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पंजाब में GMADA मुख्यालय पर ED की रेड क्यों? तीन दिन से जांच, 100 से ज्यादा अधिकारी जुटे; जानें पूरी टाइमलाइन

पंजाब के मोहाली स्थित ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के मुख्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तीसरे दिन भी जारी है। 22 सितंबर से शुरू हुई यह जांच अब सिर्फ एक प्रोजेक्ट या एक कंपनी तक सीमित नहीं रह गई है। ED की पड़ताल में चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU), जमीन अधिग्रहण, प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन, निजी बिल्डरों को कथित लाभ और सरकारी राजस्व को हुए संभावित नुकसान से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक GMADA मुख्यालय में ED और केंद्रीय सुरक्षा बलों के 100 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी मौजूद हैं। जांच लंबी खिंचने के कारण अधिकारियों और जांच टीम के लिए कार्यालय परिसर में ही रहने और खाने की व्यवस्था तक करनी पड़ी।

ED की रेड की मुख्य वजह क्या है?पंजाब

ED की मौजूदा कार्रवाई का संबंध दिल्ली की रियल एस्टेट कंपनी Tirupati Infraprojects Pvt Ltd और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच से बताया जा रहा है। एजेंसी GMADA और पंजाब सरकार के हाउसिंग एवं अर्बन डेवलपमेंट विभाग से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।

जांचकर्ताओं की नजर इस बात पर है कि क्या जमीन अधिग्रहण और उसके इस्तेमाल में बदलाव की प्रक्रियाओं के दौरान किसी निजी कंपनी या बिल्डर को नियमों से हटकर आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। रिपोर्टों के अनुसार संभावित सरकारी नुकसान और कथित अनुचित लाभ का आंकड़ा 100 करोड़ रुपये से अधिक होने के एंगल से भी जांच की जा रही है।

हालांकि, ED ने अब तक तलाशी से मिले सभी दस्तावेजों या संभावित निष्कर्षों को सार्वजनिक रूप से विस्तार से जारी नहीं किया है। इसलिए जांच में सामने आए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

Suntec City से शुरू हुई जांच कैसे बढ़ी?

मामले की शुरुआती कड़ी मुल्लांपुर के Suntec City प्रोजेक्ट से जुड़े CLU मामले से सामने आई। इसके बाद ED ने बिल्डरों, अधिकारियों और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की।

7 मई को मोहाली और चंडीगढ़ में कई ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी। इसके बाद 17 मई को GMADA के तत्कालीन चीफ एडमिनिस्ट्रेटर से न्यू चंडीगढ़, इको सिटी-3 और मुल्लांपुर से संबंधित CLU रिकॉर्ड मांगे गए। धीरे-धीरे जांच का दायरा एक प्रोजेक्ट से बढ़कर GMADA की CLU व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों के फैसलों तक पहुंच गया।

पिछले पांच साल की 50 से ज्यादा CLU फाइलें जांच के दायरे में

ED अब GMADA में पिछले करीब पांच वर्षों के दौरान जारी 50 से अधिक CLU मामलों की जांच कर रही है। इनमें जमीन के उपयोग में बदलाव, लेआउट में परिवर्तन, जमीन अधिग्रहण और फाइलों की आवाजाही जैसे पहलुओं को देखा जा रहा है।

इसके अलावा कुछ मामलों में अधिकारियों के कार्यकाल और उस दौरान लिए गए फैसलों की भी पड़ताल की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार 5,000 एकड़ से अधिक जमीन से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं, जिनमें मोहाली और न्यू चंडीगढ़ क्षेत्र की जमीन शामिल है।

22 सितंबर: GMADA मुख्यालय पहुंची ED

22 सितंबर को ED की टीम CRPF जवानों के साथ GMADA मुख्यालय पहुंची। कार्रवाई के दौरान इमारत की कम से कम तीन मंजिलों को सील किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल फोन तथा कार्यालय के कंप्यूटरों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई। CCTV फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बने।

ED ने GMADA के वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की और जमीन अधिग्रहण, CLU तथा निजी डेवलपर्स से संबंधित फाइलें खंगालीं।

23 सितंबर: कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी

दूसरे दिन जांच का दायरा और बढ़ा। रिपोर्टों के मुताबिक 100 से ज्यादा ED और केंद्रीय बलों के कर्मचारी परिसर में मौजूद रहे। कई संबंधित अधिकारी भी कार्यालय में ही रहे। कार्रवाई रात तक चलने के कारण उनके लिए गद्दे और भोजन की व्यवस्था की गई।

इसी दौरान ED ने पंजाब के हाउसिंग एवं अर्बन डेवलपमेंट विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी विकास गर्ग से जुड़े परिसर और कुछ अन्य स्थानों पर भी कार्रवाई की।

24 सितंबर: तीसरे दिन भी जारी है जांच

24 सितंबर को भी GMADA मुख्यालय में ED की कार्रवाई जारी रही। रिपोर्टों के मुताबिक अब जांचकर्ताओं का फोकस पिछले वर्षों की CLU फाइलों, अधिकारियों के फैसलों और जमीन से जुड़े वित्तीय लेनदेन पर है। इसी क्रम में पूर्व GMADA चीफ एडमिनिस्ट्रेटर राजीव गुप्ता के चंडीगढ़ स्थित आवास की तलाशी की खबर भी सामने आई है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

ED की कार्रवाई के बाद पंजाब में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। पार्टी ने कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, ED की जांच का आधिकारिक आधार मनी लॉन्ड्रिंग और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच है। दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना जरूरी है।

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अब आगे क्या?

ED की जांच अभी जारी है। एजेंसी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और पूछताछ से आगे की कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि जांच एक बिल्डर या एक प्रोजेक्ट से बढ़कर GMADA की जमीन, CLU और डेवलपमेंट से जुड़ी व्यापक प्रक्रियाओं तक पहुंच चुकी है।

चार्जशीट या अदालत में आरोप तय होने से पहले जांच में सामने आए किसी भी आरोप को दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता। संबंधित अधिकारियों और कंपनियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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