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PM Modi ने मुझे भरोसा दिया’: ओपी राजभर के दावे से फिर गरमाई UP के बंटवारे की चर्चा

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के एक बयान ने राज्य के पुनर्गठन और उसे चार हिस्सों में बांटने की पुरानी मांग को फिर चर्चा में ला दिया है। राजभर ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी इस मुद्दे पर बातचीत हुई थी और उन्हें भरोसा दिया गया कि जातीय जनगणना के बाद उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। 

राजभर ने यह बात रविवार को देवरिया में आयोजित SBSP के एक कार्यक्रम में कही। उनके बयान के मुताबिक, उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने 27 फीसदी आरक्षण से जुड़े मुद्दे को उठाया था। राजभर ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि उनकी बात उचित है, लेकिन कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। राजभर के अनुसार, जब उन्होंने आगे बढ़ने का रास्ता पूछा तो उन्हें जातियों की गणना के बाद इस दिशा में कठिनाई नहीं होने की बात कही गई। 

ओपी राजभर ने क्या दावा किया?ओपी

ओपी राजभर के अनुसार, प्रधानमंत्री के साथ हुई कथित बातचीत में उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की बात सामने आई। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर भविष्य में पूर्वांचल अलग राज्य बनता है, तो वहां मुख्यमंत्री पद पर राजभर समुदाय के व्यक्ति के पहुंचने की संभावना होगी।

हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इस कथित बातचीत की स्वतंत्र रूप से पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए राजभर के बयान को फिलहाल उनके द्वारा किया गया राजनीतिक दावा ही माना जा रहा है।

राजभर लंबे समय से उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन की मांग करते रहे हैं। उन्होंने 2018 में भी कहा था कि राज्य का विकास चार हिस्सों में बंटने के बाद अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। 

संजय निषाद ने ओपी राजभर के दावे पर जताई असहमति

राजभर के बयान पर बीजेपी के सहयोगी दल निषाद पार्टी के प्रमुख और यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने अलग रुख सामने रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, निषाद ने राजभर के बयान को भ्रामक बताया और कहा कि निषाद पार्टी राज्य के पुनर्गठन के पक्ष में नहीं है।

संजय निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश के जिन क्षेत्रों को अतिरिक्त विकास की जरूरत रही है, उनके लिए विशेष विकास फंड उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने बुंदेलखंड और पूर्वांचल का उदाहरण देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में विकास को लेकर सरकार की ओर से अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं। 

इस तरह एक ही गठबंधन से जुड़े नेताओं के बयानों में उत्तर प्रदेश के विभाजन के मुद्दे पर अलग-अलग रुख सामने आया है।

मायावती के कार्यकाल में भी उठी थी मांग

उत्तर प्रदेश को छोटे राज्यों में बांटने की मांग नई नहीं है। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख और तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने भी अपने कार्यकाल के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।

2011 में मायावती सरकार ने केंद्र सरकार को उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों—अवध प्रदेश, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिम प्रदेश—में विभाजित करने का प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा ने राज्य के पुनर्गठन से संबंधित प्रस्ताव भी पारित किया था। इससे पहले 2008 में मायावती ने राज्य को तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव रखा था। 

अलग-अलग समय पर राष्ट्रीय लोक दल और कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से भी उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग का समर्थन किया गया है। बुंदेलखंड को लेकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों को मिलाकर अलग राज्य बनाने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है।

उत्तर प्रदेश का आखिरी विभाजन कब हुआ था?

उत्तर प्रदेश का आखिरी बड़ा पुनर्गठन वर्ष 2000 में हुआ था। उस समय केंद्र की तत्कालीन बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार ने उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों को अलग करके उत्तरांचल राज्य बनाया, जिसे बाद में उत्तराखंड नाम दिया गया।

इसके बाद उत्तर प्रदेश को दोबारा विभाजित करने की मांग कई बार राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी, लेकिन राज्य का कोई नया विभाजन नहीं हुआ।

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2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है मुद्दा?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने हैं। ऐसे समय में राजभर का बयान राज्य की क्षेत्रीय राजनीति और सामाजिक समीकरणों से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा में ले आया है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य के पुनर्गठन को लेकर केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार की कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई है।

उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। राज्य में 403 विधानसभा सीटें और लोकसभा की 80 सीटें हैं। इसके आकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के कारण राज्य के पुनर्गठन का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। 

फिलहाल, ओपी राजभर के दावे के बाद उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की पुरानी बहस फिर सामने आ गई है, लेकिन प्रधानमंत्री की कथित टिप्पणी की स्वतंत्र पुष्टि और राज्य के पुनर्गठन को लेकर किसी औपचारिक सरकारी प्रस्ताव की जानकारी सामने नहीं आई है।

 

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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