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कोई भी प्रदर्शनकारी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा’: आधी रात की वार्ता के बाद CJP का बड़ा दावा, बिहार और असम में FIR नहीं होने का मिला आश्वासन

NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चले लंबे आंदोलन के बाद एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Cockroach Janta Party (CJP) ने दावा किया है कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ आधी रात तक चली बातचीत में उन्हें यह आश्वासन दिया गया कि बिहार और असम में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाएगा और भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। CJP ने इसे आंदोलन से जुड़े युवाओं के लिए बड़ी राहत बताया है। हालांकि, इन दावों पर केंद्र सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने देर रात सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ लगभग दो से तीन घंटे तक बातचीत हुई। उनके अनुसार, बैठक के दौरान बिहार और असम सरकारों के मसौदा आदेश (ड्राफ्ट नोटिफिकेशन) साझा किए गए, जिनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में कार्रवाई न करने का आश्वासन शामिल था।

CJP का ‘कोई प्रदर्शनकारी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा’CJP

बैठक के बाद जारी वीडियो संदेश में CJP नेतृत्व ने कहा कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी को कानूनी लड़ाई अकेले नहीं लड़नी पड़ेगी। संगठन ने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों ने दोहराया है कि आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और अन्य भाजपा या एनडीए शासित राज्यों में भी इसी प्रकार के आदेश जारी कराने का प्रयास किया जाएगा।

संगठन ने अपने समर्थकों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि फिलहाल बातचीत का रास्ता खुला हुआ है और सरकार की ओर से किए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन पर नजर रखी जाएगी।

पृष्ठभूमि: क्यों फिर बढ़ा था तनाव?

हालांकि CJP ने कुछ दिन पहले सरकार के साथ समझौते के बाद अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था, लेकिन बाद में संगठन ने आरोप लगाया कि बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी रही। संगठन का कहना था कि यह पहले हुए समझौते की भावना के विपरीत है। इसी मुद्दे पर CJP ने सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है।

बिहार सरकार का फैसला

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिहार सरकार ने घोषणा की कि NEET आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाएगा। राज्य सरकार के अनुसार, आंदोलन से जुड़े मामलों की समीक्षा के बाद कानूनी कार्रवाई समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को CJP ने अपने आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

असम सरकार ने भी दिया आश्वासन

बिहार के बाद असम सरकार ने भी घोषणा की कि आंदोलन के संबंध में दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आगे कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

CJP की अन्य राज्यों को लेकर भी मांग

CJP का कहना है कि केवल बिहार और असम ही नहीं, बल्कि अन्य भाजपा और एनडीए शासित राज्यों में भी इसी प्रकार की अधिसूचनाएं जारी होनी चाहिए। संगठन के अनुसार, उन्हें भरोसा दिया गया है कि केंद्र सरकार इस दिशा में समन्वय कर रही है और अन्य राज्यों से भी जल्द सकारात्मक कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

संगठन ने विशेष रूप से यह मांग दोहराई कि जिन छात्रों या युवाओं के खिलाफ केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण मामले दर्ज किए गए हैं, उन्हें पूर्ण कानूनी राहत दी जाए।

सरकार और CJP के बीच पहले भी हुआ था समझौता

इससे पहले केंद्र सरकार और CJP के बीच हुई वार्ता के बाद संगठन ने अपना लंबा आंदोलन समाप्त कर दिया था। उस समय दोनों पक्षों की संयुक्त प्रेस वार्ता में बताया गया था कि सरकार ने परीक्षा सुधारों, आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा और अन्य मांगों पर सहमति जताई है। उसी समझौते के बाद जंतर-मंतर पर चल रहा धरना समाप्त किया गया था।

हालांकि बाद में विभिन्न राज्यों में पुलिस कार्रवाई की खबरों के बाद CJP ने आरोप लगाया कि समझौते का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है।

छात्रों में राहत की उम्मीद

आधी रात की वार्ता के बाद सामने आए दावों से आंदोलन में शामिल छात्रों और उनके परिवारों में राहत की उम्मीद जगी है। कई छात्र संगठनों ने कहा कि यदि वास्तव में सभी मामलों को वापस लिया जाता है और भविष्य में कार्रवाई नहीं होती, तो इससे आंदोलन में शामिल युवाओं का विश्वास बहाल होगा।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है और सभी राज्यों द्वारा औपचारिक आदेश जारी किए जाने चाहिए।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को छात्रों के आंदोलन की सफलता बताया है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने वास्तव में मामलों को वापस लेने और प्रदर्शनकारियों को राहत देने का निर्णय लिया है, तो यह लोकतांत्रिक दबाव का परिणाम है।

वहीं, सरकार की ओर से अभी तक आधी रात की बैठक के संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए CJP द्वारा किए गए दावों की औपचारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।

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अब आगे क्या?

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और अन्य राज्यों की ओर से कब औपचारिक अधिसूचनाएं जारी होती हैं। यदि CJP के दावे के अनुरूप सभी मामलों को वापस लेने और गिरफ्तार लोगों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी होती है, तो यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक का महत्वपूर्ण निष्कर्ष माना जाएगा।

वहीं CJP ने स्पष्ट किया है कि यदि समझौते का पालन नहीं हुआ, तो संगठन आगे की रणनीति पर विचार करेगा।

निष्कर्ष

आधी रात तक चली वार्ता के बाद CJP द्वारा किया गया यह दावा आंदोलन से जुड़े हजारों छात्रों और युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार और असम में एफआईआर वापस लेने तथा भविष्य में कार्रवाई न करने के कथित आश्वासन ने विवाद को नई दिशा दी है।

हालांकि इन दावों के पूर्ण क्रियान्वयन और अन्य राज्यों में समान कदम उठाए जाने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल, यह घटनाक्रम सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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