जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। एक आंतरिक दस्तावेज के सामने आने के बाद यह दावा किया गया है कि 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के निर्देश पर पेललेट गन का इस्तेमाल किया था। इस खुलासे ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई, भीड़ नियंत्रण के तौर-तरीकों और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस बीच केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने पूरे घटनाक्रम की आंतरिक जांच शुरू कर दी है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शुरुआती चरण में दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि उसने पेललेट गन का इस्तेमाल नहीं किया और उसके पास ऐसे हथियार उपलब्ध नहीं हैं। बाद में स्पष्ट किया गया कि RAF के पास दंगा नियंत्रण उपकरणों के हिस्से के रूप में पेललेट गन होती है, जबकि उसके इस्तेमाल को लेकर अलग से जांच चल रही है।
क्या कहता है नया दस्तावेज?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, CRPF की आंतरिक जांच में दर्ज प्रारंभिक विवरण से संकेत मिलता है कि जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव बढ़ने के दौरान एक RAF जवान ने सात राउंड पेललेट फायर किए। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से पांच राउंड प्रदर्शनकारियों को लगे, जबकि दो जमीन पर जाकर गिरे। प्रारंभिक निष्कर्षों में यह भी कहा गया है कि कार्रवाई कथित तौर पर उस समय की गई जब सुरक्षा बलों पर पथराव होने का दावा किया गया।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि संबंधित RAF कर्मी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को बताया कि कार्रवाई उस समय की परिस्थितियों और मौके पर मौजूद दिल्ली पुलिस अधिकारी के निर्देशों के अनुरूप की गई थी। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और जांच जारी है।
जंतर- मंतर पर कार्रवाई से पहले पुलिस ने किया था इनकार
प्रदर्शन के तुरंत बाद सोशल मीडिया और विभिन्न संगठनों ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों पर पेललेट गन का इस्तेमाल किया गया। उस समय दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को “भ्रामक” और “झूठा” बताते हुए खारिज कर दिया था। पुलिस ने कहा था कि दिल्ली पुलिस के पास पेललेट गन नहीं है और ऐसी खबरें गलत जानकारी फैलाने का प्रयास हैं।
हालांकि बाद में सामने आई रिपोर्टों और CRPF की आंतरिक जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
CRPF ने शुरू की आंतरिक जांच
विवाद बढ़ने के बाद CRPF मुख्यालय ने RAF से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या पेललेट गन का उपयोग मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप था, क्या बल प्रयोग आवश्यक था और क्या सभी नियमों का पालन किया गया। अधिकारियों के अनुसार, अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही किसी प्रकार की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान संबंधित RAF अधिकारियों और जवानों के बयान दर्ज किए गए हैं तथा ड्यूटी लॉग, हथियार जारी करने के रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़े अन्य दस्तावेजों की भी समीक्षा की जा रही है।
जंतर- मंतर पर घायल हुए प्रदर्शनकारियों के दावे
प्रदर्शन में शामिल कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें पेललेट लगे थे और इसके कारण वे घायल हुए। कुछ घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार भी हुआ। अस्पतालों के चिकित्सा रिकॉर्ड और कुछ मीडिया रिपोर्टों में पेललेट जैसी चोटों का उल्लेख सामने आया है, हालांकि इन मामलों की आधिकारिक जांच अभी जारी है।
घायलों और उनके परिजनों ने मांग की है कि घटना की न्यायिक या स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
दूसरी ओर सुरक्षा बलों का पक्ष
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि उस दिन स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण थी। उनके अनुसार, कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गया था और सुरक्षा बलों पर पथराव तथा हमले की घटनाएं भी सामने आईं। दिल्ली पुलिस ने अलग से बताया था कि RAF के कुछ जवानों पर हमला हुआ था और इस संबंध में प्राथमिकी भी दर्ज की गई।
अधिकारियों का कहना है कि यदि बल प्रयोग हुआ भी है, तो उसकी परिस्थितियों और आवश्यकता का मूल्यांकन जांच के बाद ही किया जा सकता है।
कानूनी और मानवाधिकार बहस
घटना के बाद मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने नागरिक प्रदर्शनों में पेललेट गन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस बीच सर्वोच्च न्यायालय में भी एक याचिका दायर की गई है, जिसमें नागरिक प्रदर्शनों के दौरान पेललेट गन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसे हथियार गंभीर शारीरिक चोट पहुंचा सकते हैं और भीड़ नियंत्रण के लिए इनके स्थान पर कम नुकसानदेह विकल्प अपनाए जाने चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग की स्पष्ट और पारदर्शी नीति आवश्यक है, ताकि सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
घटनाक्रम सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार से जवाब मांगा है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि जांच में पेललेट गन के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं सरकार की ओर से अभी तक अंतिम जांच रिपोर्ट आने का इंतजार करने की बात कही गई है। आधिकारिक रुख यही है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच आवश्यक है।
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अब आगे क्या?
CRPF की आंतरिक जांच रिपोर्ट अभी अंतिम रूप में सार्वजनिक नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पेललेट गन का उपयोग किन परिस्थितियों में हुआ, क्या यह नियमों के अनुरूप था और क्या किसी स्तर पर प्रशासनिक या परिचालन चूक हुई।
इस बीच यह मामला नागरिक अधिकारों, पुलिस सुधारों और भीड़ नियंत्रण की नीतियों पर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।
निष्कर्ष
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पेललेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर सामने आए नए दस्तावेजों ने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है। जहां प्रारंभिक रिपोर्टों में RAF द्वारा पेललेट फायर किए जाने और दिल्ली पुलिस अधिकारी के निर्देश का दावा किया गया है, वहीं अंतिम सत्य जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल यह मामला सुरक्षा बलों की जवाबदेही, भीड़ नियंत्रण की रणनीति और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों में बल प्रयोग की सीमाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

