अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले में जांच कर रही सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने करीब 70 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में आठ गिरफ्तार आरोपियों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, मंदिर परिसर में दान की नकदी की गिनती के दौरान उसे कथित तौर पर हटाने या छिपाने के 105 मामले सामने आए हैं। हालांकि, बैंक तक पैसा पहुंचाने की प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की हेराफेरी के सबूत नहीं मिले हैं।
आठ आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
SIT ने अयोध्या की अतिरिक्त जिला जज (भ्रष्टाचार) अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इसमें राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, रामाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं।
आरोपियों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात समेत भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत धाराएं लगाई गई हैं। चार्जशीट पहली गिरफ्तारी के 90 दिनों की वैधानिक अवधि के भीतर दाखिल की गई है। जांच में आरोपियों से कथित रूप से जुड़ी 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद होने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार यह रकम सुभाष श्रीवास्तव को छोड़कर अन्य आरोपियों से बरामद की गई।
अयोध्या राम मंदिर में कहां हुई कथित गड़बड़ी?
SIT की जांच का एक प्रमुख निष्कर्ष यह है कि कथित गड़बड़ी दान राशि को बैंक तक पहुंचाने के दौरान नहीं, बल्कि कैश काउंटिंग के चरण में हुई। जांचकर्ताओं ने मंदिर परिसर में स्थित काउंटिंग सेंटर की CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया।
जांच में नकदी को कथित तौर पर निकालने या छिपाने के 105 मामलों की पहचान की गई। SIT ने दान पेटियों और काउंटरों से लेकर बैंक खातों में जमा होने तक रकम के प्रवाह को ट्रैक किया। इसके साथ ही आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों, वाहनों, आभूषणों और अन्य परिसंपत्तियों की भी जांच की गई, ताकि कथित धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल का पता लगाया जा सके।
70 हजार पन्नों में क्या-क्या शामिल है?
इतनी बड़ी चार्जशीट में सिर्फ आरोपों का विवरण नहीं, बल्कि जांच के दौरान जुटाए गए व्यापक दस्तावेज और साक्ष्य शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 100 से ज्यादा केस डायरी, करीब 190 गवाहों के बयान, बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्तियों का विवरण, एसेट ट्रेल और फॉरेंसिक ऑडिट के निष्कर्ष शामिल हैं।
SIT ने मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों, बैंक और अकाउंटिंग कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों, CCTV ऑपरेटरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट और मंदिर संचालन से जुड़े अन्य लोगों के बयान भी दर्ज किए। जांच में मोबाइल फोन डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, तलाशी और जब्ती से जुड़े दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया गया।
दान में मिले कीमती सामान की भी हुई जांच
जांच केवल नकदी तक सीमित नहीं रही। SIT ने मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज 803 मूल्यवान दान वस्तुओं का भौतिक सत्यापन किया और इनमें कोई विसंगति नहीं मिलने की बात कही है। इसके अलावा बिना रसीद वाली 86 मूल्यवान वस्तुओं की भी जांच की गई।
जांच में चांदी के दान को भी शामिल किया गया। इसमें करीब 200 किलोग्राम चांदी की ईंटें, 38.288 किलोग्राम की एक खेप, चांदी की माला, चरण पादुका और रामचरितमानस की प्रति जैसे सामान की जांच की गई। करीब 944.411 किलोग्राम चांदी, जिसे पिघलाने के लिए भेजा गया था, उसका भी सत्यापन किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई जांच
राम मंदिर दान मामले में SIT का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद किया गया था। जांच टीम का नेतृत्व लखनऊ रेंज के IG किरण एस कर रहे हैं। टीम में फैजाबाद रेंज के DIG सोमेंन बरमा और अयोध्या के SSP गौरव ग्रोवर भी शामिल हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को पहले ही जांच की प्रगति की जानकारी दी जा चुकी है। अदालत ने चार्जशीट दाखिल होने के बाद उसकी एक प्रति उपलब्ध कराने को कहा है और मामले पर आगे सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तारीख तय की गई है।
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आगे क्या होगा?
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंचेगा। SIT द्वारा लगाए गए आरोपों और जुटाए गए साक्ष्यों की अदालत में जांच होगी। चार्जशीट में लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं। आरोपियों को अदालत में अपना पक्ष रखने और कानूनी प्रक्रिया के तहत बचाव का पूरा अधिकार रहेगा।

