संसद के मानसून सत्र का 15वां दिन भी भारी हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच आगे बढ़ा। विपक्षी दलों के लगातार विरोध और नारेबाजी के बावजूद लोकसभा में मंगलवार को दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिए गए। इनमें केरल का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाला विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) से जुड़े प्रावधानों में बदलाव करने वाला विधेयक शामिल है। दोनों विधेयक विपक्ष के विरोध के बीच बिना विस्तृत बहस के पारित हुए।
संसद में जारी गतिरोध की एक प्रमुख वजह विपक्ष की यह मांग रही कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और उससे जुड़े सवालों पर सदन में बयान दें। इसके साथ ही विपक्ष ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे के कथित दुरुपयोग या चोरी के आरोपों को भी संसद में उठाया। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए तत्काल चर्चा की मांग की।
संसद में हंगामे के बीच दो विधेयक पारित
लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और विरोध के बीच विधायी कामकाज आगे बढ़ाया गया। सबसे पहले केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से संबंधित विधेयक पारित किया गया। यह नाम राज्य के मलयालम उच्चारण के अनुरूप है।
दूसरा विधेयक राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की भूमिका और अधिकारों का विस्तार करने से संबंधित है। प्रस्तावित बदलाव के बाद NCDC को सहकारी समितियों को सीधे ऋण और अनुदान उपलब्ध कराने की अधिक क्षमता मिलने का प्रावधान है।
यह स्थिति मानसून सत्र में लगातार देखने को मिल रही है, जहां विपक्ष के विरोध के कारण प्रश्नकाल और विधायी कार्यवाही कई बार बाधित हुई है। PRS के अनुसार, सत्र में कई नए विधेयक पेश किए गए हैं और विभिन्न विधेयकों पर सदन में कामकाज जारी है।
अयोध्या मुद्दे पर कांग्रेस का स्थगन प्रस्ताव
कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चंदे के कथित दुरुपयोग के मुद्दे को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाने की कोशिश की। विपक्ष का आरोप है कि मंदिर के लिए जुटाए गए धन से जुड़े मामलों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
विपक्ष पहले भी इस मुद्दे को संसद में उठाता रहा है। पिछले सप्ताह भी राम मंदिर चंदे के कथित गबन के आरोपों को लेकर सदन में हंगामा हुआ था। विपक्ष ने इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की थी।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई भी बना बड़ा मुद्दा
संसद में जारी गतिरोध का दूसरा बड़ा कारण झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि रोजगार और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया।
विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर इस मामले पर स्पष्टीकरण दें। सरकार की ओर से गृह मंत्री के संसद में बयान देने का विकल्प सामने रखा गया, लेकिन विपक्ष ने इसे अपनी शर्तों के साथ स्वीकार करने से इनकार किया। विपक्ष की प्रमुख मांगों में पुलिस कार्रवाई पर स्पष्टीकरण और छात्रों के साथ हुई कथित ज्यादती पर जवाब शामिल है।
सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बरकरार
संसद में जारी टकराव को समाप्त करने के लिए सरकार की ओर से बातचीत की कोशिश भी की जा रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर गतिरोध खत्म करने पर चर्चा की थी। सरकार की कोशिश है कि महत्वपूर्ण विधायी कामकाज बाधित न हो और सदन सामान्य रूप से चले।
हालांकि दोनों पक्षों के बीच अभी तक कोई ऐसा फार्मूला सामने नहीं आया है, जिससे विरोध पूरी तरह समाप्त हो सके। विपक्ष अपनी मांगों को लेकर लगातार दबाव बनाए हुए है, जबकि सरकार विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।
संसद के बाहर भी आमने-सामने प्रदर्शन
सदन के भीतर जारी हंगामे का असर संसद परिसर के बाहर भी दिखाई दे रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद अलग-अलग मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालिया प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और भाजपा सांसदों के बीच भी तीखी नोकझोंक देखने को मिली। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संसद के मकर द्वार के बाहर दोनों पक्षों के सांसदों ने समानांतर प्रदर्शन किया।
इससे साफ है कि मौजूदा राजनीतिक टकराव केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद परिसर में भी दोनों पक्ष अपने-अपने मुद्दों को जोरदार तरीके से उठा रहे हैं।
विधायी कामकाज बनाम राजनीतिक विरोध
मानसून सत्र में सरकार के सामने एक तरफ कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की चुनौती है, तो दूसरी ओर विपक्ष विभिन्न राजनीतिक और जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए दबाव बना रहा है।
विपक्ष का तर्क है कि सदन में विधेयकों को पर्याप्त चर्चा के बिना पारित करना संसदीय प्रक्रिया के उद्देश्य के अनुरूप नहीं है। दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि लगातार हंगामे के कारण विधायी कामकाज बाधित नहीं किया जा सकता।लोकसभा में मंगलवार को दो विधेयकों का बिना विस्तृत बहस के पारित होना इसी व्यापक टकराव का उदाहरण रहा।
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अब आगे क्या?
मानसून सत्र के आने वाले दिनों में FCRA संशोधन विधेयक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोप और अन्य राजनीतिक मुद्दे सरकार तथा विपक्ष के बीच टकराव के केंद्र में बने रह सकते हैं। कांग्रेस ने FCRA विधेयक पर भी अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले विधायी मुकाबले में विपक्ष अपनी पूरी ताकत लगाने की तैयारी में है।
निष्कर्ष
संसद का मानसून सत्र फिलहाल विधायी कामकाज और राजनीतिक गतिरोध के बीच फंसा हुआ है। मंगलवार को विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद लोकसभा ने केरल का नाम ‘केरलम’ करने और NCDC की शक्तियों का विस्तार करने वाले दो विधेयक पारित कर दिए। वहीं कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर चंदे के कथित दुरुपयोग को लेकर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग की।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और गृह मंत्री के बयान की मांग ने भी गतिरोध को और गहरा किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच संवाद से संसद की कार्यवाही सामान्य होती है या टकराव जारी रहता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

