यूपीआई (UPI) से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर है। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि MDR न तो सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स है, न सेस और न ही सरचार्ज। उनके मुताबिक, इस शुल्क से मिलने वाला पैसा केंद्र सरकार के खजाने में नहीं जाएगा और ग्राहकों पर इसका बोझ नहीं डाला जाएगा।
‘यह टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं’
वित्त मंत्री ने कहा कि UPI पर प्रस्तावित MDR को लेकर काफी गलतफहमी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई सरकारी कर नहीं है। MDR उस डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े सेवा प्रदाताओं के बीच शुल्क का हिस्सा है, जिनमें NPCI, पेमेंट एग्रीगेटर, सेवा प्रदाता, POS मशीन उपलब्ध कराने वाली संस्थाएं और मर्चेंट बैंक शामिल हैं।
सीतारमण के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR का भुगतान व्यापारी पक्ष करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस राशि का संग्रह भारत सरकार के Consolidated Fund में नहीं जाएगा। इसलिए इसे सरकार की ओर से लगाया गया नया टैक्स बताना सही नहीं होगा।
₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा MDR
नए फ्रेमवर्क में सभी UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की बात नहीं है। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट इस MDR व्यवस्था से बाहर रहेंगे। इसके अलावा छोटे व्यापारियों के लिए लागू जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन भी मुफ्त रहेंगे।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, लगभग 96% Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे। वहीं Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांसफर पर राशि कितनी भी हो, UPI मुफ्त रहेगा।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR ढांचा
NPCI की ओर से जारी व्यवस्था के अनुसार, पात्र ₹2,000 से अधिक के P2M UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन तय की गई है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई पात्र ग्राहक किसी व्यापारी को ₹10,000 का भुगतान करता है तो 0.4% के हिसाब से MDR ₹40 होगा। हालांकि, यह राशि ग्राहक के बिल में अलग से जोड़ने का प्रावधान नहीं है। वित्त मंत्री ने कहा है कि ग्राहक से MDR वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
ग्राहक के बिल पर नहीं दिखेगा अतिरिक्त चार्ज
सीतारमण ने UPI की तुलना कार्ड पेमेंट से करते हुए कहा कि व्यापारी पहले से ही Visa, Mastercard या अन्य कार्ड नेटवर्क के जरिए भुगतान स्वीकार करते हैं, जहां MDR जैसी लागत मौजूद होती है। आम तौर पर यह शुल्क ग्राहक के बिल में अलग से नहीं जोड़ा जाता।
उन्होंने इसी आधार पर कहा कि UPI MDR का खर्च भी ग्राहक पर नहीं डाला जाना चाहिए। वित्त मंत्रालय इस संदेश को बैंकों और व्यापारिक संगठनों तक पहुंचाने के लिए उनसे बातचीत भी कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, मंत्रालय Indian Banks’ Association (IBA) से भी इस व्यवस्था के क्रियान्वयन पर चर्चा करेगा।
व्यापारी संगठनों की चिंता बरकरार
सरकार की सफाई के बावजूद कुछ व्यापारी संगठनों ने MDR को लेकर चिंता जताई है। Chamber of Trade and Industry (CTI) ने सरकार से ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर प्रस्तावित MDR को वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि बड़े डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगने से व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है और कुछ कारोबारी बड़े लेनदेन के लिए UPI का इस्तेमाल कम करने पर विचार कर सकते हैं।
इस तरह इस मुद्दे पर सरकार और व्यापारियों की चिंता अलग-अलग है। सरकार का कहना है कि MDR ग्राहक पर नहीं डाला जाएगा, जबकि व्यापारी संगठन इसके कारोबारी प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
UPI इकोसिस्टम को टिकाऊ बनाने की दलील
सरकारी पक्ष के अनुसार MDR व्यवस्था का एक उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की लंबी अवधि की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है। भुगतान प्रणाली में बैंक, पेमेंट ऐप, एग्रीगेटर और अन्य तकनीकी संस्थाएं लगातार बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और डिजिटल क्षमता पर खर्च करती हैं।
NPCI के प्रबंध निदेशक और CEO दिलीप असबे ने भी कहा है कि UPI में निवेश बढ़ाने के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की जरूरत है। उनके अनुसार MDR का बड़ा हिस्सा बड़े कारोबारियों से आने की उम्मीद है।
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GST को लेकर अलग सवाल अभी खुला
MDR को लेकर एक अलग सवाल यह है कि क्या MDR राशि पर GST लागू होगा? इस पर अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मुद्दे पर GST Council के स्तर पर विचार हो सकता है। हालांकि, अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक के एजेंडे में फिलहाल किसी GST दर परिवर्तन का औपचारिक प्रस्ताव नहीं बताया गया है।
कुल मिलाकर, UPI बंद नहीं हो रहा और न ही आम ग्राहकों के लिए हर भुगतान पर शुल्क लगाया जा रहा है। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और सभी P2P लेनदेन मुफ्त रहेंगे। ₹2,000 से ऊपर के कुछ पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR की व्यवस्था लागू होगी, लेकिन सरकार का कहना है कि इसका खर्च ग्राहक के बिल में नहीं जोड़ा जाएगा।

