बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर Meta ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने Instagram और Facebook पर नाबालिग यूजर्स के लिए रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक एक्सेस सीमित करने की दिशा में ट्रायल शुरू किया है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल, नींद में खलल और बच्चों की मानसिक सेहत पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है।
इस नए मॉडल के तहत किशोरों के लिए केवल रात में ऐप बंद करने की व्यवस्था ही नहीं होगी, बल्कि उनके दैनिक सोशल मीडिया इस्तेमाल को भी सीमित करने, स्कूल के समय नोटिफिकेशन रोकने और प्लेटफॉर्म पर सामाजिक दबाव कम करने वाले फीचर लागू करने की योजना है। Meta के सामने आने वाले ये बदलाव अमेरिका में राज्यों के साथ हुए व्यापक समझौते के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, फिलहाल इन उपायों का प्रमुख कार्यान्वयन अमेरिकी यूजर्स से जुड़ा है और इन्हें अदालत की मंजूरी के बाद लागू किया जाना है।
Meta द्वारा रात 12 से सुबह 6 बजे तक क्यों लगेगी रोक?
Meta के नए सेफ्टी उपायों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ओवरनाइट ब्लॉक है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार 13 से 17 वर्ष की उम्र के किशोरों के लिए Instagram और Facebook का इस्तेमाल रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक डिफॉल्ट रूप से बंद रहेगा। इस दौरान ऐप के इस्तेमाल को रोकने का उद्देश्य बच्चों को देर रात तक सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने से रोकना और उनकी नींद के समय को सुरक्षित करना है।
विशेषज्ञ लंबे समय से यह चिंता जताते रहे हैं कि देर रात तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल किशोरों की नींद और दैनिक दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। रात में बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन, वीडियो और लगातार अपडेट होते कंटेंट के कारण बच्चे स्क्रीन से दूर नहीं हो पाते। ऐसे में ‘डिजिटल बेडटाइम’ की अवधारणा माता-पिता के लिए एक अतिरिक्त नियंत्रण उपकरण बन सकती है।
रोजाना दो घंटे की इस्तेमाल सीमा
रात की पाबंदी के अलावा Meta ने किशोरों के लिए प्रतिदिन दो घंटे की डिफॉल्ट उपयोग सीमा लागू करने पर भी सहमति जताई है। इसका मतलब है कि 18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स के लिए Facebook और Instagram के इस्तेमाल को एक निर्धारित समय तक सीमित करने की व्यवस्था होगी।
यह बदलाव सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल समय सीमा पर्याप्त नहीं होगी। उनके मुताबिक, प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम किस तरह कंटेंट दिखाता है और यूजर को लगातार ऐप पर बनाए रखने के लिए कौन-से डिजाइन इस्तेमाल करता है, इन सवालों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
स्कूल के समय भी कम होगा डिजिटल दबाव
Meta की योजना में स्कूल टाइम के दौरान नोटिफिकेशन सीमित करने का प्रावधान भी शामिल है। प्रस्तावित व्यवस्था में सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक किशोरों के लिए पुश नोटिफिकेशन बंद रखने जैसे उपाय शामिल हैं। इसका उद्देश्य पढ़ाई के दौरान लगातार फोन देखने और सोशल मीडिया से मिलने वाले व्यवधान को कम करना है।
माता-पिता के लिए भी निगरानी और नियंत्रण के विकल्प बढ़ाए जा रहे हैं। वे बच्चों के स्क्रीन टाइम, ऑनलाइन गतिविधियों और कुछ जोखिमपूर्ण व्यवहारों को लेकर ज्यादा जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। कुछ सेटिंग्स में बदलाव के लिए माता-पिता की अनुमति की जरूरत पड़ सकती है।
Meta के नए नियम –लाइक्स और रिएक्शन भी होंगे छिपे
Meta किशोरों के सोशल मीडिया अनुभव में एक और बड़ा बदलाव करने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत लाइक्स और रिएक्शन की संख्या डिफॉल्ट रूप से छिपाई जा सकती है। यह कदम खास तौर पर उस सामाजिक दबाव को कम करने के लिए है जो बच्चों और किशोरों में पोस्ट पर मिलने वाले लाइक्स और प्रतिक्रियाओं की संख्या से पैदा हो सकता है।
किशोरों में सोशल मीडिया पर लोकप्रियता को लेकर तुलना और प्रतिस्पर्धा मानसिक दबाव का कारण बन सकती है। लाइक्स छिपाने का उद्देश्य इस तुलना को कम करना बताया जा रहा है।
उम्र की जांच भी होगी सख्त
बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी चुनौती यह है कि कम उम्र के बच्चे गलत उम्र डालकर सोशल मीडिया अकाउंट बना लेते हैं। इसी वजह से Meta ने एज वेरिफिकेशन सिस्टम को मजबूत करने की योजना बनाई है। इसमें AI और थर्ड-पार्टी तकनीकों की मदद से यूजर की उम्र का आकलन करने जैसे उपाय शामिल हैं।
Meta का लक्ष्य 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ऐसे अकाउंट बनाने से रोकना भी है। हालांकि, उम्र की पुष्टि के लिए तकनीकी प्रणालियों के इस्तेमाल से निजता और डेटा सुरक्षा को लेकर नए सवाल भी उठ सकते हैं।
अमेरिकी मुकदमों के बीच बड़ा समझौता
इन बदलावों की पृष्ठभूमि में Meta और अमेरिकी राज्यों के बीच हुआ बड़ा कानूनी समझौता है। कंपनी ने बच्चों और किशोरों को कथित रूप से सोशल मीडिया का आदी बनाने और प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन करने के आरोपों से जुड़े मुकदमों को निपटाने के लिए 18 अरब डॉलर तक के समझौते पर सहमति जताई है। Meta ने हालांकि किसी गलत काम को स्वीकार नहीं किया है।
समझौते में किशोरों की सुरक्षा के लिए कई उपाय शामिल हैं। इनमें दो घंटे की दैनिक सीमा, रात 12 से सुबह 6 बजे तक ब्लॉक, स्कूल समय में नोटिफिकेशन प्रतिबंध, उम्र की कड़ी जांच और लाइक्स छिपाने जैसे कदम शामिल हैं।
क्या ये बदलाव पर्याप्त होंगे?
Meta के नए कदमों को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों में इसे लेकर पूरी सहमति नहीं है। आलोचकों का कहना है कि समय सीमा और रात में ऐप बंद करना उपयोगी है, लेकिन इससे सोशल मीडिया के मूल डिजाइन से जुड़े जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होंगे।
कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि केवल Meta के प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लागू होते हैं और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म समान कदम नहीं उठाते, तो बच्चे आसानी से दूसरी सेवाओं पर जा सकते हैं। इसलिए डिजिटल बाल सुरक्षा के लिए पूरे उद्योग में समान मानकों की जरूरत हो सकती है।
माता-पिता के लिए क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था में माता-पिता की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। वे बच्चों के स्क्रीन टाइम को समझने, कुछ सुरक्षा सेटिंग्स नियंत्रित करने और ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने में सक्षम होंगे। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी नियंत्रण के साथ परिवारों में डिजिटल अनुशासन और बच्चों के साथ नियमित संवाद भी जरूरी है।
बच्चों को यह समझाना भी महत्वपूर्ण होगा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय उसका सुरक्षित और संतुलित उपयोग कैसे किया जाए।
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भारत पर भी पड़ सकता है असर
फिलहाल ये नए उपाय मुख्य रूप से अमेरिका में हुए कानूनी समझौते से जुड़े हैं। फिर भी, इनके वैश्विक प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। भारत में भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल, ऑनलाइन सुरक्षा, साइबरबुलिंग और डिजिटल लत को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है।
यदि Meta इन उपायों को अन्य देशों में भी लागू करता है, तो भारतीय किशोरों और अभिभावकों के लिए भी Instagram और Facebook के इस्तेमाल के तरीके में बदलाव देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
Meta द्वारा बच्चों और किशोरों के लिए Instagram और Facebook पर रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक एक्सेस रोकने, रोजाना इस्तेमाल को दो घंटे तक सीमित करने और स्कूल समय में नोटिफिकेशन कम करने की योजना सोशल मीडिया सुरक्षा की बहस में महत्वपूर्ण कदम है।
लाइक्स और रिएक्शन छिपाने तथा उम्र की जांच मजबूत करने जैसे उपाय भी किशोरों पर पड़ने वाले डिजिटल और सामाजिक दबाव को कम करने की कोशिश हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा केवल स्क्रीन टाइम घटाने से सुनिश्चित नहीं होगी। प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम, कंटेंट मॉडरेशन, उम्र की सही पहचान और अभिभावकीय निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Meta के ये उपाय वास्तव में बच्चों के सोशल मीडिया व्यवहार और उनकी डिजिटल सेहत पर कितना असर डालते हैं। साथ ही, अन्य सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों से कितना सीखती हैं, यह भी वैश्विक डिजिटल सुरक्षा के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

