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अमित शाह की मौजूदगी में राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंथन, 850 से ज्यादा अधिकारी करेंगे रणनीतिक चर्चा

देश की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मौजूदा खतरों और उभरती चुनौतियों पर व्यापक रणनीति तैयार करने के लिए सोमवार से नई दिल्ली में 9वीं नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज (NSS) कॉन्फ्रेंस शुरू हो रही है। दो दिवसीय इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल होंगे और वरिष्ठ पुलिस एवं सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी में सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, देशभर से 850 से अधिक पुलिस और सुरक्षा अधिकारी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। बैठक का आयोजन हाइब्रिड प्रारूप में किया जा रहा है, जिसमें अधिकारी प्रत्यक्ष और वर्चुअल दोनों माध्यमों से जुड़ेंगे।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस सम्मेलन में आतंकवाद से लेकर साइबर अपराध, नारकोटिक्स, वित्तीय धोखाधड़ी, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन ऐप्स के दुरुपयोग, घुसपैठ और अवैध आव्रजन जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। साथ ही नागरिक उड्डयन और बंदरगाहों की सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों और केंद्रीय तथा राज्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी रणनीति पर विचार किया जाएगा।

850 से ज्यादा अधिकारी होंगे शामिलअमित शाह

अधिकारियों के अनुसार, सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। कुछ अधिकारी दिल्ली में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहेंगे, जबकि अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा में शामिल होंगे।

हाइब्रिड प्रारूप अपनाने का उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात अधिकारियों को एक ही मंच पर जोड़ना है। इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुलिस अधिकारियों को अपने अनुभव और चुनौतियां सीधे राष्ट्रीय स्तर के नीति-निर्माताओं और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के सामने रखने का अवसर मिलता है।

आतंकवाद और ड्रग्स पर खास फोकस

इस बार की बैठक में नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े आतंकी नेटवर्क पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। सुरक्षा एजेंसियों के सामने ड्रग्स का कारोबार अब केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं रह गया है। कई मामलों में मादक पदार्थों की तस्करी से हासिल धन का इस्तेमाल आपराधिक और आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय सहायता देने के लिए किए जाने की आशंका रहती है।

इसी कारण सम्मेलन में ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के साथ-साथ उन वित्तीय चैनलों की पहचान और उन्हें बाधित करने पर भी चर्चा हो सकती है, जिनके माध्यम से अवैध धन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता है।

इसके साथ ही आतंकवाद-रोधी अभियानों की रणनीति, संदिग्ध नेटवर्क की पहचान और विभिन्न एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विचार किया जाएगा।

साइबर अपराध और एन्क्रिप्टेड ऐप्स नई चुनौती

राष्ट्रीय सुरक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक आतंकवाद और सीमा सुरक्षा के साथ अब साइबर अपराध और डिजिटल संचार भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

सम्मेलन में एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन ऐप्स के अवैध इस्तेमाल और नई तकनीकों से पैदा होने वाली चुनौतियों पर चर्चा होने की उम्मीद है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती यह है कि अपराधी और आतंकी समूह आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए अपनी पहचान और संचार गतिविधियों को छिपाने की कोशिश करते हैं।

वित्तीय धोखाधड़ी भी सुरक्षा एजेंडे में

सम्मेलन के एजेंडे में फाइनेंशियल फ्रॉड यानी वित्तीय धोखाधड़ी भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने आ रही है। डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से जटिल हो रहे हैं।

सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के लिए चुनौती केवल ठगी करने वालों को पकड़ना नहीं है, बल्कि उनके नेटवर्क, धन के प्रवाह और सीमा-पार कनेक्शन की पहचान करना भी है। केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल इस तरह के मामलों में कार्रवाई को प्रभावी बना सकता है।

घुसपैठ और अवैध आव्रजन पर भी चर्चा

राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में घुसपैठ और अवैध आव्रजन से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। सीमा से जुड़े राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों के सामने अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने वालों की पहचान और उनके नेटवर्क को खत्म करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

सुरक्षा अधिकारियों के बीच इस विषय पर चर्चा का उद्देश्य सीमा सुरक्षा, स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना हो सकता है। इससे संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय पर साझा करने और संभावित सुरक्षा खतरों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

विमानन और बंदरगाहों की सुरक्षा भी एजेंडे में

राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते स्वरूप को देखते हुए सिविल एविएशन और पोर्ट सिक्योरिटी पर भी सम्मेलन में चर्चा प्रस्तावित है। हवाई अड्डे और बंदरगाह देश की आर्थिक तथा रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे हैं।

इन स्थानों की सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक का असर व्यापक हो सकता है। इसलिए सुरक्षा प्रोटोकॉल, निगरानी तकनीक और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाने के उपायों पर विचार किया जा सकता है।

वामपंथी उग्रवाद पर भी रणनीति

सम्मेलन के दूसरे दिन लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (LWE) यानी वामपंथी उग्रवाद से संबंधित चुनौतियों और उसके खिलाफ अपनाई जा रही रणनीतियों पर भी चर्चा होने की संभावना है। सरकार और सुरक्षा बलों ने पिछले वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान के साथ विकास और कनेक्टिविटी पर भी जोर दिया है।

बैठक में जमीनी स्तर पर तैनात अधिकारियों के अनुभवों के आधार पर यह चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है कि प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह और मजबूत किया जाए तथा उग्रवादी नेटवर्क को दोबारा पैर जमाने से कैसे रोका जाए।

2025 की बैठक में भी हुई थी व्यापक चर्चा

इससे पहले 2025 में हुई 8वीं नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज कॉन्फ्रेंस में लगभग 800 अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। उस बैठक का उद्घाटन भी अमित शाह ने किया था। इसमें केंद्रीय गृह सचिव, उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख अधिकारी शामिल हुए थे। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक तथा अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे।

पिछली बैठक में बाहरी ताकतों से जुड़े सुरक्षा खतरों, उनके भारत में मौजूद संपर्कों, नारकोटिक्स नेटवर्क, एन्क्रिप्टेड ऐप्स, नई तकनीक, भीड़ प्रबंधन, आतंक के वित्तपोषण और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

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अमित शाह का केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर

राष्ट्रीय सुरक्षा की कई चुनौतियां ऐसी हैं जिनका समाधान केवल किसी एक एजेंसी या राज्य के स्तर पर संभव नहीं है। आतंकवाद, साइबर अपराध, ड्रग तस्करी और वित्तीय अपराधों के नेटवर्क अक्सर कई राज्यों और कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक फैले होते हैं।

ऐसे में केंद्रीय जांच एवं सुरक्षा एजेंसियों तथा राज्य पुलिस के बीच सूचनाओं का तेज आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। NSS कॉन्फ्रेंस इसी समन्वय को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करती है।

निष्कर्ष

अमित शाह की मौजूदगी में होने वाली 9वीं नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हो रही है जब भारत की सुरक्षा चुनौतियां पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर डिजिटल और आर्थिक क्षेत्रों तक फैल चुकी हैं। 850 से अधिक अधिकारियों की भागीदारी वाले इस सम्मेलन में आतंकवाद, ड्रग्स, साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी, घुसपैठ, अवैध आव्रजन, एन्क्रिप्टेड ऐप्स और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा होगी।

दो दिनों तक चलने वाली यह बैठक केंद्र और राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकती है। जमीनी स्तर के अधिकारियों के अनुभव और विशेषज्ञों की सलाह को एक साथ लाकर तैयार की जाने वाली रणनीतियां आने वाले समय में देश की आंतरिक सुरक्षा नीति को और प्रभावी बनाने में भूमिका निभा सकती हैं।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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