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया था।
यही वजह है कि प्रदेश कांग्रेस के नए नेतृत्व में उनकी नियुक्ति को पार्टी के महिला नेतृत्व और संगठनात्मक अनुभव के संयोजन के तौर पर भी देखा जा रहा है।
अजय राय की जगह मिली जिम्मेदारी
अराधना मिश्रा से पहले अजय राय उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे। उन्हें अगस्त 2023 में प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। राय पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख कांग्रेस नेताओं में शामिल हैं और वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पिछले दो लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट पर राय ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा और पिछले चुनाव की तुलना में जीत का अंतर कम करने में सफल रहे। हालांकि, पार्टी ने अब प्रदेश संगठन की कमान उनके स्थान पर अराधना मिश्रा को देने का फैसला किया है।
अजय राय ने नए प्रदेश नेतृत्व को शुभकामनाएं दी हैं और पार्टी के लिए काम करते रहने की बात कही है। इस तरह नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद पार्टी के भीतर सार्वजनिक रूप से एकजुटता का संदेश देने की कोशिश दिखाई देती है।
इमरान मसूद को भी बड़ी जिम्मेदारी
कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। इसके अलावा देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, चौधरी वीरेंद्र सिंह को विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी दी गई है, यानी वह इस पद पर अराधना मिश्रा की जगह लेंगे।
इससे साफ है कि कांग्रेस ने केवल प्रदेश अध्यक्ष बदलने के बजाय संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों में एक साथ बदलाव किया है।
2027 चुनाव से पहले संगठन पर फोकस
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस लगातार अपने संगठन में बदलाव कर रही है। जुलाई में पार्टी ने उत्तर प्रदेश के लिए अपने AICC प्रभारी के पद पर भी बदलाव किया था और राजेंद्र पाल गौतम को यह जिम्मेदारी दी गई थी। सितंबर में कांग्रेस ने कुंवर सिंह निषाद को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया एवं प्रचार विभाग का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
इन बदलावों के जरिए पार्टी प्रदेश में अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। अराधना मिश्रा की नियुक्ति के साथ ब्राह्मण नेतृत्व को प्रमुख संगठनात्मक भूमिका मिली है, जबकि इमरान मसूद के रूप में मुस्लिम समुदाय से आने वाले नेता को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। देवेंद्र निषाद की नियुक्ति भी सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ पार्टी के जनाधार को बढ़ाने की चुनौती है। 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को समाजवादी पार्टी के साथ अपने संबंधों और सीट बंटवारे से जुड़े सवालों पर भी रणनीति बनानी होगी।
हाल के महीनों में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर भी आक्रामक रुख अपनाया है। सितंबर में लखनऊ में पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उस प्रदर्शन में अजय राय और अराधना मिश्रा दोनों मौजूद थे।
अब प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अराधना मिश्रा के सामने संगठन को चुनावी स्तर पर सक्रिय करने और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
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आगे की राह
अराधना मिश्रा मोना की नियुक्ति के साथ उत्तर प्रदेश कांग्रेस को नया प्रदेश नेतृत्व मिल गया है। उनके सामने एक ओर संगठन के पुनर्गठन की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के राजनीतिक अभियान को जमीन तक पहुंचाने की चुनौती होगी।
कांग्रेस ने उनके साथ इमरान मसूद, देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद जैसे नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर संगठन में व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व का संदेश दिया है। अब आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि नया नेतृत्व प्रदेश में कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और चुनावी अभियान को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अराधना मिश्रा मोना की ताजपोशी कांग्रेस के लिए केवल प्रदेश अध्यक्ष का बदलाव नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश संगठन को नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

