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नंदीग्राम उपचुनाव: शुभेंदु अधिकारी की मुलाकात से नंदीग्राम उम्मीदवार ने नाम वापस लिया -ममता खेमे को झटका, 24 घंटे में कैसे बदली पूरी बाजी

पश्चिम बंगाल का नंदीग्राम उपचुनाव नामांकन वापसी की आखिरी तारीख से ठीक पहले अचानक बेहद दिलचस्प हो गया। ममता बनर्जी के खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद मिलन प्रधान की 2007 के एक पुराने मामले में गिरफ्तारी ने चुनावी समीकरण को फिर बदल दिया। महज 24 घंटे के भीतर घटनाक्रम ने कई मोड़ ले लिए।

शुरुआत हुई शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात सेनंदीग्राम

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत शुक्रवार को हुई। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की नंदीग्राम उम्मीदवार संचिता प्रधान डे अपने पति के साथ राज्य सचिवालय नबन्ना पहुंचीं और उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने अचानक चुनाव मैदान से हटने का फैसला किया और अपना नामांकन वापस ले लिया।

इस फैसले के पीछे क्या बातचीत हुई, यह संचिता प्रधान डे ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है। इसलिए मुलाकात और नामांकन वापसी के बीच संबंध को लेकर कई तरह की राजनीतिक अटकलें जरूर शुरू हुईं, लेकिन इसके पीछे किसी निश्चित कारण की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।

ममता खेमे के सामने तुरंत बदली चुनौती

संचिता के हटने के बाद ममता बनर्जी के गुट के सामने नंदीग्राम में उम्मीदवार का सवाल खड़ा हो गया। चुनावी प्रक्रिया में नामांकन वापस लेने की समयसीमा बेहद नजदीक थी। ऐसे में ममता बनर्जी ने तेजी से फैसला लेते हुए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की।

इस कदम से नंदीग्राम में विपक्षी तालमेल का एक नया समीकरण सामने आया। हालांकि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में रिश्ते हमेशा एक जैसे नहीं रहे हैं, लेकिन इस उपचुनाव में ममता खेमे के उम्मीदवार के हटने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला तत्काल राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया।

फिर कुछ घंटों में आया दूसरा बड़ा मोड़

ममता बनर्जी के समर्थन की घोषणा के कुछ ही समय बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े पुराने आपराधिक मामलों में वारंट लंबित थे। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, उन पर पुराने मामलों में हत्या सहित कई धाराओं के तहत मामले दर्ज थे।

गिरफ्तारी के समय मिलन प्रधान चुनाव प्रचार कर रहे थे। इस घटनाक्रम ने पहले से ही तनावपूर्ण नंदीग्राम उपचुनाव को और ज्यादा चर्चा में ला दिया।

कांग्रेस ने लगाए राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस और ममता बनर्जी के खेमे की ओर से सवाल उठाए गए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी का समय राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और इसे चुनावी प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। राहुल गांधी ने भी गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया और भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया।

हालांकि, इन आरोपों के साथ दूसरी तरफ से अलग दलील भी सामने आई। डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस से जुड़े रितब्रत बनर्जी ने कहा कि मिलन प्रधान के खिलाफ पुराने मामले और वारंट मौजूद थे तथा पुलिस कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई। उन्होंने दावा किया कि उनके गुट की शिकायत भी इस मामले से जुड़ी थी।

इस तरह गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक आरोप और कानूनी पक्ष दोनों अलग-अलग तरीके से सामने आए हैं।

नंदीग्राम पहले से ही हाई-प्रोफाइल सीट

नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व नया नहीं है। यह वही विधानसभा क्षेत्र है जहां ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच पहले भी सीधा राजनीतिक मुकाबला हो चुका है। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़ दी, जिसके कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी। आगामी उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है।

इस बार मुकाबले में भाजपा, कांग्रेस, वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस से जुड़े अलग-अलग गुटों की मौजूदगी ने चुनाव को और जटिल बना दिया है। भाजपा ने नंदीग्राम से हसिरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है, जबकि तृणमूल के दो गुटों के बीच भी अलग-अलग राजनीतिक पहचान को लेकर संघर्ष चल रहा है।

TMC के नाम और चुनाव चिह्न का विवाद भी जुड़ा

नंदीग्राम का यह पूरा घटनाक्रम उस समय हो रहा है जब तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के बीच विवाद के चलते मूल TMC नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दिया है। ममता बनर्जी के गुट को नया नाम और नया चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। ममता बनर्जी ने आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

इसका सीधा असर उपचुनाव की जमीन पर दिखाई दे रहा है, क्योंकि उम्मीदवारों को नई राजनीतिक पहचान और चुनाव चिह्न के साथ मतदाताओं तक पहुंचना पड़ रहा है।

24 घंटे में बदली पूरी तस्वीर

नंदीग्राम में शुक्रवार से शनिवार तक घटनाक्रम तेजी से बदला। पहले ममता खेमे की उम्मीदवार ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की और नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया। फिर कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी ने एक बार फिर राजनीतिक समीकरणों को उलट दिया।

अब नंदीग्राम उपचुनाव केवल उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं रह गया है। इसमें TMC के भीतर का संगठनात्मक विवाद, चुनाव आयोग का फैसला, भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तथा पुराने कानूनी मामलों से जुड़े सवाल भी शामिल हो गए हैं।

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आगे क्या होगा?

नंदीग्राम में मतदान 6 अक्टूबर को प्रस्तावित है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की अंतिम स्थिति, चुनाव प्रचार और अदालतों में चल रही कानूनी प्रक्रियाएं चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। फिलहाल इतना साफ है कि एक ही दिन में हुए कई घटनाक्रमों ने नंदीग्राम के चुनाव को और अधिक बहुकोणीय बना दिया है।

हालांकि, संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के पीछे वास्तविक कारण और शुभेंदु अधिकारी के साथ उनकी मुलाकात में क्या चर्चा हुई, इस पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए इस हिस्से में सामने आई राजनीतिक अटकलों और पुष्ट तथ्यों को अलग-अलग रखना महत्वपूर्ण होगा।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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