मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में चल रहा विरोध प्रदर्शन शनिवार, 3 अक्टूबर को एक बार फिर तेज होने जा रहा है। शुक्रवार को जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में हुए बड़े प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रदर्शनकारियों से शनिवार दोपहर 1 बजे जंतर-मंतर लौटने की अपील की है।
यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर उठ रहे सवालों की पृष्ठभूमि में हो रहा है। प्रदर्शनकारी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और मतदाता सूची में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर जवाब मांग रहे हैं।
शुक्रवार को 700 से ज्यादा लोग हिरासत में
अक्टूबर, गांधी जयंती के मौके पर दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। जंतर-मंतर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी और इलाके में बैरिकेडिंग की गई थी। विभिन्न विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने 700 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इनमें आम आदमी पार्टी के नेता, छात्र संगठनों के कार्यकर्ता और अन्य प्रदर्शनकारी शामिल थे।
हिरासत में लिए गए लोगों में AAP नेता और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी के अलावा सौरभ भारद्वाज, संजय सिंह तथा छात्र नेता भी शामिल थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग स्थानों से हटाकर बसों में बैठाया और विभिन्न थानों में ले जाया।
आज फिर जुटने की अपील
शुक्रवार की कार्रवाई के बाद आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया कि उनका विरोध समाप्त नहीं हुआ है। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने सोशल मीडिया पर शनिवार को फिर जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की।
इसके बाद शनिवार सुबह से ही जंतर-मंतर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह से ही बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और बसों के जरिए जवानों की आवाजाही देखी गई।
प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के साथ-साथ इलाके में यातायात और कानून-व्यवस्था भी बनाए रखी जाए।
CEC के खिलाफ प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
इस आंदोलन का प्रमुख मुद्दा SIR है। प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि ऐसी प्रक्रिया में पारदर्शिता और नागरिकों के मतदान के अधिकार की पर्याप्त सुरक्षा जरूरी है।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा है। CJP समेत कई समूहों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए SIR प्रक्रिया को रोकने या उसकी समीक्षा करने की मांग की है।
हालांकि, ये प्रदर्शनकारियों और विपक्षी समूहों के आरोप हैं। चुनाव आयोग की ओर से SIR को चुनावी मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसलिए आरोपों और आयोग के आधिकारिक रुख को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।
CJP भी आंदोलन को आगे बढ़ा रहा
इस विरोध अभियान में Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके भी सक्रिय हैं। मुंबई में 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में CJP ने प्रदर्शन किया था। वहां अभिनेता नसीरुद्दीन शाह समेत कुछ सार्वजनिक हस्तियों की मौजूदगी भी चर्चा में रही।
अभिजीत दिपके ने आंदोलन को देश के अन्य शहरों तक ले जाने की बात कही है। रिपोर्टों के मुताबिक, CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की भी घोषणा की है, यदि तब तक CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते।
इससे संकेत मिलता है कि आंदोलन केवल एक दिन के विरोध तक सीमित नहीं रहने वाला है।
2 अक्टूबर को क्या हुआ था?
गांधी जयंती पर जंतर-मंतर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे। प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के कारण पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, जंतर-मंतर की ओर बढ़ने वाले छोटे-छोटे समूहों को भी निगरानी में रखा गया और बड़े समूहों को हिरासत में लिया गया।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच इस बात को लेकर भी मतभेद रहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति क्यों नहीं दी गई। प्रदर्शनकारियों ने इसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार से जोड़ा, जबकि पुलिस की कार्रवाई कानून-व्यवस्था और अनुमति से संबंधित नियमों के आधार पर बताई गई।
राजनीतिक दलों की भागीदारी
दिल्ली के प्रदर्शन में AAP के साथ वामपंथी दलों, कांग्रेस से जुड़े युवा और छात्र संगठनों तथा विभिन्न छात्र समूहों के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और CEC के इस्तीफे की मांग की।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी शुक्रवार को प्रदर्शन का समर्थन करते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और SIR को लेकर सवाल उठाए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सरकार की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है। इसलिए मौजूदा विवाद में राजनीतिक दलों के दावों और आधिकारिक संस्थाओं के जवाबों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
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दिल्ली में बढ़ सकती है राजनीतिक हलचल
3 अक्टूबर का प्रदर्शन ऐसे समय हो रहा है जब SIR को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। दिल्ली के बाद मुंबई में भी विरोध प्रदर्शन हुआ और अब CJP तथा छात्र संगठनों की ओर से आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही जा रही है।
जंतर-मंतर पर शनिवार को कितनी संख्या में प्रदर्शनकारी पहुंचते हैं और पुलिस की क्या रणनीति रहती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोगों की हिरासत के बाद आज की स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल आंदोलन के दो प्रमुख केंद्र हैं—मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर पारदर्शिता की मांग और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग। वहीं चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसका आधिकारिक पक्ष इस विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है।
आने वाले दिनों में 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन और SIR से जुड़े अगले कदमों के साथ यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में और प्रमुख हो सकता है।

