PM-USHA योजना देश के राज्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की तस्वीर बदलने के मकसद से लाई गई एक बड़ी पहल है। अक्सर देखा जाता है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों के मुकाबले राज्य के कॉलेजों में संसाधनों की कमी रहती है, जिसका सीधा असर पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ता है।
यह योजना ठीक इसी अंतर को पाटने के लिए बनाई गई है, ताकि हर राज्य के छात्र को बेहतर बुनियादी ढांचा, डिजिटल शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई मिल सके। आइए इस योजना की पूरी जानकारी, उद्देश्य और फंडिंग प्रक्रिया विस्तार से समझते हैं।
PM-USHA क्या है
PM-USHA यानी प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान शिक्षा मंत्रालय की केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे जून 2023 में शुरू किया गया था। यह पुरानी राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) योजना का रिवैंप्ड रूप है, जो 2013 में शुरू हुई थी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के लक्ष्यों के अनुरूप, इसका मकसद राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पहुंच, समानता, गुणवत्ता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है।
इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक कुल 12,926.10 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। अब तक 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस योजना में शामिल होने के लिए शिक्षा मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
PM-USHA में फंडिंग कैसे मिलती है
PM-USHA योजना में केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत हिस्सा वहन करती है। हर घटक के लिए फंडिंग की एक निश्चित ऊपरी सीमा तय की गई है, और राज्यों को अपने प्रस्ताव इसी सीमा के भीतर तैयार करने होते हैं। बहु-विषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय (MERU) घटक के तहत प्रति संस्थान 100 करोड़ रुपये तक की फंडिंग दी जाती है।
वहीं विश्वविद्यालयों को मजबूत बनाने के लिए 20 करोड़ रुपये तक का प्रावधान है। शुरुआती अनुदान सुधारों पर आधारित होते हैं, जबकि बाद के अनुदान संस्थान के प्रदर्शन के आधार पर तय किए जाते हैं।
PM-USHA के मुख्य उद्देश्य
PM-USHA योजना खासतौर पर दूरदराज, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित और कम सकल नामांकन अनुपात (GER) वाले क्षेत्रों पर फोकस करती है। इसके अलावा यह योजना महत्वाकांक्षी जिलों में उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर देती है। महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना भी इस योजना का अहम हिस्सा है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के जरिए छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए स्किल अपग्रेडेशन पर भी काम किया जा रहा है।
PM-USHA का क्रियान्वयन कैसे होता है
PM-USHA योजना को केंद्रीय, राज्य और संस्थागत स्तर पर बनी अलग-अलग संस्थाओं के जरिए लागू और मॉनिटर किया जाता है। संस्थानों की सिफारिश राज्य सरकार या राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद (SHEC) करती है, जबकि अंतिम मंजूरी प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड देता है। अब तक प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठकों में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 440 यूनिट को मंजूरी दी जा चुकी है, जिसके लिए कुल 5,613.12 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: PM-USHA योजना की पूरी जानकारी कहां मिलेगी?
जवाब: PM-USHA से जुड़ी सभी जानकारी और दस्तावेज PM-USHA आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
सवाल: यह योजना किस पुरानी योजना का रिवैंप्ड रूप है?
जवाब: PM-USHA योजना पुरानी राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) का रिवैंप्ड रूप है, जो 2013 में शुरू हुई थी।
सवाल: इस योजना में फंडिंग किस अनुपात में बंटती है?
जवाब: केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत हिस्सा वहन करती है, हर घटक के लिए एक निश्चित ऊपरी सीमा तय होती है।
सवाल: कितने राज्यों ने अब तक इस योजना में हिस्सा लिया है?
जवाब: अब तक 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने शिक्षा मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
सवाल: इस योजना का लाभ किन क्षेत्रों को प्राथमिकता से मिलता है?
जवाब: दूरदराज, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित, कम सकल नामांकन अनुपात वाले क्षेत्रों और महत्वाकांक्षी जिलों को प्राथमिकता दी जाती है।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।
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