देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने दावा किया है कि बाजार में चीनी की मौजूदा कमी स्वाभाविक नहीं, बल्कि “कृत्रिम संकट” है, जिसके कारण त्योहारों के मौसम में उपभोक्ताओं पर करीब 36,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस कथित संकट से कालाबाजारियों और जमाखोरों को फायदा पहुंच सकता है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीनी की कीमतों और उपलब्धता को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि सरकार को साल की शुरुआत में ही करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी की संभावित कमी की जानकारी थी, लेकिन मई से अगस्त के बीच इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। कांग्रेस के मुताबिक, इसी अवधि में खुदरा बाजार में चीनी की कीमत करीब 40 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 75 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई।
कांग्रेस ने कैसे लगाया 36,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान?
सुरजेवाला ने त्योहारों के दौरान चीनी की खपत के आंकड़ों का हवाला देते हुए अपना अनुमान सामने रखा। उनके अनुसार, त्योहारों के मौसम में देश में हर महीने करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी की खपत होती है। अगस्त से दिवाली तक यह मांग लगभग 120 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच सकती है।
कांग्रेस का दावा है कि यदि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति नहीं रहती और कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो विक्रेताओं को अतिरिक्त लाभ होगा। पार्टी ने इसी आधार पर करीब 36,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त लाभ का अनुमान लगाया है, जिसे वह उपभोक्ताओं की जेब से निकलने वाली रकम बता रही है।
कांग्रेस का चीनी उत्पादन के आंकड़ों पर भी सवाल
कांग्रेस ने चीनी उत्पादन के अनुमानों में अंतर को भी मुद्दा बनाया है। सुरजेवाला के मुताबिक, सरकार ने 2025-26 में चीनी उत्पादन करीब 343 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान जताया था, जबकि चीनी मिलों के संगठन के आंकड़ों के अनुसार वास्तविक उत्पादन लगभग 275 लाख मीट्रिक टन रहा।
कांग्रेस का कहना है कि उत्पादन के अनुमान और वास्तविक उपलब्धता के बीच इतना बड़ा अंतर बाजार में आपूर्ति की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार को वास्तविक उत्पादन की स्थिति का अंदाजा होने के बावजूद बाजार में संभावित कमी को दूर करने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे।
10 लाख टन चीनी आयात के फैसले पर सवाल
चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा ब्राजील से 10 लाख मीट्रिक टन चीनी आयात करने के फैसले पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाया है। सुरजेवाला ने दावा किया कि अगस्त के अंत में लिया गया यह फैसला त्योहारों के दौरान पैदा होने वाली तत्काल कमी को दूर करने में प्रभावी नहीं होगा, क्योंकि आयातित चीनी के देश में पहुंचने में समय लगेगा।
कांग्रेस का तर्क है कि यदि सरकार को पहले से संभावित कमी की जानकारी थी, तो आयात या अन्य आपूर्ति संबंधी कदम पहले ही उठाए जाने चाहिए थे। पार्टी के मुताबिक, देर से लिया गया फैसला बाजार में तत्काल राहत देने के बजाय केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह सकता है।
E20 ईंधन से चीनी आपूर्ति पर असर का दावा
कांग्रेस ने चीनी संकट को E20 पेट्रोल की नीति से भी जोड़ने की कोशिश की है। पार्टी का दावा है कि गन्ने के उत्पादन का करीब 32 प्रतिशत हिस्सा एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ा जा रहा है, जिससे चीनी बनाने के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा प्रभावित हो सकती है।
कांग्रेस के मुताबिक, एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति के कारण गन्ने का एक बड़ा हिस्सा चीनी के बजाय ईंधन उत्पादन में इस्तेमाल हो रहा है। इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता कम होने का दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, इस दावे के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि मौजूदा कीमत वृद्धि केवल E20 नीति की वजह से हुई है, उचित नहीं होगा। चीनी की कीमतों पर उत्पादन, स्टॉक, मांग, निर्यात-आयात नीति और वैश्विक बाजार जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ता है।
सरकार और भाजपा पर राजनीतिक निशाना
कांग्रेस ने अपने आरोपों को केवल बाजार की स्थिति तक सीमित नहीं रखा। पार्टी ने दावा किया कि यदि चीनी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो कथित कालाबाजारी से लाभ कमाने वाले लोग राजनीतिक चंदे के रूप में धन का एक हिस्सा सत्तारूढ़ भाजपा तक पहुंचा सकते हैं।
यह आरोप कांग्रेस की ओर से लगाया गया है और इसके समर्थन में खबर में कोई स्वतंत्र प्रमाण या जांच रिपोर्ट सामने नहीं रखी गई है। ऐसे में इसे राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।कांग्रेस ने इसे सरकार और कारोबारियों के बीच कथित गठजोड़ का उदाहरण बताते हुए पारदर्शी जांच की मांग उठाई है।
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता
चीनी की कीमतों में वृद्धि का सबसे ज्यादा असर त्योहारों के मौसम में दिखाई दे सकता है। भारत में रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश उत्सव, नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ जाती है।
यदि कच्चे माल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर मिठाई, बेकरी और खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ने की संभावना रहती है।यही वजह है कि त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों और उपलब्धता पर सरकार की नीतिगत निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
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कांग्रेस की मांग क्या है?
कांग्रेस ने सरकार से चीनी की वास्तविक उपलब्धता, उत्पादन और स्टॉक की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी चाहती है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि देश में कितनी चीनी उपलब्ध है, आगामी महीनों में मांग कितनी रहने की संभावना है और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
इसके अलावा पार्टी ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
निष्कर्ष
देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने त्योहारों से पहले राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। कांग्रेस ने इसे “कृत्रिम चीनी संकट” बताते हुए दावा किया है कि इससे उपभोक्ताओं पर करीब 36,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। पार्टी ने सरकार पर समय रहते कार्रवाई नहीं करने, उत्पादन के गलत अनुमान और देर से आयात का फैसला लेने जैसे आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस ने E20 पेट्रोल के लिए गन्ने के इस्तेमाल को भी चीनी की उपलब्धता से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों और 36,000 करोड़ रुपये के अनुमान को अभी कांग्रेस के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अब सरकार की ओर से चीनी के उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक, आयात और कीमतों को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट किए जाने का इंतजार है। आने वाले दिनों में त्योहारों के दौरान मांग और बाजार में आपूर्ति की वास्तविक स्थिति यह तय करेगी कि चीनी की कीमतों पर दबाव कितना कायम रहता है।

