HomeViral NewsBRICS नेताओं के डिनर मेन्यू पर सियासी घमासान, BJP और कांग्रेस आमने-सामने

BRICS नेताओं के डिनर मेन्यू पर सियासी घमासान, BJP और कांग्रेस आमने-सामने

भारत में आयोजित BRICS नेताओं के सम्मान में दिए गए एक विशेष रात्रिभोज का मेन्यू अब राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। विदेशी मेहमानों के लिए आयोजित इस डिनर में पूरी तरह शाकाहारी भोजन परोसे जाने को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने विदेशी नेताओं पर अपनी खान-पान संबंधी पसंद थोपने की कोशिश की, जबकि भाजपा ने इस आलोचना को अनावश्यक राजनीतिक विवाद बताते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया।

BRICS जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच से जुड़े कार्यक्रम में भोजन की पसंद को लेकर शुरू हुई यह बहस अब केवल मेन्यू तक सीमित नहीं रह गई है। दोनों दलों ने इसे भारतीय संस्कृति, कूटनीतिक मेहमाननवाजी और राजनीतिक संवेदनशीलता से जोड़ दिया है।

BRICS में शाकाहारी मेन्यू बना विवाद की वजहBRICS

रिपोर्ट के अनुसार BRICS नेताओं के सम्मान में आयोजित गाला डिनर में ऑल-वेजिटेरियन मेन्यू रखा गया था। सरकारी स्तर पर आयोजित इस विशेष भोज में विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भारतीय व्यंजनों पर आधारित शाकाहारी भोजन की व्यवस्था की गई थी।

भारत की समृद्ध शाकाहारी पाक परंपरा को देखते हुए इस तरह के मेन्यू को भारतीय खान-पान और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने प्रस्तुत करने के एक तरीके के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, कांग्रेस ने इसे अलग नजरिए से देखा।

कांग्रेस की ओर से सवाल उठाया गया कि क्या विदेशी मेहमानों की व्यक्तिगत खान-पान संबंधी पसंद को ध्यान में रखा गया था या सरकार ने अपनी पसंद को उन पर थोप दिया। पार्टी ने इसे कूटनीतिक मेहमाननवाजी के संदर्भ में संवेदनशील विषय बताया।

कांग्रेस ने सरकार पर लगाए आरोप

कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। विपक्ष का तर्क था कि अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए आयोजित आधिकारिक भोज में मेहमानों की अलग-अलग खाद्य आदतों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

कांग्रेस के मुताबिक, BRICS में शामिल देश अलग-अलग संस्कृतियों, धर्मों और खान-पान की परंपराओं वाले हैं। ऐसे में सभी मेहमानों के लिए एक ही प्रकार का भोजन उपलब्ध कराना उचित मेहमाननवाजी के सवाल खड़े करता है।

विपक्ष ने यह भी संकेत दिया कि भोजन केवल स्वाद का विषय नहीं होता, बल्कि कई बार वह सांस्कृतिक पहचान और व्यक्तिगत पसंद से भी जुड़ा होता है। इसलिए विदेशी नेताओं के लिए आयोजित भोज में विकल्पों की उपलब्धता महत्वपूर्ण हो सकती है।हालांकि, कांग्रेस की इस आलोचना ने भाजपा को सरकार का बचाव करने का अवसर दिया।

BJP का पलटवार

भाजपा ने कांग्रेस की आलोचना को बेवजह का विवाद करार दिया। पार्टी की ओर से कहा गया कि भारत की अपनी समृद्ध शाकाहारी पाक परंपरा है और किसी आधिकारिक भोज में भारतीय व्यंजनों को प्रमुखता देना अपने आप में गलत नहीं है।

भाजपा ने विपक्ष पर हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। पार्टी का तर्क था कि BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और खान-पान को प्रदर्शित करना देश की पहचान और सॉफ्ट पावर का हिस्सा है।भाजपा ने कांग्रेस की आपत्ति को ऐसे समय में उठाया गया राजनीतिक मुद्दा बताया, जब कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सहयोग को मजबूत करना था।

भोजन से कूटनीति तक पहुंची बहस

इस विवाद ने एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने रखा है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक कार्यक्रमों में भोजन का कितना महत्व होता है। राजनयिक आयोजनों में मेन्यू का चयन अक्सर मेहमानों की संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत पसंद को ध्यान में रखकर किया जाता है।

दुनिया के अलग-अलग देशों में आधिकारिक भोज के दौरान स्थानीय भोजन को प्रमुखता देने की परंपरा रही है। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल भोजन परोसना नहीं, बल्कि मेजबान देश की संस्कृति, इतिहास और पाक विरासत से विदेशी प्रतिनिधियों को परिचित कराना भी होता है।

भारत के संदर्भ में शाकाहारी भोजन देश की पाक विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दक्षिण भारतीय व्यंजनों से लेकर गुजराती, राजस्थानी, कश्मीरी और उत्तर भारतीय शाकाहारी पकवानों तक भारतीय भोजन की दुनिया काफी व्यापक है।इसीलिए सरकार के समर्थक इस मेन्यू को भारतीय संस्कृति के प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने इसे मेहमानों की व्यक्तिगत पसंद के नजरिए से उठाया है।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

मेन्यू विवाद राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी से आगे बढ़कर सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया। समर्थकों ने भारतीय शाकाहारी भोजन की वैश्विक लोकप्रियता का हवाला देते हुए सरकार का बचाव किया।

वहीं, आलोचकों ने सवाल उठाया कि अगर अलग-अलग विकल्प उपलब्ध होते तो विदेशी मेहमान अपनी पसंद के अनुसार भोजन चुन सकते थे। इस बहस में कई लोगों ने इसे अनावश्यक राजनीतिक विवाद भी बताया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे छोटे मुद्दे अक्सर व्यापक राजनीतिक बहस का माध्यम बन जाते हैं। BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान हुए इस विवाद ने भी यही रूप ले लिया है।

BRICS की अहमियत के बीच मेन्यू विवाद

BRICS समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था और बहुपक्षीय सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। इसके सदस्य देश व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक शासन जैसे विषयों पर चर्चा करते हैं।

ऐसे में नेताओं के बीच औपचारिक भोज अनौपचारिक बातचीत और संबंध मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। इसलिए मेन्यू पर हुई राजनीतिक बहस को व्यापक BRICS कार्यक्रम से अलग रखकर देखना जरूरी है।

डिनर में क्या परोसा गया, यह भले ही घरेलू राजनीति में बहस का विषय बन गया हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर BRICS बैठकों का मुख्य एजेंडा आर्थिक और रणनीतिक सहयोग ही रहता है।

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विवाद से क्या संदेश?

इस पूरे घटनाक्रम ने यह जरूर दिखाया है कि भारत में खान-पान जैसे सांस्कृतिक विषय भी तेजी से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन सकते हैं। कांग्रेस ने जहां इसे व्यक्तिगत पसंद और कूटनीतिक संवेदनशीलता से जोड़ा, वहीं भाजपा ने इसे भारतीय संस्कृति के गौरव और विपक्ष की अनावश्यक आलोचना के रूप में पेश किया।

विवाद का एक सकारात्मक पक्ष यह भी हो सकता है कि इससे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भोजन संबंधी विविधता और मेहमानों की व्यक्तिगत पसंद पर चर्चा शुरू हुई है।

निष्कर्ष

BRICS नेताओं के सम्मान में आयोजित गाला डिनर का शाकाहारी मेन्यू अब भारत की राजनीति में एक नया ‘फूड फाइट’ बन गया है। कांग्रेस ने सरकार पर विदेशी मेहमानों की खान-पान संबंधी पसंद की अनदेखी करने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने विपक्ष की आलोचना को अनावश्यक राजनीतिक हमला बताया।

दरअसल, विवाद भोजन से शुरू हुआ, लेकिन इसके केंद्र में भारतीय संस्कृति, कूटनीतिक मेहमाननवाजी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जैसे बड़े मुद्दे आ गए हैं। BRICS जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच की गंभीर चर्चाओं के बीच यह घरेलू राजनीतिक बहस भले ही अलग मुद्दा हो, लेकिन इसने एक बार फिर दिखाया है कि भारत में भोजन केवल स्वाद का विषय नहीं, बल्कि संस्कृति और राजनीति दोनों से गहराई से जुड़ा विषय है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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