झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन बुधवार को 19वें दिन भी जारी रहा। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में छात्र और अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करना, कथित परीक्षा अनियमितताओं की उच्चस्तरीय CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों का यह आंदोलन झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ था। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। वे केवल परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं कर रहे, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग भी कर रहे हैं।
19वें दिन भी नहीं टूटा आंदोलन
प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, 19 दिनों से जारी आंदोलन के बावजूद सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है जिससे उन्हें आंदोलन समाप्त करने का भरोसा मिले। छात्रों का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों का बड़ा हिस्सा स्वीकार करने की बात कही है, लेकिन JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जांच जैसी मुख्य मांगों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। इसी वजह से आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
छात्र नेताओं ने कहा कि आंदोलन की अगली रणनीति तय करने के लिए बुधवार को कोर कमेटी की बैठक होगी। बैठक में आगे के कार्यक्रम, प्रदर्शन की दिशा और सरकार पर दबाव बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी।
भूख हड़ताल ने बढ़ाई चिंता
आंदोलन के दौरान कुछ छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। लंबे समय से जारी प्रदर्शन के कारण छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ी है। बुधवार को सदर अस्पताल की एक मेडिकल टीम प्रदर्शन स्थल पर पहुंची और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों सहित अन्य प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य जांच की।
सदर अस्पताल के डॉक्टर एसके झा के मुताबिक, जिन छात्रों की जांच की गई, उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है। उन्होंने बताया कि अधिकांश छात्रों का ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर सामान्य पाया गया। जिन छात्रों को हल्की परेशानी थी, उन्हें दवाएं और प्राथमिक चिकित्सा दी जा रही है तथा उनकी निगरानी की जा रही है।
विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई से बढ़ा विवाद
इस आंदोलन को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब 10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा घेराव का प्रयास किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले, पानी की बौछार और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई को लेकर छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने छात्रों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शन के दौरान स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल का इस्तेमाल करना पड़ा। प्रशासन के मुताबिक, इस दौरान 14 से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हुए।
पुलिस कार्रवाई के बाद छात्रों का आंदोलन और तेज हो गया। विपक्षी भाजपा ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और छात्र आंदोलन के समर्थन में झारखंड बंद का आह्वान किया।
पुलिस ने हिरासत में लेने की खबरों को बताया अफवाह
बुधवार सुबह प्रदर्शन स्थल पर उस समय फिर तनाव पैदा हुआ जब यह खबर फैली कि वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी छात्रों को हिरासत में लेने पहुंचे हैं। रांची के पुलिस अधीक्षक पारस राणा ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारी किसी को गिरफ्तार या हिरासत में लेने नहीं आए थे।
पुलिस के मुताबिक, प्रशासनिक अधिकारियों का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों से बातचीत करना और कुछ लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी लेना था। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन स्थल पर सोशल मीडिया से जुड़े लोगों और अन्य बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी के कारण अफवाहें फैल रही थीं
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
छात्र आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया है कि भाजपा विधानसभा की कार्यवाही को बाधित कर रही है और युवाओं के मुद्दे पर राजनीति कर रही है। सरकार का कहना है कि वह छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से ले रही है और उनकी मांगों पर कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर छात्रों की मांगों से बचने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कथित अनियमितताओं के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए CBI जांच जरूरी है।
24 जिलों से पहुंचे अभ्यर्थी
आंदोलन की व्यापकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदर्शन में झारखंड के विभिन्न हिस्सों से छात्र पहुंचे हैं। आंदोलनकारी इसे केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य की पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल बता रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में युवा वर्षों का समय और पैसा लगाते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो अभ्यर्थियों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है। इसी वजह से वे स्वतंत्र जांच और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।
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आगे क्या होगा?
19वें दिन आंदोलन के जारी रहने के बीच अब सबकी नजर छात्र कोर कमेटी की बैठक पर है। इसमें यह तय किया जाएगा कि आंदोलन को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए। फिलहाल छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त करने से इनकार किया है।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर छात्रों की मांगों का समाधान निकालना और दूसरी ओर भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे आरोपों पर विश्वास बहाल करना। वहीं, छात्रों की मुख्य मांग JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और कथित अनियमितताओं की CBI जांच को लेकर है।
निष्कर्ष
झारखंड में JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है। परीक्षा रद्द करने, CBI जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्र रांची में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। भूख हड़ताल और हालिया पुलिस कार्रवाई ने आंदोलन को और संवेदनशील बना दिया है।
सरकार जहां अधिकांश मांगों पर कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं छात्र और विपक्ष मुख्य मुद्दों पर ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच संवाद ही इस लंबे आंदोलन का समाधान निकालने में अहम भूमिका निभा सकता है।

