अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम में कथित गड़बड़ी की जांच में बड़ा अपडेट सामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान बिना अनुमति नकदी हटाने या छिपाने की 105 घटनाओं की पहचान हुई है। ये घटनाएं मंदिर के पिलग्रिम फैसिलिटी सेंटर (PFC) में स्थित काउंटिंग रूम से जुड़ी बताई गई हैं। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी SIT अब अपनी चार्जशीट 25 सितंबर तक दाखिल करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच की प्रगति की जानकारी दी। अदालत ने SIT की स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन किया है। रिपोर्ट में CCTV फुटेज के अलावा गवाहों के बयान और अन्य डिजिटल एवं वित्तीय रिकॉर्ड की जांच का भी उल्लेख किया गया है।
अयोध्या राम मंदिर CCTV में 105 घटनाओं का दावा
SIT की 16 सितंबर की स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर के काउंटिंग रूम से जुड़ी CCTV रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल डेटा की जांच में 105 ऐसे मामले सामने आए जिनमें कथित तौर पर नकदी को बिना अनुमति हटाया या छिपाया गया।
यह संख्या पहले सामने आई 70 कथित घटनाओं से अधिक है। शुरुआती जांच में 70 मामलों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन आगे की जांच में CCTV फुटेज, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद संख्या बढ़कर 105 बताई गई।
हालांकि, इन सभी घटनाओं को अदालत में साबित हो चुका अपराध नहीं माना जा सकता। SIT की रिपोर्ट जांच के दौरान सामने आए कथित मामलों और उपलब्ध साक्ष्यों को दर्ज करती है। अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।
अयोध्या राम मंदिर मामले में आठ आरोपियों की पहचान
सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार जांच टीम ने मामले में आठ आरोपियों की पहचान की है। रिपोर्ट में आरोपियों के बैंक खातों में जमा रकम और उनकी चल-अचल संपत्तियों से संबंधित जानकारी का भी विश्लेषण किए जाने की बात कही गई है।
SIT ने कथित रूप से संदिग्ध रकम और आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों के बीच संबंधों की जांच की है। जांचकर्ताओं ने CCTV फुटेज के साथ-साथ अन्य रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयानों को भी साक्ष्य के तौर पर देखा है।
अयोध्या राम मंदिर में दान और कीमती वस्तुओं की जांच भी हुई
इस मामले में सिर्फ नकदी ही नहीं, बल्कि मंदिर को दान में मिली कीमती वस्तुओं को लेकर उठे सवालों की भी जांच की गई। SIT ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 200 किलोग्राम चांदी की ईंटें, 38.288 किलोग्राम चांदी की ईंटें, चांदी की माला, चरण पादुका और रामचरितमानस से संबंधित दान के रिकॉर्ड की जांच की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक इन कीमती वस्तुओं की हैंडलिंग और रिकॉर्ड में कोई विसंगति नहीं मिली। यानी इन विशेष दानों को लेकर जांच में ऐसी अनियमितता सामने नहीं आई, जैसी नकदी से जुड़े कथित मामलों में बताई गई है।
25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा
मामले में चार्जशीट दाखिल करने की तारीख भी महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की वैधानिक अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही है। इसी वजह से SIT ने अदालत को बताया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और चार्जशीट निर्धारित समय सीमा के भीतर दाखिल की जाएगी।
कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच एजेंसी द्वारा निर्धारित अवधि में चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने पर कुछ परिस्थितियों में आरोपी वैधानिक जमानत के अधिकार का दावा कर सकते हैं। यही कारण है कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा महत्वपूर्ण बन गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने SIT रिपोर्ट की कॉपी देने से किया इनकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से SIT की रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रिपोर्ट की कॉपी देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर वह मामले को संबंधित सत्र अदालत की प्रक्रिया से अपने हाथ में नहीं लेना चाहती।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर आगे जांच की आवश्यकता महसूस हुई तो वह उचित निर्देश जारी कर सकती है। फिलहाल अदालत ने SIT की रिपोर्ट और जांच की प्रगति को रिकॉर्ड पर लिया है।
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अयोध्या राम मंदिर मामला कैसे सामने आया?
राम मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हुई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने जून में SIT का गठन किया था। टीम की अगुवाई लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने की थी। बाद में जांच की प्रगति को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अदालत ने स्थिति रिपोर्ट पर जानकारी ली।
अब जांच का अगला बड़ा पड़ाव 25 सितंबर है, जब SIT को चार्जशीट दाखिल करनी है। इसके बाद अदालत के सामने यह स्पष्ट होगा कि जांच एजेंसी ने किन आरोपों और किन साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
फिलहाल CCTV में सामने आई 105 कथित घटनाओं ने मंदिर में दान और नकदी प्रबंधन की व्यवस्था पर सवालों को जरूर गंभीर बना दिया है। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।

