दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में छह साल बाद जांच ने नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 14 सितंबर 2026 को इस मामले में औपचारिक रूप से FIR दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली है। FIR में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे, अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, अभिनेता डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई लोगों के नामों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, केवल FIR में नाम दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति दोषी हैं या उनके खिलाफ आरोप साबित हो चुके हैं। मामले में उनकी भूमिका की जांच की जानी है।
यह घटनाक्रम बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद सामने आया है, जिसमें अदालत ने दिशा सालियान की 8 जून 2020 को हुई मौत की नए सिरे से जांच के लिए CBI को निर्देश दिया था। अदालत ने साथ ही स्पष्ट किया था कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
2020 की मौत, छह साल बाद फिर खुली जांच
दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने मामले को Accidental Death Report (ADR) के रूप में दर्ज किया था। घटना के केवल छह दिन बाद 14 जून को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
दोनों घटनाओं के बीच कम अंतराल होने के कारण दिशा सालियान की मौत को लेकर कई तरह के सवाल और अटकलें सामने आईं। हालांकि, लंबे समय तक मुंबई पुलिस की जांच में हत्या या किसी आपराधिक साजिश की पुष्टि नहीं हुई थी। अब बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद CBI इस पूरे मामले को नए सिरे से देख रही है।
FIR में किन-किन नामों का उल्लेख?
ताजा रिपोर्टों के अनुसार CBI की FIR में आदित्य ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई लोगों की भूमिका की जांच की जानी है। इसके अलावा पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह, पुलिस अधिकारी सचिन वाझे, पूर्व पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के नामों का भी उल्लेख किया गया है।
CBI का उद्देश्य फिलहाल यह पता लगाना है कि दिशा की मौत की परिस्थितियां वास्तव में क्या थीं, घटना से पहले और बाद में कौन-कौन लोग संपर्क में थे और क्या मामले की शुरुआती जांच में कोई तथ्य छूट गया था।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि FIR में नाम आने और अपराध साबित होने के बीच बड़ा कानूनी अंतर है। जांच एजेंसी को आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र सबूत जुटाने होंगे और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
दिशा के पिता की शिकायत के बाद बढ़ा दबाव
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान लंबे समय से अपनी बेटी की मौत की जांच दोबारा कराने की मांग कर रहे थे। हाल के दिनों में उन्होंने CBI के समक्ष अपना बयान भी दर्ज कराया और कई लोगों के नामों का उल्लेख किया। उनके वकील ने दावा किया है कि दिशा की मौत को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य और डिजिटल सबूत सामने आने बाकी हैं।
दिशा के पिता ने पहले भी कुछ प्रमुख व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की थी। उनके आरोपों के बाद मामले ने राजनीतिक और फिल्मी दुनिया दोनों में फिर से चर्चा पैदा कर दी।हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को भी जांच के दौरान सबूतों की कसौटी पर परखा जाएगा। CBI के सामने चुनौती यही होगी कि दावों और अटकलों से अलग ठोस तथ्य जुटाए जाएं।
हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश क्यों दिया?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में मामले की सुनवाई के दौरान मुंबई पुलिस की अब तक की जांच को लेकर सवाल उठाए थे। अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि घटना के छह साल बाद तक मामले में नियमित FIR क्यों नहीं दर्ज की गई और परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों तक पहुंच क्यों नहीं मिली। इसके बाद अदालत ने CBI को मामले की जांच करने का निर्देश दिया।
अदालत ने जांच के लिए CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति का भी निर्देश दिया। साथ ही यह महत्वपूर्ण सुरक्षा दी गई कि किसी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर आरोपी नहीं माना जाए।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत से फिर जुड़ी चर्चा
दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बीच महज छह दिन का अंतर होने के कारण दोनों मामले लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा में जुड़े रहे हैं। सुशांत की मौत 14 जून 2020 को मुंबई स्थित उनके आवास पर हुई थी।
सुशांत की मौत की जांच में CBI ने बाद में उनकी मौत को आत्महत्या माना था और 2025 में मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई थी। रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए कई आरोप भी जांच के दौरान सामने आए, लेकिन सुशांत की मौत के मामले में उनकी आपराधिक संलिप्तता स्थापित नहीं हुई।
इसी पृष्ठभूमि में दिशा सालियान मामले की नई जांच को लेकर भी लोगों की रुचि बढ़ गई है। हालांकि, दोनों मामलों के बीच आपराधिक संबंध है या नहीं, यह केवल CBI की जांच और सबूतों के आधार पर ही तय किया जा सकता है।
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राजनीति और बॉलीवुड में हलचल
FIR में आदित्य ठाकरे का नाम आने से महाराष्ट्र की राजनीति में भी प्रतिक्रिया तेज होने की संभावना है। वहीं रिया चक्रवर्ती, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली जैसे फिल्मी नामों का उल्लेख होने से बॉलीवुड में भी मामले को लेकर चर्चा बढ़ गई है।
फिलहाल जांच का शुरुआती चरण है। CBI को घटनास्थल से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम दस्तावेज, कॉल डिटेल, डिजिटल डेटा, प्रत्यक्षदर्शियों और उस समय की पुलिस जांच से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा करनी होगी।
निष्कर्ष
दिशा सालियान की मौत के छह साल बाद CBI की FIR ने इस मामले को फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। FIR में आदित्य ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई लोगों का नाम या उनकी भूमिका की जांच का उल्लेख सामने आया है।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सबसे महत्वपूर्ण कानूनी तथ्य यही है कि नाम दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी को आरोपी नहीं माना जाना चाहिए।
अब निगाहें CBI की जांच पर हैं। एजेंसी पुराने रिकॉर्ड और नए बयानों की पड़ताल कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि 8 जून 2020 की रात वास्तव में क्या हुआ था और क्या शुरुआती जांच में कोई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने से रह गया था। इस जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि मामले में आगे किन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जरूरत बनती है।

