HomePersonal Financeसोने में निवेश 2026: रिकॉर्ड ₹1.49 लाख भाव में पैसा लगाने के...

सोने में निवेश 2026: रिकॉर्ड ₹1.49 लाख भाव में पैसा लगाने के 4 तरीके

सोने में निवेश को लेकर इन दिनों हर किसी के मन में एक ही सवाल है – जब भाव रिकॉर्ड हाई पर हो, तो क्या अभी पैसा लगाना सही है?

6 जुलाई 2026 को 24 कैरेट सोना ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच चुका है। महंगाई, कमजोर रुपया और वैश्विक अनिश्चितता की वजह से सोने के दाम लगातार नई ऊंचाई छू रहे हैं।

ऐसे में सवाल यह नहीं है कि सोने में निवेश करें या नहीं, बल्कि यह है कि किस तरीके से करें ताकि रिटर्न भी मिले और रिस्क भी कम रहे।

सोने में निवेश क्यों जरूरी माना जाता है

भारतीय परिवारों के लिए सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि सुरक्षा की गारंटी माना जाता है। महंगाई बढ़ने पर सोने की कीमत भी आमतौर पर बढ़ती है, इसलिए इसे इन्फ्लेशन के खिलाफ एक बचाव माना जाता है।

शेयर बाजार में गिरावट के समय भी सोना अक्सर स्थिर बना रहता है, जिससे पोर्टफोलियो को संतुलन मिलता है। यही वजह है कि ज्यादातर फाइनेंशियल प्लानर कुल निवेश का 5 से 15% हिस्सा सोने में रखने की सलाह देते हैं।

सोने में निवेश करने के 4 तरीके

पहला तरीका है फिजिकल गोल्ड – यानी गहने, सिक्के या बार। यह सबसे पुराना तरीका है, लेकिन इसमें मेकिंग चार्ज, स्टोरेज की टेंशन और शुद्धता की चिंता बनी रहती है।

दूसरा तरीका है डिजिटल गोल्ड, जिसे PhonePe, Paytm और Google Pay जैसे ऐप के जरिए सिर्फ ₹1 से भी खरीदा जा सकता है। इसमें स्टोरेज की झंझट नहीं है, लेकिन यह सीधे तौर पर SEBI या RBI के दायरे में नहीं आता।

तीसरा तरीका है गोल्ड ETF, जो शेयर बाजार में ट्रेड होता है और इसके लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है। चौथा और सबसे आसान तरीका है गोल्ड म्यूचुअल फंड या SIP, जिसे ₹100-500 जितनी छोटी रकम से शुरू किया जा सकता है, बिना डीमैट अकाउंट के भी।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) का क्या हुआ

बहुत से लोग अभी भी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को सोने में निवेश का सबसे अच्छा तरीका मानते हैं, लेकिन एक बड़ा बदलाव हो चुका है।

सरकार ने फरवरी 2024 के बाद से कोई नई SGB सीरीज जारी नहीं की है, और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी अभी तक कोई नया कैलेंडर घोषित नहीं हुआ है। मौजूदा निवेशक अब सिर्फ सेकेंडरी मार्केट यानी स्टॉक एक्सचेंज से ही पुराने SGB खरीद सकते हैं।

बजट 2026 में एक और बदलाव हुआ है – अगर आप सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदते हैं, तो मैच्योरिटी पर मिलने वाली कैपिटल गेन टैक्स छूट अब सिर्फ ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स को ही मिलेगी।

सोना चांदी भाव और गोल्ड ईटीएफ SIP इलस्ट्रेशन

सोने में निवेश पर टैक्स के नियम

गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड पर टैक्स डेट फंड की तरह लगता है। 12 महीने से पहले बेचने पर यह शॉर्ट टर्म गेन माना जाता है और आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।

12 महीने के बाद बेचने पर यह लॉन्ग टर्म गेन बन जाता है, जिस पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5% टैक्स लगता है। फिजिकल गोल्ड के लिए यह अवधि 36 महीने है।

क्या अभी रिकॉर्ड हाई भाव पर सोने में निवेश करना सही रहेगा

यह हर निवेशक की अपनी जोखिम क्षमता और लक्ष्य पर निर्भर करता है, इसलिए कोई एक जवाब सबके लिए सही नहीं होगा।

एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय SIP के जरिए सोने में निवेश धीरे-धीरे करना जोखिम को कम कर सकता है, क्योंकि इससे भाव के उतार-चढ़ाव का औसत निकल आता है। पिछले कुछ महीनों में सोने-चांदी की कीमतों में आया उछाल इस बात का उदाहरण है कि कीमतें कितनी तेजी से बदल सकती हैं।

ClearTax की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा SGB धारकों को अपनी प्रीमैच्योर रिडेम्पशन विंडो पर खास नजर रखनी चाहिए, क्योंकि तय समय सीमा चूकने पर अगला मौका काफी बाद में मिलता है।

निवेश से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अपनी जरूरत, समय सीमा और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही फैसला लें, या किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या अभी सोने में निवेश करना सही समय है?
यह व्यक्तिगत जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है। एकमुश्त की जगह SIP के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना एक आम तरीका माना जाता है।

गोल्ड म्यूचुअल फंड और गोल्ड ETF में सोने में निवेश का क्या फर्क है?
ETF के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है, जबकि गोल्ड म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए बिना डीमैट अकाउंट के भी निवेश किया जा सकता है।

क्या अभी नए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदे जा सकते हैं?
नहीं। सरकार ने फरवरी 2024 के बाद कोई नई सीरीज जारी नहीं की है। मौजूदा SGB सिर्फ स्टॉक एक्सचेंज से सेकेंडरी मार्केट में ही खरीदे जा सकते हैं।

फिजिकल गोल्ड और डिजिटल गोल्ड में कौन बेहतर है?
दोनों के अपने फायदे-नुकसान हैं। डिजिटल गोल्ड में स्टोरेज की झंझट नहीं है, लेकिन यह सीधे SEBI या RBI के दायरे में नहीं आता, जबकि फिजिकल गोल्ड में मेकिंग चार्ज और स्टोरेज रिस्क होता है।

गोल्ड निवेश पर कितना टैक्स लगता है?
12 महीने बाद बेचने पर गोल्ड ETF और फंड पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है, बिना इंडेक्सेशन के।

आगे और समाचार पढ़ें:

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें। सटीकता की गारंटी नहीं है।

सोने में निवेशदेश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज

WhatsApp Group
Join Now
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular