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Buy Now Pay Later: आसान किस्तों के पीछे छिपे चार्ज और जोखिम, इस्तेमाल से पहले जान लें ये जरूरी बातें

Buy Now Pay Later यानी अभी खरीदो और बाद में चुकाओ, आज ऑनलाइन शॉपिंग का सबसे लोकप्रिय भुगतान विकल्प बन चुका है। चेकआउट पर एक क्लिक में बिना कार्ड के सामान मिल जाता है और पैसे अगले महीने या आसान किस्तों में चुकाने होते हैं।

सुनने में यह जितना आसान लगता है, असल में इसके पीछे कई चार्ज और जोखिम छिपे होते हैं, जिन्हें ज्यादातर लोग पढ़ते ही नहीं। त्योहारों की सेल से पहले Buy Now Pay Later को अच्छी तरह समझ लेना जरूरी है।

Buy Now Pay Later क्या है?

यह एक छोटा और तुरंत मिलने वाला क्रेडिट है। कई ई कॉमर्स वेबसाइट और फिनटेक ऐप ग्राहकों को एक तय खर्च सीमा देते हैं, जिससे वे बिना तुरंत पैसे चुकाए खरीदारी कर सकते हैं।

आमतौर पर यह सुविधा किसी बैंक या आरबीआई में रजिस्टर्ड एनबीएफसी के साथ मिलकर दी जाती है। यानी भले ही यह एक आसान पेमेंट बटन जैसा दिखे, असल में यह एक कर्ज ही है।

यह कैसे काम करता है?

Buy Now Pay Later में भुगतान के दो तरीके ज्यादा चलते हैं। पहले में पूरे महीने की खरीदारी का बिल अगले महीने की तय तारीख तक एक साथ चुकाना होता है।

दूसरे तरीके में रकम को तीन, छह या उससे ज्यादा महीनों की किस्तों में बांट दिया जाता है। कुछ समय तक ब्याज नहीं लगता, लेकिन उसके बाद या छोटी अवधि के प्लान में भी शुल्क जुड़ सकते हैं।

छिपे हुए चार्ज जिन पर ध्यान देना जरूरी है

Buy Now Pay Later की शर्तें पढ़ते समय इन तीन शुल्कों पर खास ध्यान दें।

लेट पेमेंट फीस

तय तारीख पर भुगतान न करने पर लेट फीस लगती है, जो रकम के हिसाब से बढ़ भी सकती है। कई बार इस पर जीएसटी भी अलग से जुड़ता है।

प्रोसेसिंग और सुविधा शुल्क

कुछ प्लेटफॉर्म किस्त बनाने या हर लेनदेन पर प्रोसेसिंग फीस या कन्वीनियंस फीस लेते हैं। छोटी रकम पर यह मामूली लगती है, लेकिन साल भर में काफी बड़ी हो जाती है।

ब्याज मुक्त अवधि के बाद ब्याज

ब्याज मुक्त अवधि खत्म होते ही बाकी रकम पर ब्याज शुरू हो सकता है। सालाना हिसाब से यह दर कई बार क्रेडिट कार्ड जितनी या उससे भी ज्यादा निकलती है।

आसान किस्तों के बड़े जोखिम

Buy Now Pay Later में सबसे बड़ा खतरा ज्यादा खर्च करने का है। पैसा तुरंत कटता हुआ नहीं दिखता, इसलिए लोग जरूरत से ज्यादा खरीदारी कर लेते हैं और महीने के अंत में बिल देखकर परेशान हो जाते हैं।

कई लोग एक साथ दो तीन ऐप पर यह सुविधा ले लेते हैं। अलग अलग तारीखों पर आने वाली किस्तें संभालना मुश्किल हो जाता है और कर्ज का बोझ बढ़ता चला जाता है।

चूंकि यह एक कर्ज है, इसलिए भुगतान में चूक होने पर आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है। इसका असर आगे होम लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड लेने पर पड़ता है।

आरबीआई के नियम क्या कहते हैं?

आरबीआई के डिजिटल लेंडिंग नियमों के तहत ऐसा कर्ज केवल बैंक या रजिस्टर्ड एनबीएफसी ही दे सकते हैं। कर्ज लेने से पहले ग्राहक को की फैक्ट स्टेटमेंट देना जरूरी है, जिसमें सालाना कुल लागत यानी एपीआर और सभी शुल्क साफ लिखे होने चाहिए।

किसी भी Buy Now Pay Later सेवा को चालू करने से पहले यह जरूर देखें कि उसके पीछे कौन सा बैंक या एनबीएफसी है और उसकी शर्तें क्या हैं।

इसे समझदारी से कैसे इस्तेमाल करें?

इसका इस्तेमाल सिर्फ जरूरी चीजों के लिए करें और उतना ही खर्च करें जितना अगले महीने आसानी से चुका सकें। एक समय में एक ही प्लेटफॉर्म रखें और हर बिल की तारीख फोन में रिमाइंडर के रूप में सेव कर लें।

ऑटो डेबिट चालू रखें ताकि भुगतान न छूटे, लेकिन खाते में उतना बैलेंस भी जरूर रखें। सही अनुशासन के साथ Buy Now Pay Later मददगार है, वरना यह चुपचाप कर्ज का जाल बन सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  1. क्या बाद में भुगतान वाली सुविधा से क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है?
    हां, Buy Now Pay Later की ज्यादातर सेवाएं कर्ज की तरह क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट की जाती हैं। समय पर भुगतान से स्कोर सुधर सकता है और चूक से खराब हो सकता है।
  2. क्या यह क्रेडिट कार्ड से बेहतर है?
    छोटी और कभी कभार की खरीदारी के लिए यह आसान है, लेकिन शुल्क और ब्याज के मामले में हर बार सस्ता नहीं होता। दोनों की शर्तें मिलाकर ही फैसला करें।
  3. सुविधा बंद कैसे करें?
    पूरा बकाया चुकाने के बाद ऐप की सेटिंग्स या कस्टमर केयर से खाता बंद करने का अनुरोध करें और नो ड्यूज की पुष्टि जरूर ले लें।
  4. किसी संदिग्ध लोन ऐप की शिकायत कहां करें?
    अवैध या बिना रजिस्ट्रेशन वाले लोन ऐप की शिकायत आरबीआई के सचेत पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर की जा सकती है।

आगे और समाचार पढ़े:

कर्ज और खर्च से जुड़ी ये जानकारियां भी पढ़ें: क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो कम करके सिबिल स्कोर कैसे सुधारें, सैलरी ओवरड्राफ्ट क्या है और कैसे काम करता है और कैश एनवेलप सिस्टम से फालतू खर्च पर लगाम।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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