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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, SIR में गड़बड़ी पर SIT जांच की मांग

चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में SIR से जुड़े कथित फैसलों और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जांच के लिए Special Investigation Team (SIT) गठित करने की मांग की गई है। साथ ही, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।

यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की है। इसमें CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और चुनाव आयोग की IT प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।

याचिका में क्या-क्या मांग की गई?SIR

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि उन सभी फैसलों, दिशानिर्देशों, आदेशों और सॉफ्टवेयर बदलावों की वैधता की जांच की जाए, जो कथित तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा पूरे आयोग की सहमति के बिना शुरू, मंजूर या लागू किए गए।

याचिकाकर्ता ने ऐसे फैसलों को असंवैधानिक, अधिकार क्षेत्र से बाहर और शुरू से ही शून्य घोषित करने की मांग की है। याचिका में चुनाव आयोग के कामकाज से संबंधित Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 की धारा 18 का भी हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद हो तो कानून के अनुसार बहुमत की राय महत्वपूर्ण होती है।

13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने का दावा

याचिका में SIR के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए जाने की जांच के लिए SIT या न्यायिक जांच आयोग गठित करने की मांग भी की गई है।

यह संख्या याचिकाकर्ता द्वारा किए गए दावे का हिस्सा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस आंकड़े या आरोप को सही ठहरा दिया है। अदालत में दायर याचिका में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक जांच और सत्यापन अभी बाकी है।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 के मूल वैधानिक प्रारूप को बहाल किया जाए, ताकि पात्र नागरिक निर्धारित कानूनी शर्तों के आधार पर मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकें।

14 आपत्तियों वाली रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

यह याचिका ऐसे समय दाखिल हुई है जब SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई है।  रिपोर्ट का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं।

इनमें Form 6 में बदलाव, मतदाता सूची के डेटा के प्रबंधन और मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने या बहाल करने से संबंधित मुद्दे शामिल बताए गए हैं। याचिका में इन्हीं रिपोर्टों को आधार बनाकर आयोग के कुछ फैसलों की वैधता पर सवाल उठाया गया है।

SIR पर चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने इन आरोपों को लेकर अलग तस्वीर पेश की है। आयोग का कहना है कि SIR सहित महत्वपूर्ण फैसले सभी तीन चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि लिखित टिप्पणियां, सवाल, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच किसी बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं।

25 सितंबर को सामने आई आयोग की जानकारी के अनुसार SIR से संबंधित विभिन्न आदेशों में Form 6 और Form 8 तथा नागरिकता से संबंधित घोषणा जैसे प्रावधानों को CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी।

इसलिए फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोप और चुनाव आयोग की स्थिति एक-दूसरे से अलग हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान इन दावों और संबंधित दस्तावेजों की न्यायिक जांच महत्वपूर्ण होगी।

SIR को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट में उठे सवाल

SIR की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से भी मामले सामने आते रहे हैं। दिल्ली में SIR के तहत मतदाताओं को भेजे गए नोटिसों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नोटिसों की भाषा और प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा था।

हालांकि, अलग-अलग राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया और इस नई याचिका के आरोपों को एक ही निष्कर्ष के रूप में देखना उचित नहीं होगा। प्रत्येक मामले में संबंधित रिकॉर्ड, प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों की अलग-अलग जांच आवश्यक होगी।

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अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल इस याचिका में कई व्यापक राहतों की मांग की गई है—आरोपित फैसलों को रद्द करने से लेकर कथित मतदाता विलोपन की SIT जांच और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई तक।

फिलहाल यह मामला याचिका के स्तर पर है और इसमें लगाए गए आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर SIR से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। ऐसे में आगे सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है और क्या जांच या अन्य निर्देश जारी करता है, यह महत्वपूर्ण होगा।

SIR को लेकर चल रही बहस में यह घटनाक्रम चुनावी मतदाता सूची, आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़े सवालों को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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